नहीं रहे 284 बार ग्राम पंचायत से लेकर राष्ट्रपति तक का चुनाव लड़ने वाले 'धरती पकड़', लाहौर में जन्म, आजादी से पहले आये भागलपुर
नागरमल बाजोरिया उर्फ धरती पकड़. | Prabhat Khabar Network
284 बार चुनाव लड़ने वाले 'धरती पकड़' के नाम से मशहूर समाजसेवी नागरमल बाजोरिया का निधन हो गया है. उन्होंने ग्राम पंचायत से लेकर राष्ट्रपति चुनाव तक लड़ा, लेकिन कभी जीत हासिल नहीं की.
भागलपुर के चर्चित समाजसेवी और 284 बार चुनाव लड़ने के लिए ‘धरती पकड़’ के नाम से मशहूर नागरमल बाजोरिया का गुरुवार सुबह पटना में इलाज के दौरान निधन हो गया. वह 97 वर्ष के थे. एमपी द्विवेदी रोड स्थित देवी बाबू धर्मशाला के समीप रहने वाले नागरमल बाजोरिया ने ग्राम पंचायत से लेकर विधानसभा, विधान परिषद और लोकसभा तक के चुनाव लड़े. इतना ही नहीं, उन्होंने राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में भी 17 बार किस्मत आजमाई. हालांकि, उन्हें किसी भी चुनाव में जीत नहीं मिली.
आपके शहर में

राष्ट्रपति चुनाव में इतने काम वोट मिले कि जमानत राशि हो गयी वापस
ईस्टर्न बिहार चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के पदाधिकारी रमण साह ने बताया कि नागरमल बाजोरिया का जन्म पाकिस्तान के लाहौर में हुआ था. देश की आजादी से पहले ही उनका परिवार भागलपुर आकर बस गया था.
चेंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष रामगोपाल पोद्दार के अनुसार, नागरमल बाजोरिया 284 चुनाव लड़कर एक अलग रिकॉर्ड बना चुके थे. वर्ष 2013 से पहले राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार बने थे और उन्हें इतने वोट मिले थे कि उनकी जमानत राशि वापस हो गई थी. उन्होंने राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में कुल 17 बार भाग लिया था.

चुनाव प्रचार में गधों को साथ लेकर निकलते थे
नागरमल बाजोरिया अपने अनोखे चुनाव प्रचार के लिए भी चर्चा में रहते थे. वह अक्सर चुनाव प्रचार के दौरान गधों को अपने साथ रखते और खुद तांगे पर चलते थे. उनके इस अंदाज की वजह से वह चुनाव के दौरान खूब सुर्खियां बटोरते थे.
2004 के लोकसभा चुनाव के दौरान सैंडिस कंपाउंड में एनडीए प्रत्याशी और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के समर्थन में आयोजित जनसभा में भी उन्होंने अपने समर्थकों के साथ एनडीए का समर्थन किया था. बाद में वह फिर स्वतंत्र रूप से चुनाव मैदान में उतर गए. उन्होंने 278 से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ा था.
सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे
नागरमल बाजोरिया केवल चुनाव लड़ने के लिए ही चर्चित नहीं थे, बल्कि सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाते थे. सामाजिक और व्यवसायी संगठनों से जुड़े लोगों ने बताया कि उनका भागलपुर से गहरा लगाव था. गरीब कन्याओं के विवाह में सहयोग, आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की पढ़ाई में मदद और चापाकल लगवाने जैसे कई सामाजिक कार्यों में वह शामिल रहे. उन्होंने गौवध के खिलाफ भी अभियान चलाया था.
सामाजिक और व्यवसायी संगठनों ने जताया शोक
मारवाड़ी सम्मेलन के अध्यक्ष अनिल खेतान, चेंबर अध्यक्ष शरद सलारपुरिया, पूर्व अध्यक्ष श्रवण बाजोरिया और चांद झुनझुनवाला समेत कई लोगों ने उनके निधन पर शोक जताया. उन्होंने कहा कि नागरमल बाजोरिया के निधन से भागलपुर ने एक ऐसे व्यक्ति को खो दिया, जिसकी सामाजिक गतिविधियों और चुनावी जीवन की अपनी अलग पहचान थी.
चांद झुनझुनवाला ने बताया कि नागरमल बाजोरिया का पार्थिव शरीर शहरवासियों के अंतिम दर्शन के लिए भागलपुर लाया जा रहा है. पार्थिव शरीर के पटना से शाम तक भागलपुर पहुंचने की उम्मीद है.
यह भी पढ़ें : मन्नत पूरी हो तो चढ़ाते हैं बांसुरी! एक जमींदार की इच्छा से शुरू हुई पूजा, आज गोसाईंगांव की पहचान है श्रीकृष्ण मंदिर
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए