घर-घर घुसा बाढ़ का पानी, सड़कें हुई जलमग्न, छह दिन बाद भी बेगूसराय में नाव-सामुदायिक रसोई का का इंतजार कर रहे लोग
बाढ़ के पानी के बीच नाव पकड़ने जाते हुए स्थानीय लोग
बेगूसराय के शाम्हो दियारा में बाढ़ ने तबाही मचा दी है, जिससे पूरा इलाका जलमग्न हो गया है. बाढ़ पीड़ितों को भोजन, आश्रय और चिकित्सा सहायता की तत्काल आवश्यकता है, लेकिन प्रशासन की सुस्ती से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है.
Begusarai Flood Affect : बेगूसराय के शाम्हो दियारा क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है. पूरा इलाका बाढ़ के पानी से जलमग्न हो चुका है. कई जगहों पर लोगों के लिए घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है, जबकि बड़ी संख्या में घरों में भी पानी प्रवेश कर चुका है. लगातार बिगड़ते हालात के बीच प्रभावित परिवारों के सामने सुरक्षित आवागमन, भोजन, इलाज और पशुओं के चारे जैसी बुनियादी जरूरतों का संकट खड़ा हो गया है.
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स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में एक सितंबर से ही सड़कों पर बाढ़ का पानी चढ़ना शुरू हो गया था, लेकिन छह सितंबर तक भी पर्याप्त संख्या में नावों की व्यवस्था नहीं हो सकी है. इससे बाढ़ प्रभावित गांवों में रहने वाले लोगों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है. लोगों का कहना है कि कई जरूरी कामों के लिए भी नाव का सहारा लेना पड़ रहा है, लेकिन पर्याप्त नाव उपलब्ध नहीं होने के कारण आवागमन बाधित है.
दबाव के बाद सामुदायिक रसोई शुरू करने की तैयारी
स्थानीय प्रतिनिधियों की ओर से प्रशासन पर लगातार दबाव बनाए जाने के बाद रविवार से शाम्हो दियारा क्षेत्र में करीब 20 स्थानों को चिन्हित कर सामुदायिक रसोई शुरू करने की बात सामने आई है. जिला परिषद सदस्य अमित कुमार, तीनों पंचायतों के मुखिया पमपम देवी, कन्हैया कुमार टन्नू, धीरज कुमार और प्रमुख मनोज कुमार की ओर से इस मुद्दे को प्रशासन के सामने उठाया गया.

स्थानीय लोगों का कहना है कि मटिहानी विधानसभा क्षेत्र के अन्य बाढ़ प्रभावित इलाकों में करीब दो दिन पहले से ही सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही है. ऐसे में शाम्हो दियारा में अब जाकर सामुदायिक रसोई शुरू किए जाने को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है.
ग्रामीणों का आरोप है कि राहत व्यवस्था शुरू करने में हुई देरी से बाढ़ प्रभावित परिवारों की मुश्किल और बढ़ी है. लोगों ने सरकार और प्रशासन पर क्षेत्र के साथ कथित तौर पर भेदभावपूर्ण व्यवहार करने का आरोप भी लगाया है.
राहत, इलाज और पशु चारे की व्यवस्था पर सवाल
बाढ़ प्रभावित लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य उनकी जरूरत के अनुरूप नहीं हो रहे हैं. कई इलाकों में पर्याप्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं है. वहीं पशुओं के लिए चारा और दूसरी जरूरी सामग्री की भी समुचित व्यवस्था नहीं हो सकी है.
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ग्रामीणों के मुताबिक कई परिवारों तक अब तक सूखा राशन, अनाज या तैयार भोजन भी नहीं पहुंचा है. ऐसे में पानी से घिरे परिवारों के सामने भोजन का संकट बना हुआ है. लोगों का कहना है कि बाढ़ के दौरान सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और मवेशियों को लेकर हो रही है.

जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों में समन्वय की कमी का आरोप
स्थानीय लोगों ने आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच समुचित समन्वय नहीं होने का आरोप लगाया है. ग्रामीणों का कहना है कि इसका सीधा असर राहत और बचाव कार्यों पर दिखाई दे रहा है.
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लोगों के अनुसार बाढ़ आने से पहले प्रशासन की ओर से तैयारियों के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात उन दावों से अलग नजर आ रहे हैं. अभी भी बड़ी संख्या में लोग मूलभूत सुविधाओं के अभाव में परेशान हैं और किसी तरह बाढ़ का पानी कम होने का इंतजार कर रहे हैं.

नाव से लेकर मेडिकल टीम तक की मांग
ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से तत्काल पर्याप्त संख्या में नाव उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि पानी से घिरे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके और जरूरी सामान प्रभावित इलाकों तक पहुंचाया जा सके.
इसके अलावा लोगों ने घर-घर राहत सामग्री पहुंचाने, सामुदायिक रसोई की संख्या बढ़ाने, मेडिकल टीम भेजने और पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था करने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ की स्थिति को देखते हुए राहत कार्यों में किसी भी तरह की देरी लोगों की परेशानी को और बढ़ा सकती है.
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