पटना-बेतिया फोरलेन के निर्माण के लिए यहां बन रहा बेस कैंप, जानिए जमीन मुआवजे पर बड़ा अपडेट
फोरलेन रोड (सांकेतिक तस्वीर)
पटना-बेतिया फोरलेन परियोजना का निर्माण अब धरातल पर आने लगा है. महम्मदपुर में बेस कैंप का काम शुरू हो चुका है. पूर्वी चंपारण में करीब आधी जमीन का अधिग्रहण पूरा है, जबकि कागजात और विवाद के कारण कई रैयतों का मुआवजा अटका है.
पटना-बेतिया एक्सप्रेस-वे अपडेट: पटना से बेतिया तक बनने वाली एनएच-139डब्ल्यू फोरलेन सड़क के निर्माण की तैयारी अब जमीन पर दिखने लगी है. निर्माण एजेंसी सीगल इंडिया लिमिटेड ने केसरिया-खजुरिया मार्ग के महम्मदपुर में निर्माण बेस कैंप बनाने का काम शुरू कर दिया है. बेस कैंप बनने के साथ केसरिया से अरेराज होते हुए बेतिया तक फोरलेन निर्माण शुरू होने की उम्मीद बढ़ गयी है. इधर, परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी तेजी से चल रही है.
5 हजार रैयतों की जमीन
पूर्वी चंपारण में इस परियोजना की लागत करीब 325 करोड़ रुपये है. सड़क निर्माण के लिए करीब 5 हजार रैयतों की जमीन अधिग्रहित की जानी है. अब तक लगभग 50 प्रतिशत जमीन का अधिग्रहण पूरा हो चुका है.
केसरिया से अरेराज तक करीब 40 किलोमीटर हिस्से के लिए जमीन अधिग्रहित कर संबंधित विभाग को कब्जा भी दिया जा चुका है. हालांकि, बड़ी संख्या में रैयतों का मुआवजा अभी अटका हुआ है.
900 रैयतों को मिला मुआवजा
केसरिया अंचल में परियोजना के लिए 18 राजस्व गांवों के 1895 रैयतों की जमीन ली जा रही है. इनमें करीब 900 रैयतों को भूमि का मुआवजा भुगतान किया जा चुका है. शेष रैयतों को भुगतान की प्रक्रिया जारी है.
जमीन का स्वामित्व स्पष्ट नहीं होने, कागजात अधूरे रहने और आपसी विवाद के कारण कई मामलों में मुआवजा भुगतान में देरी हो रही है. दूसरी नोटिस जारी होने के बाद जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई भी तेज की गयी है.
पांच अंचलों से ली जा रही जमीन
फोरलेन परियोजना के लिए केसरिया, संग्रामपुर, अरेराज, हरसिद्धि और पहाड़पुर अंचल से जमीन अधिग्रहित की जा रही है. प्रशासन की ओर से रैयतों के कागजात की जांच, एलपीसी तैयार कराने और अधिग्रहण से जुड़े दस्तावेज जिला भू-अर्जन कार्यालय भेजने का काम चल रहा है.
पहाड़पुर अंचल में करीब एक हजार रैयतों की जमीन अधिग्रहित की जानी है. इनमें करीब 400 रैयतों ने अपने कागजात जमा कर दिये हैं. दस्तावेजों की जांच और शुद्धि के बाद उन्हें जिला कार्यालय भेजा जा चुका है. बाकी रैयतों से भी कागजात जमा कराने को कहा जा रहा है.
कैंप लगाकर किसानों से लिये जा रहे कागजात
एडीएलओ कुमार विमल प्रकाश ने बताया कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से चल रही है. किसानों से आवश्यक कागजात जमा कराने को कहा गया है. इसके लिए अलग-अलग जगहों पर कैंप भी लगाये जा रहे हैं.
उन्होंने बताया कि सप्ताह में दो-तीन दिन अलग-अलग स्थानों पर कैंप लगते हैं. किसान जैसे-जैसे कागजात जमा कर रहे हैं, वैसे-वैसे भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ायी जा रही है.
मुआवजे में देरी से रैयतों की बढ़ी परेशानी
जमीन अधिग्रहण को लेकर कुछ रैयतों की ओर से विरोध भी किया जा रहा है. रैयतों की शिकायत है कि जमीन लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, लेकिन मुआवजा भुगतान में देरी हो रही है.
कई परिवारों के लिए अधिग्रहित होने वाली जमीन आय का मुख्य साधन है. ऐसे में जमीन जाने के बाद समय पर मुआवजा नहीं मिलने से उनकी आर्थिक परेशानी बढ़ रही है. अब निर्माण बेस कैंप शुरू होने के बाद लोगों की नजर मुआवजा भुगतान और बाकी जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने पर है.
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