भागलपुर: सावन की अंतिम सोमवारी पर बूढ़ानाथ मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, सुबह 5 बजे हुई सरकारी पूजा; गूंजे जयकारे

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सावन की अंतिम सोमवारी को लेकर बाबा बुढ़ाना नाथ मंदिर में पूजा अर्चना करने के लिए लगा भीड़

भागलपुर के ऐतिहासिक बाबा बूढ़ानाथ मंदिर में सावन की अंतिम सोमवारी पर भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा. सुबह 5 बजे सरकारी पूजा संपन्न हुई, जिसके बाद हजारों भक्तों ने बाबा का जलाभिषेक किया.

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भागलपुर के ऐतिहासिक और सुप्रसिद्ध शिव मंदिर बाबा बूढ़ानाथ में सावन माह की आखरी सोमवारी के पावन अवसर पर शिवभक्तों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा. अहले सुबह 5 बजे पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बाबा की विशेष सरकारी पूजा संपन्न की गई. अनुष्ठान समाप्त होने के बाद आम श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह के पट खोल दिए गए, जिसके बाद हजारों की संख्या में पहुंचे भक्तों ने कतारबद्ध होकर भोलेनाथ का जलाभिषेक किया.

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गंगाजल और पंचामृत से हुआ बाबा का भव्य अभिषेक

सावन की अंतिम सोमवारी को लेकर बाबा बूढ़ानाथ मंदिर में अहले सुबह से ही अलौकिक आध्यात्मिक छटा देखने को मिली:

  • सरकारी पूजा: सुबह 5 बजे भगवान शिव की पारंपरिक सरकारी पूजा आयोजित की गई.
  • विशिष्ट अभिषेक: इस विशेष अनुष्ठान के दौरान भगवान शिव का पवित्र गंगाजल, ताजे फूल-फल और पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से भव्य रुद्राभिषेक किया गया.
  • सान्निध्य एवं पुरोहित: यह पूरी धार्मिक विधि मंदिर के महंत शिवनारायण गिरि के कुशल मार्गदर्शन और सान्निध्य में संपन्न हुई. मुख्य अनुष्ठान पंडित अभिषेक पांडेय ने पूरी शुद्धता और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराया.

पट खुलते ही उमड़े श्रद्धालु, गूंजा मंदिर परिसर

सरकारी पूजा और महाआरती संपन्न होने के तुरंत बाद मंदिर के पट आम शिवभक्तों के दर्शनार्थ खोल दिए गए:

  • आस्था का सैलाब: पट खुलने की प्रतीक्षा में सुबह से ही लंबी कतारों में खड़े श्रद्धालुओं की भीड़ बाबा के जलाभिषेक के लिए उमड़ पड़ी.
  • भक्तिमय माहौल: श्रद्धालुओं द्वारा लगाए जा रहे 'हर-हर महादेव' और 'बाबा बूढ़ानाथ की जय' के गगनभेदी जयकारों से पूरा मंदिर परिसर और आसपास का इलाका भक्तिमय हो गया.

मंदिर प्रबंधन की चाक-चौबंद रही व्यवस्था

भारी भीड़ के बावजूद दर्शन-पूजन सुचारू रूप से चलता रहे, इसके लिए मंदिर प्रबंधन की ओर से विशेष इंतजाम किए गए थे.

पूरी पूजा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को सुव्यवस्थित तरीके से संचालित करने में मंदिर के प्रबंधक बाल्मिकी सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. प्रबंधन की मुस्तैदी के कारण हजारों श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्ण ढंग से कतारबद्ध होकर बाबा बूढ़ानाथ का दर्शन व जलाभिषेक किया और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की मंगल कामना की.


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