बुके की जगह किताबें देने की अपील, हिंदी माह के शुभारंभ पर पूर्व प्राचार्य ने क्यों कही ये बात
कार्यक्रम का हुआ आयोजन
बगहा के कॉलेज में हिंदी माह की शुरुआत के साथ, पूर्व प्राचार्य पं. भरत उपाध्याय ने बुके की जगह ज्ञानवर्धक पुस्तकें भेंट करने की नई परंपरा शुरू करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि पुस्तकें स्थायी ज्ञान देती हैं, जो व्यक्तित्व विकास में सहायक है.
Bagaha News: बगहा अनुमंडल के मधुबनी प्रखंड स्थित पीएम राजकीयकृत हरदेव प्रसाद इंटरमीडिएट कॉलेज के पुस्तकालय सभागार में हिंदी माह का शुभारंभ किया गया. कार्यक्रम में कॉलेज के पूर्व प्राचार्य पं. भरत उपाध्याय ने अतिथियों के स्वागत में बुके भेंट करने की परंपरा की जगह प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें भेंट करने की परंपरा विकसित करने की अपील की. उन्होंने कहा कि पुष्पगुच्छ कुछ समय बाद अनुपयोगी हो जाते हैं, जबकि पुस्तकें व्यक्ति के ज्ञान और व्यक्तित्व के विकास में लंबे समय तक उपयोगी रहती हैं.
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बुके की जगह पुस्तकें भेंट करने की परंपरा विकसित करने पर जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व प्राचार्य पं. भरत उपाध्याय ने कहा कि अतिथियों के स्वागत में पुष्पगुच्छ भेंट करना सामान्य परंपरा बन गई है. हालांकि कुछ समय बाद ये पुष्पगुच्छ अनुपयोगी हो जाते हैं.
उन्होंने कहा कि इसके स्थान पर प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें भेंट करने की परंपरा विकसित की जानी चाहिए. अतिथि पुस्तक को स्वयं पढ़ने के साथ परिवार के अन्य सदस्यों को भी पढ़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं.
जन्मदिन और शुभ अवसरों पर किताबें देने की अपील
पूर्व प्राचार्य ने कहा कि पुस्तकें केवल ज्ञानवर्धन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. इसलिए जन्मदिन, विवाह और अन्य शुभ अवसरों पर महंगे उपहार देने के बजाय उपयोगी पुस्तकें भेंट करने की परंपरा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए.
उनके अनुसार इस तरह की पहल से समाज में पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा और लोगों में पुस्तकों के प्रति रुचि भी विकसित होगी.
कॉलेज के पुस्तकालय में कई विषयों की पुस्तकें उपलब्ध
पं. भरत उपाध्याय ने कॉलेज के पुस्तकालय की व्यवस्था की भी सराहना की. उन्होंने बताया कि पुस्तकालय में सामान्य ज्ञान, इतिहास, भूगोल, विज्ञान, संविधान और साहित्य से जुड़ी पुस्तकों के साथ रोजगारपरक पुस्तकें भी उपलब्ध हैं.
इसके अलावा पुस्तकालय में समाचार पत्र-पत्रिकाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं. विद्यार्थियों के लिए इस तरह की व्यवस्था को उन्होंने उपयोगी बताते हुए अधिक से अधिक पुस्तकों के अध्ययन पर जोर दिया.
ज्ञान दिशा देता है, जिज्ञासा आगे बढ़ने की प्रेरणा
कार्यक्रम में आचार्य नीरज शांडिल्य ने भी अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि ज्ञान व्यक्ति को सही दिशा देता है, जबकि जिज्ञासा उसे आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है.
उन्होंने विद्यार्थियों को निरंतर अध्ययन करने और अपनी जिज्ञासा को बनाए रखने के लिए प्रेरित किया. हिंदी माह के शुभारंभ के मौके पर पुस्तक और पुस्तकालय के महत्व पर भी चर्चा की गई.
कई शिक्षक और कर्मी रहे मौजूद
हिंदी माह के शुभारंभ कार्यक्रम में शंभू दयाल सिंह, हरेंद्र किशोर सिंह, नीरज कुमार त्रिपाठी, निसार उल हक अंसारी, राजेश रमण कुमार सिंह, विपिन कुमार तिवारी और सुधीर कुमार चतुर्वेदी सहित अन्य लोग मौजूद रहे.
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों और उपस्थित लोगों के बीच अध्ययन और पुस्तकों के महत्व को लेकर सकारात्मक संदेश दिया गया.
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