एफसीआरए संशोधन विधेयक की 31 सदस्यीय जेपीसी गठित, अध्यक्ष बने डॉ संजय जायसवाल

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भाजपा नेताओं के साथ सांसद डॉ संजय जायसवाल

FCRA संशोधन विधेयक 2026 की 31 सदस्यीय JPC के अध्यक्ष पश्चिम चंपारण के सांसद डॉ. संजय जायसवाल बनाए गए हैं. जानिए JPC में कौन-कौन सदस्य हैं और विधेयक की समिति क्यों करेगी समीक्षा.

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FCRA BILL: पश्चिम चंपारण के सांसद डॉ. संजय जायसवाल को विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 की जांच के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने डॉ. जायसवाल को समिति का चेयरपर्सन नियुक्त किया है. लोकसभा सचिवालय की ओर से गुरुवार, 3 सितंबर को जारी बुलेटिन में इसकी आधिकारिक जानकारी दी गई है. FCRA संशोधन विधेयक से जुड़े महत्वपूर्ण प्रावधानों की समीक्षा के लिए गठित इस संयुक्त संसदीय समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल हैं. समिति कुल 31 सदस्यों की है. डॉ. संजय जायसवाल को इसकी अध्यक्षता की जिम्मेदारी मिलने को पश्चिम चंपारण के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है.

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विदेशी अंशदान से जुड़े कानून की होगी समीक्षा

विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम यानी FCRA के तहत विदेश से मिलने वाले धन और उसके इस्तेमाल को नियंत्रित किया जाता है. FCRA संशोधन विधेयक, 2026 में विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाले संगठनों से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव है. विधेयक की विभिन्न धाराओं और उसके प्रावधानों पर संयुक्त संसदीय समिति विचार करेगी. समिति संबंधित पक्षों के विचार और सुझावों पर भी विचार करेगी. इसके बाद विधेयक को लेकर अपनी रिपोर्ट संसद में पेश करेगी. ऐसे में समिति के अध्यक्ष के रूप में डॉ. संजय जायसवाल की भूमिका महत्वपूर्ण होगी.

डॉ संजय ने प्रधानमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष का जताया आभार

JPC का अध्यक्ष बनाए जाने पर डॉ. संजय जायसवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रति हृदय से आभार जताया है. उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण दायित्व के लिए वह नेतृत्व के आभारी हैं. उन्होंने विश्वास जताया कि समिति के अध्यक्ष के रूप में वह इस जिम्मेदारी का पूरी गंभीरता, निष्पक्षता और प्रतिबद्धता के साथ निर्वहन करेंगे. पश्चिम चंपारण के सांसद को संसद की महत्वपूर्ण संयुक्त संसदीय समिति की अध्यक्षता मिलने की जानकारी सामने आने के बाद जिले के भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भी खुशी है. कार्यकर्ताओं ने इसे पश्चिम चंपारण के लिए गौरव का विषय बताया है.

निशिकांत दुबे, सुप्रिया सुले समेत 31 सदस्य

लोकसभा से समिति में डॉ. संजय जायसवाल के अलावा भर्तृहरि महताब, तेजस्वी सूर्या, कमलेश जांगड़े, मुकेशकुमार चंद्रकांत दलाल, डॉ. निशिकांत दुबे, विष्णु दयाल राम, अनंत नायक, अरविंद धर्मापुरी, एंटो एंटनी, कैप्टन विरियाटो फर्नांडिस, मोहम्मद हमदुल्लाह सईद, काली चरण मुंडा, जिया उर रहमान, कल्याण बनर्जी, ए. राजा, लावू श्री कृष्ण देवरायालु, नरेश गणपत म्हस्के, कौशलेन्द्र कुमार, सुप्रिया सुले और ई. टी. मोहम्मद बशीर को सदस्य बनाया गया है. राज्यसभा से सी. सदानंदन मास्टर, हर्षवर्धन श्रृंगला, उज्ज्वल देवराव निकम, डॉ. अलका गुर्जर, सत पॉल शर्मा, प्रफुल पटेल, संजय कुमार झा, क्रिस्टोफर मणिक्कम, डॉ. मेनका गुरुस्वामी और पी. विल्सन समिति के सदस्य हैं.

संसद की अहम समिति की मिली कमान

डॉ. संजय जायसवाल को इससे पहले भी संसद में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलती रही हैं. अब FCRA संशोधन विधेयक की संयुक्त संसदीय समिति की अध्यक्षता मिलने से उनकी संसदीय भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है. समिति विधेयक के प्रावधानों पर विचार करने के बाद अपनी रिपोर्ट संसद को सौंपेगी, जिसके आधार पर विधेयक को लेकर आगे की संसदीय प्रक्रिया बढ़ेगी.

अमित शाह ने पेश किया था बिल

विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया. विपक्ष की आपत्तियों और विभिन्न पक्षों के सुझावों के बाद 12 अगस्त को विधेयक को विस्तृत जांच के लिए JPC भेजा गया.

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