प्रभात मुहिम : यहां भी चलना चाहिए 50 पैसे का सक्किा

Published at :07 Oct 2015 9:32 PM (IST)
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प्रभात मुहिम : यहां भी चलना चाहिए 50 पैसे का सक्किा

प्रभात मुहिम : यहां भी चलना चाहिए 50 पैसे का सिक्का फोटो : 10 जयंती यादव फोटो : 11 राजेश कुमार फोटो : 12 रंजन कुमार फोटो : 13 विकास राउत फोटो : 14 मो मुमताज फोटो : 15 मनीष कुमार प्रतिनिधि, बांका जब सरकार ने 50 पैसे के सिक्के को बंद नहीं किया है. […]

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प्रभात मुहिम : यहां भी चलना चाहिए 50 पैसे का सिक्का फोटो : 10 जयंती यादव फोटो : 11 राजेश कुमार फोटो : 12 रंजन कुमार फोटो : 13 विकास राउत फोटो : 14 मो मुमताज फोटो : 15 मनीष कुमार प्रतिनिधि, बांका जब सरकार ने 50 पैसे के सिक्के को बंद नहीं किया है. बैंक इस सिक्के का लेन-देन करने के लिए तैयार है तो फिर इस सिक्के को बाजार में चलना चाहिए. उक्त बातें बांका के व्यवसायियों के द्वारा प्रभात खबर के मुहिम के समर्थन में कही गयी. प्रभात खबर ने अपने बुधवार के अंक में जब झारखंड में चलता तो बिहार में क्यों नहीं शीर्षक नाम से उस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था जिसमें बिहार से पचास पैसे के सिक्के के गायब होने की बात थी. प्रभात खबर ने इस बात को अपने पाठकों के बीच रखा था कि जब हिंमाशु मंच के अध्यक्ष सह अधिवक्ता राम जीवन पोद्दार ने आरटीआई के तहत आरबीआइ, भारतीय स्टेट बैंक, वित्त विभाग पटना, इलाहावाद बैंक सहित अन्य बैंकों से यह जानकारी मांगी थी कि पचास पैसे का सिक्का कब से और किसके आदेश भारत के कौन कौन से राज्यों में नहीं चल रहा है. इसके जवाब में सभी ने एक स्वर में कहा कि 25 पैसे या उससे कम मूल्य के मुद्रा को केंद्र सरकार के आदेश से 30 जून 2011 से बंद किया गया है लेकिन पचास पैसे का सिक्का वैध मुद्रा है और बैंक में ग्राहकों से लेन देन किया जा रहा है. इसके बाद जिले के व्यवसायी ने बताया कि जब 50 पैसे का सिक्का चल रहा है तो उसको बंद किसने किया यह जांच का विषय है. इस संबंध में जयंती कुमार, राजेश कुमार, मनीष कुमार, रंजन कुमार, विकास राउत, मो मुमताज ने कहा कि रोजाना जिले से 60 लाख रुपया कहां जा रहा है इस ओर ना किसी जनप्रतिनिधि की नजर है, ना जिला प्रशासन की और न पुलिस की. जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि तो मोटी कमाई करते हैं इस लिए उनके लिए पचास पैसे का सिक्का कोई मायने नहीं रखता होगा लेकिन जो मिडिल क्लॉस के लोग हैं या उससे नीचे तबके के लोग हैं उनके लिए 50 पैसे का सिक्का बहुत मायने रखता है. अगर पचास पैसे का सिक्का चलने लगेगा तो गरीब व मध्यवर्गीय परिवार में 150 से 200 रुपया का बचत होने लगेगा. स्थानीय लोगों ने कहा कि अब तो सरकार को जागरूक होना चाहिए की उसके पड़ोस में सिक्का चल रहा है लेकिन उनके घर से सिक्का गायब है. सभी को एक साथ मिल कर इस समस्या से निजात पाने की आवश्यकता है.

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