सुख और दुख मानव जीवन के दो चक्र हैं: स्वामी जी

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बेगसराय : राजकीय कल्पवास मेले के दौरान सिमरिया गंगा घाट स्थित सिद्धाश्रम में भक्ति की धारा प्रवाहित हो रही है. ज्ञान मंच से सर्वमंगला के अधिष्ठाता स्वामी चिदात्मनजी महाराज अपनी अमृतवाणी से कल्पवासियों को भाव-विभोर कर रहे हैं. बुधवार को कार्तिक महात्म्य और श्रीमद्भागवत कथा का प्रवचन करते हुए उन्होंने कहा कि मानव अपने जीवन […]

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बेगसराय : राजकीय कल्पवास मेले के दौरान सिमरिया गंगा घाट स्थित सिद्धाश्रम में भक्ति की धारा प्रवाहित हो रही है. ज्ञान मंच से सर्वमंगला के अधिष्ठाता स्वामी चिदात्मनजी महाराज अपनी अमृतवाणी से कल्पवासियों को भाव-विभोर कर रहे हैं.

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बुधवार को कार्तिक महात्म्य और श्रीमद्भागवत कथा का प्रवचन करते हुए उन्होंने कहा कि मानव अपने जीवन में नित्य-नवीन सुख प्राप्ति की कामना करता है. दु:ख की आशंका मात्र से घबराना मानव मन की स्वाभाविक गति है. सुख और दुख मानव जीवन के दो चक्र हैं, जो हमारे कर्तव्य और भाग्यफल पर आश्रित हैं.
उन्होंने कहा कि शास्त्रानुसार व्यावहारिक तथ्य है कि शरीर की शुद्धि स्नान से, वस्त्र की शुद्धि साबुन से और गर्भ से पैदा हुए बच्चों की शुद्धि संस्कार व कर्म से होती है. संस्कार के बिना उच्च शिक्षा भी बेकार हो जाती है. उसका फल न शिक्षार्थी को मिलता है और न ही उसके परिजन को. समाज,राज्य व देश को भी लाभ नहीं मिलता है. उन्होंने कहा कि मन की शुद्धि तपस्या एवं यज्ञ से होती है.
वस्तुत: मूल रूप में यज्ञ से इंद्रियों का तथा हवन से वायुमंडल की शुद्धि होती है और दान से धन की समृद्धि होती है. इस प्रकार से तपस्या, यज्ञ और दान के बाद मानव के अंदर संतोष रूपी धन व्याप्त हो जाता है.कथा प्रवचन के उपरांत ज्ञान मंच भज मन नारारण-नारायण के भजनों के बोल से गूंज उठा. आचार्य नारायण झा द्वारा की गयी आरती के साथ कथा का समापन हो गया. मौके पर रवींद्र ब्रह्मचारी, राम, लक्ष्मण, श्याम, रंजना देवी,सदानंद झा, रजनीश सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे.
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