राघोपुर बांध टूटने की त्रासदी के पीछे प्रशासनिक सुस्ती उजागर, 3 साल पहले ही इंजीनियरों ने दी थी खतरे की रिपोर्ट

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गंगा कटाव की मार झेलता राघोपुर

फरवरी 2023 में इंजीनियरों ने विक्रमशिला सेतु के नवगछिया तट पर बढ़ते गंगा के दबाव को लेकर चेतावनी दी थी. बावजूद इसके तट सुरक्षा की योजना जमीन के विवाद में फंस गई, जिससे राघोपुर बांध टूटने जैसी तबाही हुई. अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या प्रशासनिक सुस्ती ने इस आपदा को बढ़ाया?

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भागलपुर. राघोपुर बांध टूटने के बाद गंगा के कहर से जूझ रहे लोगों की मुश्किलों के बीच अब सवाल उठने लगे हैं कि यदि समय रहते इंजीनियरों की चेतावनी पर गंभीरता से कार्रवाई होती तो क्या आज हालात इतने भयावह होते. भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और बिहार सरकार के पथ निर्माण विभाग के तकनीकी कार्यालय की टीम ने फरवरी 2023 में विक्रमशिला सेतु का निरीक्षण कर नवगछिया की ओर गंगा के बढ़ते दबाव को लेकर आगाह किया था. छह फरवरी 2023 को जारी रिपोर्ट में उत्तरी तट को सुरक्षित करने की जरूरत बतायी गयी थी, लेकिन तट सुरक्षा की योजना जमीन के पेच में उलझी रही.

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2023 की रिपोर्ट में गंगा के बढ़ते दबाव को लेकर दी गयी थी चेतावनी

फरवरी 2023 में तकनीकी टीम ने विक्रमशिला सेतु का निरीक्षण किया था. छह फरवरी को जारी रिपोर्ट में बताया गया था कि विक्रमशिला सेतु के नवगछिया तरफ गंगा नदी धीरे-धीरे उत्तर दिशा की ओर बढ़ रही है. इसे नवगछिया तरफ गंगा तट के लिए खतरे का संकेत माना गया था. रिपोर्ट में भविष्य में विक्रमशिला सेतु के पहुंच पथ की सुरक्षा के मद्देनजर गंगा के उत्तरी तट को सुरक्षित करने की आवश्यकता बतायी गयी थी. तट को सुरक्षित करने की दिशा में कार्रवाई नहीं हो पाने से अब उस चेतावनी की गंभीरता पर सवाल उठ रहे हैं.

जमीन के पेच में अटक गयी तट सुरक्षा की योजना

तकनीकी रिपोर्ट के बाद तट सुरक्षा को लेकर पहल की जरूरत थी, लेकिन मामला जमीन की उपलब्धता और हस्तांतरण के पेच में फंस गया. परिणाम यह हुआ कि प्रस्तावित सुरक्षा कार्य समय पर धरातल पर नहीं उतर सका. आज गंगा के कटाव और बाढ़ से प्रभावित लोग घर छोड़ने को मजबूर हैं. कई परिवारों को अपना घर खुद उजाड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ रहा है. लोगों का कहना है कि समय रहते तट सुरक्षा के उपाय किये गये होते तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था.

18 नवंबर 2025 को रेलवे से जमीन ट्रांसफर करने का आग्रह

तट सुरक्षा के लिए प्रस्तावित गाइड बांध के निर्माण में रेलवे की जमीन भी आड़े आ रही थी. इसी को लेकर राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, भागलपुर के कार्यपालक अभियंता ने 18 नवंबर 2025 को सोनपुर के मंडल रेल प्रबंधक को पत्र लिखा था. पत्र में गाइड बांध के निर्माण के लिए रेलवे की जमीन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को हस्तांतरित करने का आग्रह किया गया था, ताकि प्रस्तावित सुरक्षा कार्य को आगे बढ़ाया जा सके.

12 दिसंबर 2025 को डीएम से भी की गयी थी कार्रवाई की मांग

रेलवे की जमीन के हस्तांतरण के मामले में राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल की ओर से जिलाधिकारी को भी पत्र भेजा गया था. 12 दिसंबर 2025 को भेजे गये पत्र में रेलवे की संबंधित जमीन को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को हस्तांतरित कराने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया गया था. इसके बावजूद प्रस्तावित गाइड बांध का निर्माण नहीं हो सका. इससे यह सवाल उठ रहा है कि जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया और उसके फॉलोअप में कितनी गंभीरता बरती गयी.

910 मीटर लंबे गाइड बांध की बनी थी योजना

विक्रमशिला सेतु की उत्तरी सीमा यानी नवगछिया की ओर से महादेवपुर घाट तक अपस्ट्रीम में गाइड बांध बनाने की योजना तैयार की गयी थी. प्रस्ताव के अनुसार करीब 910 मीटर लंबे और 22 मीटर चौड़े गाइड बांध का निर्माण किया जाना था. इस योजना से पहले सात नवंबर 2025 को जल संसाधन विभाग और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की टीम ने संबंधित स्थल का निरीक्षण भी किया था. इसके बाद तट सुरक्षा और गाइड बांध की जरूरत को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ी.

जल संसाधन विभाग ने भी उत्तरी तट को सुरक्षित करने को बताया जरूरी

जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट में भी कहा गया कि विक्रमशिला सेतु के नवगछिया तरफ गंगा धीरे-धीरे उत्तर दिशा की ओर बढ़ रही है. विभाग ने भविष्य में विक्रमशिला सेतु के पहुंच पथ की सुरक्षा के मद्देनजर नदी के उत्तरी तट को सुरक्षित करना बेहद जरूरी बताया था. इस प्रस्ताव पर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की सहमति भी मिलने की बात सामने आयी है. रेलवे की जमीन के हस्तांतरण को लेकर जिला प्रशासन की ओर से भी सोनपुर के मंडल रेल प्रबंधक को पत्र लिखा गया था.

चेतावनी से तबाही तक, अब उठ रहे हैं कई सवाल

फरवरी 2023 में नदी के रुख को लेकर चेतावनी, नवंबर और दिसंबर 2025 में जमीन हस्तांतरण को लेकर पत्राचार और नवंबर 2025 में स्थल निरीक्षण के बावजूद गाइड बांध का निर्माण अब तक नहीं हो सका. इसी बीच राघोपुर बांध टूटने से बड़े इलाके में तबाही मच गयी. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 2023 की तकनीकी चेतावनी और बाद की तट सुरक्षा संबंधी रिपोर्टों को राघोपुर बांध और आसपास की सुरक्षा व्यवस्था से जोड़कर व्यापक स्तर पर क्यों नहीं देखा गया. यदि समय रहते सभी रिपोर्टों को एक साथ रखकर तट और बांध की सुरक्षा की समीक्षा की जाती तो संभावित खतरे को कम करने के लिए पहले से ठोस कदम उठाये जा सकते थे. फिलहाल तबाही झेल रहे लोगों को राहत और पुनर्वास के साथ यह भी इंतजार है कि जिम्मेदारी तय करने और भविष्य के लिए स्थायी सुरक्षा उपायों पर प्रशासन क्या कदम उठाता है.

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