पीरपैंती थर्मल पावर प्लांट: 422 रैयतों की 34.92 एकड़ जमीन पर लगी रोक, गंगा से आएगा पानी

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AI-जेनरेटेड-पीरपैंती थर्मल पावर प्लांट

भागलपुर में पीरपैंती थर्मल पावर प्लांट परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण एक अहम पड़ाव पर है. 34.92 एकड़ जमीन अधिग्रहित की जाएगी, जिससे 422 रैयत प्रभावित होंगे. गंगा नदी से 17 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाकर प्लांट तक पानी पहुंचाया जाएगा.

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Pirpainti Thermal Power Plant: पीरपैंती थर्मल पावर प्लांट परियोजना को लेकर भागलपुर में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया एक और महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गयी है. प्लांट के लिए जलापूर्ति की व्यवस्था विकसित करने को कहलगांव और पीरपैंती अंचल की 34.92135 एकड़ जमीन अधिग्रहित की जायेगी. इसके लिए जिला भूअर्जन कार्यालय ने बिहार भूमिगत पाइपलाइन के अधिकार नियम के तहत अधिसूचना जारी कर दी है.

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अधिसूचना जारी होते ही चिह्नित जमीन की खरीद-बिक्री और हस्तांतरण पर रोक लग गयी है. यानी प्रभावित रैयत अब सक्षम प्राधिकार की अनुमति के बिना अपनी जमीन किसी दूसरे व्यक्ति के नाम हस्तांतरित नहीं कर सकेंगे.

इस पूरी प्रक्रिया से 422 रैयत प्रभावित होंगे. इनमें कहलगांव अंचल के 225 और पीरपैंती अंचल के 197 रैयत शामिल हैं. परियोजना के लिए कुल नौ मौजा की जमीन चिह्नित की गयी है.

प्लांट तक ऐसे पहुंचेगा गंगा का पानी

पीरपैंती थर्मल पावर प्लांट के संचालन के लिए पानी की स्थायी व्यवस्था गंगा नदी से की जायेगी. इसके लिए गंगा किनारे इंटेक पंप हाउस बनाया जायेगा और वहां से करीब 17 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन के जरिये पानी प्लांट तक पहुंचाया जायेगा.

इस परियोजना के पूरा होने के बाद प्लांट को संचालन के लिए गंगा से करीब 42 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी उपलब्ध कराया जायेगा. इसके लिए इंटेक पंप हाउस और पाइपलाइन को जलापूर्ति व्यवस्था का मुख्य आधार बनाया गया है.

खास बात यह है कि प्लांट एरिया में पानी के लिए अलग से बोरिंग नहीं की जायेगी. निर्माण के दौरान आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से आवश्यक पानी उपलब्ध कराया जायेगा, जबकि प्लांट शुरू होने के बाद गंगा से स्थायी जलापूर्ति होगी.

कहलगांव में 225 रैयतों की 22.29 एकड़ जमीन

जिला भूअर्जन कार्यालय की अधिसूचना के अनुसार कहलगांव अंचल में 225 रैयतों की 22.2968 एकड़ जमीन अधिग्रहण के दायरे में आयेगी. वहीं पीरपैंती अंचल में 197 रैयतों की 12.63155 एकड़ जमीन चिह्नित की गयी है.

दोनों अंचलों को मिलाकर कुल 34.92135 एकड़ जमीन ली जायेगी. चिह्नित जमीन नौ मौजा में फैली है. इनमें आठ मौजा कहलगांव अंचल और एक मौजा पीरपैंती अंचल का है.

अधिसूचना में भीठ-2, भिन्डी, सड़क, सड़क रेलवे और रास्ता समेत अलग-अलग श्रेणी की जमीन का उल्लेख किया गया है. रास्ता श्रेणी की जमीन को भारत सरकार में निहित बताया गया है.

अब बिना अनुमति नहीं बेच सकेंगे जमीन

अधिसूचना जारी होने के बाद चिह्नित जमीन के स्वामित्व में बदलाव पर रोक रहेगी. संबंधित रैयत सक्षम प्राधिकार की अनुमति के बिना जमीन की खरीद-बिक्री या हस्तांतरण नहीं कर सकेंगे.

इसका उद्देश्य अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान जमीन के स्वामित्व में बदलाव को रोकना है, ताकि परियोजना के लिए चिह्नित भूमि पर आगे किसी तरह का विवाद खड़ा न हो.

हालांकि, जमीन अधिग्रहण को लेकर रैयतों को अपनी आपत्ति रखने का अधिकार दिया गया है. किसी रैयत या संबंधित व्यक्ति को पाइपलाइन के लिए जमीन लिये जाने पर आपत्ति है, तो वह सक्षम प्राधिकार सह जिला भूअर्जन पदाधिकारी के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है.

प्राप्त आपत्तियों पर नियमानुसार विचार करने के बाद भूअर्जन की आगे की प्रक्रिया पूरी की जायेगी.

27.10 करोड़ रुपये से होगी जमीन की व्यवस्था

गंगा किनारे इंटेक पंप हाउस के निर्माण के लिए भी जमीन की व्यवस्था की जा रही है. इसके लिए बिहार रैयती भूमि क्रय नीति, 2026 के तहत प्रस्ताव को स्वीकृति मिल चुकी है.

भूमि की व्यवस्था के लिए 27.10 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गयी है. परियोजना से जुड़े अलग-अलग कार्यों में समन्वय के लिए संबंधित पदाधिकारियों को भी नामित किया गया है.

पाइपलाइन के लिए चिह्नित सभी नौ मौजों का सर्वेक्षण पूरा होने के बाद अधिसूचना जारी की गयी है. अब अधिसूचना के बाद आपत्तियों और अन्य वैधानिक प्रक्रियाओं के आधार पर भूअर्जन की कार्रवाई आगे बढ़ेगी.

किसानों के लिए जमीन के साथ मुआवजे की प्रक्रिया भी अहम

इस परियोजना से प्रभावित 422 रैयतों के लिए सबसे अहम मुद्दा उनकी जमीन और उसके बदले मिलने वाला मुआवजा है. अधिसूचना के बाद अब रैयतों की नजर भूअर्जन की अगली कार्रवाई पर रहेगी.

एक ओर यह पाइपलाइन पीरपैंती थर्मल पावर प्लांट की जलापूर्ति व्यवस्था के लिए जरूरी है, वहीं दूसरी ओर जमीन देने वाले रैयतों के हितों की रक्षा भी प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी. आपत्तियों की सुनवाई और नियमानुसार भूअर्जन की प्रक्रिया इसी वजह से महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

Pirpainti Thermal Power Plant: पीरपैंती प्लांट के लिए जलापूर्ति का रास्ता साफ

पीरपैंती थर्मल पावर प्लांट के लिए केवल प्लांट निर्माण ही नहीं, बल्कि पानी जैसी बुनियादी जरूरत की स्थायी व्यवस्था भी जरूरी है. गंगा से 17 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाने की प्रक्रिया आगे बढ़ने से परियोजना के एक महत्वपूर्ण हिस्से का रास्ता साफ हुआ है.

अब आने वाले चरण में जमीन अधिग्रहण, आपत्तियों का निपटारा, इंटेक पंप हाउस और पाइपलाइन से जुड़े काम महत्वपूर्ण होंगे. परियोजना के लिए जलापूर्ति की यह व्यवस्था पूरी होने के बाद प्लांट के संचालन के लिए गंगा जल उपलब्ध कराया जा सकेगा.

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