केबीसी 18 में गूंजा अंग प्रदेश की 'मंजूषा कला' का डंका, अमिताभ बच्चन ने पूछे सवाल; 25 लाख जीतने वाली रुचिता ने दिया सही जवाब

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महानायक अमिताभ बच्चन का मंजूषा कला ने खींचा ध्यान. | Prabhat Khabar Network

कौन बनेगा करोड़पति (KBC) के सीजन 18 में अंग जनपद की प्रसिद्ध मंजूषा चित्रकला चर्चा में रही. अमिताभ बच्चन द्वारा पूछे गए प्रश्न का सही उत्तर देकर प्रतियोगी रुचिता ने ₹25 लाख जीते. यह राष्ट्रीय मंच पर मंजूषा कला को मिली एक बड़ी पहचान है.

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अंग जनपद (भागलपुर) की समृद्ध लोक संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहर 'मंजूषा चित्रकला' ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है. टेलीविजन के सबसे लोकप्रिय रियलिटी क्विज शो 'कौन बनेगा करोड़पति' (KBC) के सीजन 18 के 9वें एपिसोड में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने मंजूषा कला से जुड़ा प्रश्न पूछकर इसे राष्ट्रीय पटल पर चर्चा के केंद्र में ला दिया. महाराष्ट्र के धारावी की प्रतियोगी रुचिता अधलराव ने इस प्रश्न का सटीक जवाब देकर खेल का शानदार आगाज किया और आगे बढ़ते हुए 25 लाख रुपये की बड़ी धनराशि अपने नाम की.

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कौन बनेगा करोड़पति में छाया  मंजूषा कला. | Prabhat Khabar Network
कौन बनेगा करोड़पति में छाया  मंजूषा कला. | Prabhat Khabar Network

केबीसी के 9वें एपिसोड में बना चर्चा का विषय

20 अगस्त को प्रसारित केबीसी के 9वें एपिसोड में हॉट सीट पर बैठीं एसएससी (SSC) की छात्रा रुचिता अधलराव के सामने जब बिग बी ने अंग क्षेत्र की लोककला से जुड़ा सवाल रखा, तो उन्होंने बिना किसी झिझक के 'मंजूषा कला' का सही उत्तर दिया. इस प्रश्न का सही उत्तर देकर ₹5,000 की शुरुआती राशि जीतने वाली रुचिता ने आगे बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए ₹25 लाख के पड़ाव को पार किया. राष्ट्रीय मंच पर भागलपुर की पारंपरिक कला का उल्लेख होने से स्थानीय कलाकारों, बुद्धिजीवियों और कला प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह और गर्व का माहौल है.

70 के दशक के सिनेमा से लेकर केबीसी के मंच तक 'मंजूषा'

अंग जनपद की मंजूषा कला का इतिहास सदियों पुराना है. यह लोककला मूल रूप से सती बिहुला और भगवान विषहरी की गाथा से जुड़ी हुई है. 70 के दशक में बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता पृथ्वीराज कपूर ने भी बिहुला-विषहरी की इस पावन गाथा पर फिल्म बनाई थी. अब इतने दशकों बाद टीवी के सबसे प्रतिष्ठित शो 'केबीसी' में इसका जिक्र होना यह साबित करता है कि यह प्राचीन लोककला आज भी उतनी ही प्रासंगिक और विशिष्ट है.

हॉटसीट  पर बैठी थी महाराष्ट्र की  रुचित. | Prabhat Khabar Network
हॉटसीट  पर बैठी थी महाराष्ट्र की  रुचिता | Prabhat Khabar Network

तीन रंगों में समाहित प्रेम, समृद्धि और विकास का संदेश

मंजूषा गुरु मनोज पंडित ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि मंजूषा कला आज किसी परिचय की मोहताज नहीं है. उन्होंने बताया कि मंजूषा शैली में मुख्य रूप से तीन प्राकृतिक रंगों—गुलाबी, हरा और पीला का प्रयोग होता है, जो क्रमशः प्रेम, समृद्धि और सतत विकास का प्रतीक हैं. मनोज पंडित ने कहा कि समाज के सभी वर्गों के सहयोग से यह कला लगातार आगे बढ़ रही है. इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं. वर्तमान में 'इंटेक' (INTACH) भागलपुर चैप्टर और 'स्पिक मैके' के संयुक्त तत्वावधान में "घर-घर मंजूषा, हर घर मंजूषा" अभियान चलाया जा रहा है, जिसका लक्ष्य 1,08,000 लोगों को इस अनूठी कला से जोड़कर जागरूक करना है.

स्टेट अवार्डी पवन सागर को ऑनलाइन गेम में भी मिला था यही सवाल

मंजूषा कला के लिए राज्य पुरस्कार (स्टेट अवार्ड) से सम्मानित विख्यात कलाकार पवन कुमार सागर ने बताया कि यह सुखद संयोग रहा कि जब वे केबीसी का ऑनलाइन प्ले-अलॉन्ग खेल रहे थे, तब उनके सामने भी स्क्रीन पर यही प्रश्न आया था. उल्लेखनीय है कि निर्मला देवी घराने से ताल्लुक रखने वाले पवन सागर राष्ट्रीय स्तर पर बिहार का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं. हाल ही में भोपाल और कर्नाटक के बेंगलुरु में भारतीय विद्या भवन के 60 वर्ष पूरे होने पर आयोजित 'चित्र भारती राष्ट्रीय कार्यशाला' में उन्होंने मंजूषा कला का लाइव प्रदर्शन कर खूब सराहना बटोरी थी.


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