3656 करोड का मुंगेर-मिर्जाचौकी ग्रीनफील्ड पथ: मिट्टी संकट और मुआवजे के पेंच में उलझा निर्माण कार्य, देखें ग्राउंड रिपोर्ट

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बिहार की महत्वाकांक्षी मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन सड़क परियोजना निर्धारित समय से काफी पीछे चल रही है. मिट्टी की अनुपलब्धता, मुआवजे के विवाद और प्रशासनिक अड़चनें निर्माण कार्य में बाधा डाल रही हैं. जानें इस अहम प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति और देरी के पीछे की असली वजहें.

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बिहार के सीमांचल और पूर्वी हिस्से को विकास की नई रफ्तार देने वाली 3,656.27 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी मुंगेर-मिर्जाचौकी ग्रीनफील्ड फोरलेन सड़क परियोजना अपने निर्धारित समय से काफी पीछे चल रही है. तकनीकी, प्रशासनिक और प्राकृतिक कारणों के चलते इस प्रोजेक्ट के चारों पैकेज अपनी मूल समय-सीमा से लगभग 2.5 से 2.8 वर्ष (31 से 33 महीने) की देरी से चल रहे हैं.

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गंगा नदी के करीब स्थित होने के कारण इस पूरी परियोजना में मिट्टी की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बन गई है. वर्तमान में मुंगेर और भागलपुर जिले बाढ़ की चपेट में हैं, जिससे तटबंध निर्माण के लिए मिट्टी नहीं मिल पा रही है. इसके विकल्प के तौर पर फ्लाई ऐश (तालाब की राख) का इस्तेमाल किया जा रहा था, लेकिन एनटीपीसी (NTPC) द्वारा राख उपलब्ध कराने में भी विलंब किया जा रहा है.

मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन: चारों पैकेजों की अद्यतन स्थिति एक नजर में

पैकेज व जिलाकुल लंबाई / पूर्ण कार्यकुल लागतभौतिक प्रगतिसंभावित पूर्ण तिथि
पैकेज-1 (मुंगेर)22.56 किमी / 20.20 किमी₹845.27 करोड़87.14%15 नवंबर 2026
पैकेज-2 (भागलपुर)29.42 किमी / 29.42 किमी₹902.00 करोड़96.90%20 नवंबर 2026
पैकेज-3 (भागलपुर)32.35 किमी / 25.90 किमी₹1,017.00 करोड़82.74%31 दिसंबर 2026
पैकेज-4 (भागलपुर-साहिबगंज)36.58 किमी / 35.50 किमी₹892.00 करोड़93.70%25 अक्टूबर 2026

परियोजना में देरी की प्रमुख बाधाएं

फोरलेन सड़क के निर्माण में देरी के पीछे कई जमीनी और प्रशासनिक बाधाएं सामने आ रही हैं:

  • भूमि अधिग्रहण व मुआवजा: पैकेज-1 में मुआवजे की मांग को लेकर भूस्वामियों के भारी विरोध के कारण राज्य सरकार को 3.5 किमी खंड को परियोजना के दायरे से बाहर करना पड़ा.
  • राख और मिट्टी का संकट: बाढ़ के कारण क्षेत्र का जलमग्न रहना और एनटीपीसी से तालाब की राख की धीमी आपूर्ति सबसे बड़ी तकनीकी बाधा है.
  • विद्युत लाइनों का पेंच: पैकेज-2 में पीजीसीआईएल (PGCIL) की दो ईएचटी (EHT) लाइनों को स्थानांतरित करने का कार्य अभी भी लंबित है.
  • तकनीकी कार्य: पैकेज-3 में आरओबी का अप्रोच कार्य तथा कुछ हिस्सों में सबग्रेड, जीएसबी और पीक्यूसी का कार्य पूरा होना बाकी है.

फोरलेन बनने से खुलेंगे रोजगार और विकास के नए द्वार

तमाम बाधाओं और देरी के बावजूद आम जनता और व्यवसायियों को इस प्रोजेक्ट के पूरा होने का बेसब्री से इंतजार है. इस फोरलेन के चालू होने से क्षेत्र की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी:

  • आर्थिक गतिविधियां: सड़क के किनारे खाने-पीने के होटल, ढाबे और वाहनों की मरम्मत के लिए कई संस्थान खुलेंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.
  • कॉमर्शियल हब: आगामी पांच वर्षों में फोरलेन के किनारे कई शैक्षणिक संस्थान (इंस्टीट्यूशन), गोदाम, कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स व लॉजिस्टिक पार्क का निर्माण होगा.
  • प्लानिंग एरिया का विकास: भागलपुर शहर में नया प्लानिंग एरिया विकसित होना है, जो फोरलेन के किनारे कई हिस्सों में विस्तृत होगा. इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है.

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