चंपारण के किसान संघर्ष की जीवंत कड़ी टूट गयी, 120 वर्षीय अमर राय ने ली अंतिम सांस

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सम्मानित करते एस एसबी के अधिकारी

120 वर्षीय अमर राय का निधन हो गया है, जो नीलहा आंदोलन से जुड़े किसान नेता शीतल राय के भतीजे थे. उनके निधन से चंपारण के किसान संघर्ष से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पारिवारिक कड़ी समाप्त हो गई है. क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है.

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West Champaran News: लौरिया. चंपारण के किसान संघर्ष के इतिहास से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पारिवारिक कड़ी रविवार की सुबह हमेशा के लिए टूट गयी. नीलहा आंदोलन से जुड़े किसान नेता शीतल राय के भतीजे 120 वर्षीय अमर राय का निधन हो गया. उनके निधन की खबर मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गयी. अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी.

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अमर बाबु का फाईल फोटो तिरंगा यात्रा तथा उन्हे सम्मानित करते एस एसबी के अधिकारी | Prabhat Khabar Network
सम्मानित करते एस एसबी के अधिकारी

नीलहा आंदोलन की विरासत से जुड़ा था अमर राय का परिवार

अमर राय उस परिवार से जुड़े थे, जिसने अंग्रेजी हुकूमत के दौर में किसानों पर जबरन नील की खेती और तीनकठिया प्रथा के खिलाफ हुए संघर्ष को करीब से देखा था. उनके चाचा शीतल राय नीलहा आंदोलन से जुड़े किसान नेता थे.

अमर राय के निधन के साथ चंपारण के किसान संघर्ष से जुड़ी एक ऐसी पारिवारिक कड़ी भी समाप्त हो गयी, जो लंबे समय तक इस ऐतिहासिक दौर की स्मृतियों से जुड़ी रही.

सवा सदी के जीवन में देखा चंपारण का बदलाव

120 वर्ष के अपने जीवन में अमर राय ने चंपारण के सामाजिक बदलावों को करीब से देखा. उनका जीवन उस दौर की स्मृतियों और किसान संघर्ष की विरासत से जुड़ा रहा, जिसने चंपारण के इतिहास को एक अलग पहचान दी.

उनका परिवार अंग्रेजी शासन के दौरान किसानों की स्थिति और नील की जबरन खेती से जुड़े संघर्ष का प्रत्यक्ष साक्षी रहा था. इसी वजह से अमर राय का जीवन चंपारण के इतिहास की मौखिक और पारिवारिक स्मृतियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता था.

निधन से क्षेत्र में शोक की लहर

अमर राय के निधन की खबर सामने आने के बाद क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गयी. बड़ी संख्या में लोग उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुए. लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी.

उनके निधन को चंपारण के किसान संघर्ष के इतिहास से जुड़े लोगों ने एक महत्वपूर्ण क्षति के रूप में देखा. उनके जाने से इस ऐतिहासिक दौर की स्मृतियों को व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर संजोकर रखने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी कम हो गयी.

शिक्षाविद ने बताया चंपारण के लिए बड़ी क्षति

शिक्षाविद डॉ. देवीलाल यादव ने अमर राय के निधन को चंपारण के लिए बड़ी क्षति बताया. उन्होंने कहा कि अमर राय के निधन से किसान संघर्ष की एक महत्वपूर्ण मौखिक और पारिवारिक कड़ी समाप्त हो गयी.

चंपारण के इतिहास में नीलहा आंदोलन और तीनकठिया प्रथा किसानों के संघर्ष के महत्वपूर्ण अध्याय रहे हैं. अमर राय इसी ऐतिहासिक विरासत से जुड़े परिवार की अगली पीढ़ी के प्रतिनिधि थे.

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