TMB में रिटायरमेंट लाभ के लिए तीन लाख रुपये के आरोप से हड़कंप, जांच कमेटी गठित, 4 को शोकॉज

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तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के सेवांतलाभ के लिए कथित तौर पर तीन लाख रुपये के लेन-देन का मामला गरमा गया है. एक वायरल ऑडियो के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल जांच कमेटी गठित की है और चार लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है.

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Bhagalpur University news: भागलपुर. तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) में रिटायरमेंट लाभ से जुड़े कथित लेन-देन का मामला अब जांच के घेरे में आ गया है. सोशल मीडिया पर वायरल एक ऑडियो में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के रिटायरमेंट लाभ और पेंशन शुरू कराने के एवज में तीन लाख रुपये के लेन-देन की बात सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है.

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वायरल ऑडियो में दो सेवानिवृत्त एसओ के बीच बातचीत बतायी जा रही है. बातचीत में रिटायरमेंट लाभ की राशि जारी कराने और पेंशन शुरू कराने के लिए कथित तौर पर पैसे लिये जाने का आरोप लगाया गया है. हालांकि, प्रभात खबर वायरल ऑडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है.

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी कुलपति प्रो. विमलेंदु शेखर झा के आदेश पर रजिस्ट्रार प्रो. रामाशीष पूर्वे ने मंगलवार को जांच कमेटी गठित करने की अधिसूचना जारी की. कमेटी को तीन दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है.

तीन सदस्यीय कमेटी करेगी पूरे मामले की जांच

विवि प्रशासन की ओर से गठित तीन सदस्यीय कमेटी में एफए चतुर किस्कू को संयोजक बनाया गया है. वहीं प्रो. कमल प्रसाद और प्रो. मुश्फिक आलम को कमेटी का सदस्य बनाया गया है.

बताया जा रहा है कि कमेटी वायरल ऑडियो में सामने आये आरोपों से जुड़े सभी पक्षों से पूछताछ करेगी. जिन लोगों पर कथित तौर पर तीन लाख रुपये के लेन-देन का आरोप लगा है, उनसे भी उनका पक्ष लिया जायेगा. आरोपों से संबंधित लोगों से लिखित जवाब लेने के बाद कमेटी पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपेगी.

बातचीत में रिटायरमेंट लाभ के बदले पैसे लेने का आरोप

वायरल ऑडियो में दो पूर्व एसओ के बीच रिटायरमेंट लाभ को लेकर बातचीत होने का दावा किया जा रहा है. बातचीत में एक सेवानिवृत्त एसओ की ओर से यह कहा जाता है कि उन्हें अब तक पेंशन सहित कोई रिटायरमेंट लाभ विश्वविद्यालय से नहीं मिला है.

इसके बाद बातचीत में एक पूर्व सेवानिवृत्त एसओ द्वारा वर्तमान एसओ से मिलने की सलाह दी जाती है. कथित बातचीत में यह भी कहा गया कि संबंधित अधिकारी से मिलने पर काम आसानी से और कुछ दिनों में हो सकता है.

इसी दौरान पेंशन शुरू कराने के एवज में कथित रूप से पैसे देने की बात पूछे जाने पर तीन लाख रुपये लिये जाने का आरोप सामने आता है. बातचीत में यह भी दावा किया गया कि उक्त राशि में विश्वविद्यालय के एक अधिकारी को भी हिस्सा दिया गया है.

इन आरोपों की वास्तविकता क्या है, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी. विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसी उद्देश्य से कमेटी गठित कर पूरे मामले की पड़ताल शुरू की है.

चार लोगों को शोकॉज, 24 घंटे में मांगा जवाब

मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने चार लोगों को शोकॉज भी जारी किया है. प्रभारी कुलपति के आदेश पर रजिस्ट्रार की ओर से जारी पत्र में दो सेवानिवृत्त कर्मचारी, एक वर्तमान अधिकारी और एक कार्यरत एसओ से जवाब मांगा गया है.

सभी संबंधित लोगों को 24 घंटे के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है. रजिस्ट्रार ने शोकॉज में स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब नहीं देने पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से एकतरफा कार्रवाई की जा सकती है.

इस कार्रवाई के बाद विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के बीच भी मामला चर्चा का विषय बन गया है.

वायरल ऑडियो के बाद कर्मचारियों में बढ़ी बेचैनी

वायरल ऑडियो सामने आने के बाद टीएमबीयू के कर्मचारियों में हड़कंप की स्थिति बतायी जा रही है. कर्मचारियों के बीच सेवांतलाभ और पेंशन से जुड़े कामकाज को लेकर चर्चाएं तेज हो गयी हैं.

बताया जा रहा है कि कुछ कर्मचारी मोबाइल फोन पर आने वाली बातचीत को रिकॉर्ड किये जाने की आशंका के कारण फोन पर बात करने से भी बच रहे हैं. हालांकि, यह कर्मचारियों की व्यक्तिगत प्रतिक्रिया है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.

Bhagalpur University news: अब जांच रिपोर्ट से खुलेगा आरोपों का सच

विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को सिर्फ वायरल ऑडियो तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि कमेटी बनाकर औपचारिक जांच शुरू कर दी है. कमेटी संबंधित लोगों के बयान, लिखित पक्ष और आरोपों से जुड़े तथ्यों की जांच करेगी.

अब सबसे महत्वपूर्ण यह होगा कि तीन सदस्यीय कमेटी तीन दिनों में अपनी रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने रखती है. जांच के निष्कर्ष के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल ऑडियो में लगाये गये आरोपों में कितनी सच्चाई है और विश्वविद्यालय स्तर पर आगे किस तरह की कार्रवाई की जाती है.

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