बाढ़ आने से पहले ही अलर्ट हुआ प्रशासन, राहत शिविर से सामुदायिक रसोई तक की तैयारी शुरू

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बैठक लेते अध्यक्ष

पश्चिम चंपारण जिले में संभावित बाढ़ और अन्य आपदाओं से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है. राहत शिविरों की पहचान से लेकर सामुदायिक रसोई की तैयारी पहले से ही शुरू कर दी गई है. संवेदनशील तटबंधों की मरम्मत और निगरानी का भी निर्देश दिया गया है.

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Bettiah News: पश्चिम चंपारण जिले में बाढ़ समेत अन्य संभावित प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों को लेकर गुरुवार को आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास समिति की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई. बिहार विधान परिषद सदस्य सह समिति के अध्यक्ष राजीव कुमार उर्फ गप्पू बाबू की अध्यक्षता में हुई बैठक में बाढ़ की स्थिति, राहत एवं बचाव कार्य तथा आपदा प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास की तैयारियों की समीक्षा की गयी. बैठक में राहत शिविर, सामुदायिक रसोई, तटबंधों की निगरानी और राहत सामग्री के भंडारण को लेकर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए.

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राहत शिविर और सामुदायिक रसोई की पहले से होगी तैयारी

बैठक में निर्णय लिया गया कि संभावित आपदा की स्थिति से पहले ही सुरक्षित राहत शिविरों और सामुदायिक रसोई स्थलों की पहचान कर ली जाए. इसका उद्देश्य आपदा के समय प्रभावित लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थान और भोजन उपलब्ध कराना है.

अध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि आपदा की स्थिति में लोगों की जान बचाना और उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए. राहत कार्य अंतिम व्यक्ति तक समय पर पहुंचाने का निर्देश दिया गया.

संवेदनशील तटबंधों की होगी निगरानी, मरम्मत का निर्देश

बैठक में जिले के संवेदनशील तटबंधों की स्थिति की समीक्षा की गयी. अधिकारियों को ऐसे तटबंधों की तत्काल मरम्मत कराने और लगातार निगरानी रखने का निर्देश दिया गया.

बैठक में मधुबनी प्रखंड की सिसई पंचायत में कटाव निरोधी कार्य कराने का भी निर्णय लिया गया, ताकि संभावित बाढ़ और कटाव से प्रभावित क्षेत्रों को सुरक्षित रखा जा सके.

राहत सामग्री, दवाइयों और पशु चारे का होगा भंडारण

आपदा के दौरान राहत कार्यों में किसी तरह की कमी नहीं हो, इसके लिए पर्याप्त मात्रा में राहत सामग्री, आवश्यक दवाइयों और पशु चारे का भंडारण करने का निर्देश दिया गया.

समिति के समन्वयक सौरभ कुमार ने स्थानीय प्रशासन, स्वयंसेवी संस्थाओं और आम लोगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि राहत और पुनर्वास से जुड़े संसाधन जरूरतमंद लोगों तक सीधे पहुंचने चाहिए.

एनडीआरएफ-एसडीआरएफ से लगातार संपर्क रखने का निर्देश

बैठक में अधिकारियों को एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों से लगातार संपर्क बनाए रखने का निर्देश दिया गया. साथ ही आपदा की स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट मोड में रहने को कहा गया.

राजीव कुमार ने कहा कि पुनर्वास कार्यों में किसी भी तरह की प्रशासनिक लापरवाही नहीं होनी चाहिए. संभावित आपदा को देखते हुए सभी तैयारियां पहले से पूरी रखना जरूरी है.

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