बेगूसराय: व्यक्ति के चरित्र पर निर्भर करता है नेतृत्व, दून पब्लिक स्कूल में अलंकरण समारोह आयोजित

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समारोह में अतिथि के साथ उपस्थित बच्चे | Prabhat Khabar Network

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बेगूसराय के दून पब्लिक स्कूल में एक भव्य अलंकरण समारोह का आयोजन किया गया. मुख्य अतिथि वरुण कुमार ने नवनिर्वाचित छात्र प्रतिनिधियों को सम्मानित किया और नेतृत्व के गुणों पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि सच्चा नेतृत्व केवल पद पर आसीन होना नहीं, बल्कि चारित्रिक जिम्मेदारी से जुड़ा है.

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Begusarai News: किसी भी देश या समाज को प्रगति के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने के लिए एक कुशल नेतृत्व की आवश्यकता होती है. बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं और उनमें नेतृत्व क्षमता का विकास होना अत्यंत आवश्यक है. इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए दून पब्लिक स्कूल, रमजानपुर में भव्य अलंकरण समारोह का आयोजन किया गया. इसमें दानापुर कैंट के सीईओ (IDES) वरुण कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे.

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भीषण गर्मी में भी बच्चों में दिखा अपार उत्साह

कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के बच्चों द्वारा प्रस्तुत किए गए मनमोहक स्वागत गीत से हुआ. इस गर्मी और उमस भरे मौसम के बावजूद बच्चे पूरे जोश और उत्साह के साथ कार्यक्रम में डटे रहे. विद्यालय के प्राचार्य जी.के. सिंह ने बच्चों से मुख्य अतिथि का परिचय कराते हुए बताया कि वे बेहद मेहनती एवं लगनशील व्यक्ति हैं, जिन्होंने बीपीएससी परीक्षा पास करने के बाद यूपीएससी में भी सफलता प्राप्त की और आज इस प्रतिष्ठित पद पर कार्यरत हैं.

नवनिर्वाचित छात्र प्रतिनिधियों को पहनाया गया सैश बैंड

समारोह के मुख्य आकर्षण में मुख्य अतिथि वरुण कुमार ने विद्यालय के प्रमुख पदों के लिए चुने गए बच्चों को बैच और सैश बैंड पहनाकर अलंकृत किया. इनमें स्कूल कैप्टन सृष्टि सिंह, स्कूल वाइस कैप्टन इशिता सिंह, स्पोर्ट्स कैप्टन आदित्य प्रकाश, मेस कैप्टन दुष्यंत कुमार, कल्चरल कैप्टन गुड़िया कुमारी, एनवायरनमेंट कैप्टन सोनू कुमार और ट्रांसपोर्ट कैप्टन सुंदरम कुमार शामिल हैं. इसके अलावा श्री कृष्णा, अशोका, दिनकर और राजेंद्र हाउस के कैप्टन व वाइस कैप्टन को भी पदभार सौंपते हुए अलंकृत किया गया.

पदासीन होना ही नेतृत्व नहीं, चारित्रिक रूप से जिम्मेदार बनें

मुख्य अतिथि वरुण कुमार ने अपने संबोधन से बच्चों को देश के प्रति कर्मनिष्ठ बनने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि केवल किसी पद पर आसीन हो जाना ही नेतृत्व नहीं कहलाता, बल्कि नेतृत्व पूरी तरह से व्यक्ति के चरित्र पर निर्भर करता है. हमें चारित्रिक रूप से जिम्मेदार बनना होगा. वहीं, प्राचार्य जी.के. सिंह ने बच्चों को ईमानदारी, लगन और विवेकपूर्ण फैसले लेने के लिए प्रोत्साहित किया. विद्यालय की ओर से मुख्य अतिथि को अंग वस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट किया गया और अंत में प्राचार्य ने सभी शिक्षकों, बच्चों व कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया.


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