योजनाओं का लाभ नहीं, किसान हलकान
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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किसानों को लाभान्वित करने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन धरातल पर कोई कार्य नहीं हो रहा है. सरकार की घोषणा व योजना का लाभ किसानों को या तो नहीं मिल पा रहा है या मिलने में काफी दिक्कत होने के कारण किसान इसे छोड़ दे रहे हैं. यहां का क्षेत्र कृषि […]
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किसानों को लाभान्वित करने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन धरातल पर कोई कार्य नहीं हो रहा है. सरकार की घोषणा व योजना का लाभ किसानों को या तो नहीं मिल पा रहा है या मिलने में काफी दिक्कत होने के कारण किसान इसे छोड़ दे रहे हैं. यहां का क्षेत्र कृषि प्रधान है. किसान खेती के जरिये अपना व अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं.
बौंसी : कृषि विभाग द्वारा कृषि के क्षेत्र में उन्नत खेती के लिए तरह-तरह की योजनाएं चलायी जाती हैं. नित नये-नये प्रयोग किये जाते हैं. किसानों के लिए कई प्रकार की सुविधाएं दी जाती हैं . लेकिन हकीकत में ये सारी योजनाएं, सारी सुविधाएं किसानों तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाती हैं. अभी रबी की फसल के लिए जीरो टीलेज पद्घति से गेहूं लगाने के लिए किसानों को प्रति एकड़ प्रमाणित बीज 40 किग्रा, बोरान खाद 2 किग्रा, बीज उपचार के लिए कार्बनाडाजीम 20 ग्राम, और एक लीटर खरपतवार नाशक अधिकृत विक्रेता से अगर खरीदेंगे, तो उन्हें 1648 रुपये देना होगा.
इसके एवज में विभाग द्वारा 1250 रुपये की सब्सिडी किसानों को दी जाती है. वहीं एसडब्ल्यूआइ सुई विधि में 1518 रुपये का उपादान कीट किसानों को मिलता है, लेकिन विडंबना यह है कि यह राशि किसानों को चेक के माध्यम से दी जाती है. वह चेक भी एसबीआइ का रहता है. अब जिन किसानों के पास अन्य बैंकों में एकाउंट है, उन्हें विभाग का चेक को क्लियरेंश कराने में काफी वक्त लग जाता है.
विभागीय सूत्रों की मानें तो आरक्षण रोस्टर के हिसाब से एससी-एसटी के पास कम एकाउंट है. साथ ही उस हिसाब से जमीन भी उपलब्ध नहीं है. वहीं दूसरी तरफ गरीब किसान राशि के अभाव में भी उपादान कीट या खेती से संबंधित सामान नहीं खरीद पाते. विभागीय जानकारी के अनुसार जब तक किसान बीज खरीदने के बाद स्लीप नहीं देंगे. उन्हें चेक नहीं मिल पाता. गरीब किसान ऐसे में बीज नहीं ले पाते हैं. विभाग को चाहिए कि इस मामले में सरल प्रक्रिया अपनाते हुए कोई दूसरा रास्ता अपनाये.
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