मौके पर परिवार के सभी लोग मौजूद थे. इससे पहले सुबह की नमाज के बाद दरगाह परिसर में कुरान खानी का आयोजन किया गया. उर्स-ए-पाक को लेकर दरगाह परिसर में अकिदतमंदों की भीड़ उमड़ पड़ी थी. मगरिब की नमाज के बाद दरगाह परिसर में नातिया व तकरीर प्रोग्राम हुए. समाज में फैले दहेज प्रथा को लेकर हो रही बुराई से बचने के लिए मदरसा के बच्चों ने संदेश दिया. मौके पर खानकाह-ए-पीर दमड़िया के साहिबे सज्जादा सैयद शाह फखरे आलम हसन ने कुरान-ए-पाक की तालिम पर विस्तार से रोशनी डाली. उन्होंने कहा कि कुरान अल्लाह की आखिरी किताब है.
हर इनसान के लिए अच्छी व सच्ची जिंदगी गुजारने का पैगाम है. समाज से बुराई खत्म हो, इसके लिए कुरान पर अमल करने की जरूरत है. इस दौरान मदरसा के सात बच्चों के हाफिज-ए-कुरान बनने पर दस्तारबंदी की गयी. मौके पर सैयद अली अहमद, कारी रियाज, हाफिज कैश, मुफ्ती अरशद, मौलाना मतिउर्रहमान, मौलाना अतीउर्रहमान आदि उपस्थित थे.