बेगूसराय में 400 बच्चों पर सिर्फ 5 कमरे, जर्जर भवन में पढ़ाई को मजबूर छात्र; विभाग को कई बार दी गई सूचना

Updated:
विज्ञापन

विद्यालय की जर्जर छत

बेगूसराय के उत्क्रमित मध्य विद्यालय बाघी में कमरों की भारी कमी है। जर्जर भवन के कारण 400 बच्चे बरामदे पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं, प्रशासन अब तक बेखबर है।

विज्ञापन

बेगूसराय में एक तरफ शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई का दावा किया जा रहा है, वहीं बेगूसराय जिला मुख्यालय से महज डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक सरकारी स्कूल की तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है. नगर निगम क्षेत्र के बाघी स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय में जर्जर भवन और कमरों की कमी के बीच करीब 400 बच्चे पढ़ाई करने को मजबूर हैं. स्कूल के कई कमरों की छत और भवन की स्थिति इतनी खराब है कि वहां बच्चों को बैठाकर पढ़ाना जोखिम भरा है. यही वजह है कि बच्चों को बरामदे में जमीन पर बैठाकर पढ़ाई करायी जा रही है.

आपके शहर में

विज्ञापन

विद्यालय की बदहाल स्थिति को लेकर अभिभावक भी चिंतित हैं. उनका कहना है कि जिस उम्र में बच्चों को सुरक्षित माहौल और बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिलनी चाहिए, उस उम्र में वे जर्जर भवन और सीमित संसाधनों के बीच पढ़ने को मजबूर हैं. खास बात यह है कि इस स्कूल में बड़ी संख्या में गरीब और मजदूर परिवारों के बच्चे पढ़ते हैं, जिनके लिए सरकारी विद्यालय ही शिक्षा का मुख्य सहारा है.

400 बच्चों के लिए महज पांच कमरे

विद्यालय में करीब 400 बच्चे नामांकित हैं. बच्चों की संख्या के अनुपात में कक्षाओं के संचालन के लिए कम से कम 13 कमरों की आवश्यकता बतायी जा रही है. इसके विपरीत स्कूल में महज पांच कमरे उपलब्ध हैं.

Begusarai utkramit madhya vidyalay.jpg
विद्यालय के बरामदे पर बच्चों का वर्ग संचालन

इन पांच कमरों में से एक कमरे का इस्तेमाल कार्यालय से जुड़े कार्यों के लिए किया जाता है. इसके बाद पढ़ाई के लिए प्रभावी रूप से केवल एक कमरा ही इस्तेमाल हो पा रहा है. बाकी कमरों की छत और भवन की स्थिति जर्जर होने के कारण वहां बच्चों को बैठाना सुरक्षित नहीं माना जा रहा है.

पढ़ाई व्यवस्था पर पड़ रहा असर

कमरों की कमी का सीधा असर विद्यालय की पढ़ाई व्यवस्था पर पड़ रहा है. जगह के अभाव में बच्चों को बरामदे में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है. बरामदे में भी कुर्सी या डेस्क-बेंच की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण कई बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते हैं.

जर्जर छत के नीचे मंडराता खतरा

विद्यालय के कई भवन लंबे समय से जर्जर हालत में हैं. छत की स्थिति खराब होने के कारण किसी अनहोनी की आशंका बनी रहती है. बरसात के दिनों में समस्या और बढ़ जाती है. बारिश के दौरान बरामदे में बैठकर पढ़ाई करने वाले बच्चों को परेशानी होती है.

अभिभावकों की चिंता भी इसी बात को लेकर है कि अगर जर्जर छत का कोई हिस्सा अचानक गिर गया तो बड़ी दुर्घटना हो सकती है. ऐसे में बच्चों को सुरक्षित भवन उपलब्ध कराने की मांग लगातार उठती रही है.

विद्यालय भवन के जीर्णोद्धार और नए भवन के निर्माण को लेकर तत्कालीन विधायक की ओर से वर्ष 2018 में अनुशंसा भी की गयी थी. इसके बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका है.

विभाग को कई स्तरों पर दी गई जानकारी

विद्यालय की जर्जर स्थिति को लेकर संबंधित अधिकारियों को भी जानकारी दी जा चुकी है. विभागीय सूत्रों के अनुसार बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना से लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी और डीपीओ एसएसए तक स्कूल के जर्जर कमरों और भवन की स्थिति की जानकारी पहुंचायी गयी है.

इसके बावजूद करीब सात वर्षों से बच्चे जर्जर भवन और सीमित कमरों के बीच पढ़ाई करने को मजबूर हैं. सवाल यह भी है कि जब विद्यालय में बच्चों की संख्या लगातार अधिक है और भवन की समस्या पहले से विभाग के संज्ञान में है, तो अब तक इसका स्थायी समाधान क्यों नहीं हो सका.

शौचालय है, लेकिन यूरिनल की सुविधा नहीं

विद्यालय में केवल भवन और कमरों की ही समस्या नहीं है. बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव नजर आता है. स्कूल में तीन शौचालय हैं, लेकिन बच्चों के लिए अलग से यूरिनल की व्यवस्था नहीं है.

पेयजल के लिए भी बच्चों को चापाकल के पानी पर निर्भर रहना पड़ता है. विद्यालय में फिल्टर्ड पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है. ऐसे में बच्चों के लिए सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता से जुड़ी सुविधाएं भी चिंता का विषय बनी हुई हैं.

विद्यालय की यह स्थिति ऐसे समय में है, जब सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर माहौल देने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर जोर दिया जा रहा है. भवन, कक्षा और बुनियादी सुविधाओं की कमी के बीच गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लक्ष्य हासिल करना स्कूल के लिए चुनौती बना हुआ है.

प्रधानाध्यापक बोले, पढ़ाई की गुणवत्ता पर दिया जा रहा ध्यान

इस संबंध में विद्यालय के प्रधानाध्यापक मनोज कुमार ने बताया कि कमरों की कमी का असर बच्चों के पठन-पाठन पर नहीं पड़ने दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाता है.

प्रधानाध्यापक के अनुसार विद्यालय की भवन संबंधी स्थिति और कमरों की कमी की जानकारी संबंधित विभाग को दी जा चुकी है. अब स्कूल प्रबंधन को उम्मीद है कि विभाग की ओर से जल्द इस समस्या का समाधान किया जायेगा और बच्चों को सुरक्षित व पर्याप्त कक्षाएं उपलब्ध होंगी.


विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन