अकबरनगर और चानन बहियार में दोबारा बढ़ा बाढ़ का पानी, निचले इलाकों में फिर बढ़ी ग्रामीणों की टेंशन

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फोटो- निचले इलाकों में बाढ़ का घुसा पानी

गंगा नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि से अकबरनगर और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा फिर बढ़ गया है. चानन बहियार जलमग्न होने से पशुपालकों के लिए चारे की किल्लत पैदा हो गई है, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं.

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अकबरनगर. गंगा नदी के जलस्तर में कई दिनों तक कमी के बाद गुरुवार को अचानक फिर बढ़ोतरी होने से अकबरनगर और आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. गंगा का पानी बढ़ने से चानन बहियार भी जलमग्न हो गया है. इससे बाढ़ प्रभावित लोगों की परेशानी एक बार फिर बढ़ने लगी है. वहीं पशुपालकों के सामने चारे का संकट लगातार बना हुआ है.

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पानी बढ़ने से निचले इलाकों में फिर बढ़ी चिंता

ग्रामीणों के अनुसार पिछले कई दिनों से गंगा के जलस्तर में लगातार कमी आ रही थी, जिससे लोगों को राहत की उम्मीद जगी थी. लेकिन गुरुवार को अचानक पानी बढ़ने से लोगों की चिंता फिर बढ़ गयी. निचले इलाकों और बहियार में पानी फैलने से बाढ़ प्रभावित परिवार सतर्क हो गये हैं. ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर में जल्द कमी नहीं आयी तो आसपास के कई इलाकों में दोबारा बाढ़ की स्थिति गंभीर हो सकती है.

चानन बहियार में पानी भरने से हरा चारा प्रभावित

बाढ़ का सबसे अधिक असर पशुपालकों पर पड़ रहा है. चानन बहियार और निचले क्षेत्रों में पानी भर जाने से हरे चारे की उपलब्धता प्रभावित हो गयी है. जिन स्थानों पर पहले पशु आसानी से चरने जाते थे, वहां अब पानी जमा है. ऐसे में मवेशियों के लिए रोजाना चारे की व्यवस्था करना पशुपालकों के सामने बड़ी चुनौती बन गयी है.

सड़क किनारे और ऊंचे स्थानों पर मवेशी बांधने की मजबूरी

बाढ़ के कारण कई पशुपालकों के घरों और पशु बांधने वाले स्थानों के आसपास भी पानी जमा हो गया है. इस वजह से कई लोग मजबूरी में सड़क किनारे या ऊंचे स्थानों पर मवेशियों को बांध रहे हैं. सड़क किनारे पशुओं को रखने के कारण पशुपालकों को दिन-रात उनकी देखभाल करनी पड़ रही है. इससे उनकी परेशानी और बढ़ गयी है.

दूर-दराज से खरीदकर लाना पड़ रहा पशु चारा

ग्रामीणों ने बताया कि बहियार में पानी फैलने से स्थानीय स्तर पर हरा चारा मिलना मुश्किल हो गया है. कई पशुपालक अब दूर-दराज के क्षेत्रों से चारा खरीदकर अपने मवेशियों तक पहुंचा रहे हैं. इससे पशुपालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है. बाढ़ का पानी कम होने के बाद ही बहियार में दोबारा चारा उगने और पशुओं के लिए चरने की जगह उपलब्ध होने की उम्मीद है.

पानी बढ़ने से राहत की उम्मीद पर फिरा पानी

गुरुवार को गंगा और चानन बहियार में पानी बढ़ने से ग्रामीणों की बाढ़ से राहत की उम्मीदों को झटका लगा है. हालांकि ग्रामीण स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं और जलस्तर में कमी आने का इंतजार कर रहे हैं. पशुपालकों का कहना है कि बाढ़ का पानी पूरी तरह हटने के बाद ही चारे की समस्या दूर होगी और मवेशियों की स्थिति सामान्य हो सकेगी.

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