कुंज बिहारी ने मत्स्य पालन से पेश की मजबूत नजीर

Published at :04 Dec 2017 9:10 AM (IST)
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कुंज बिहारी ने मत्स्य पालन से पेश की मजबूत नजीर

दुर्गापुर मत्स्य पालन से प्रभावित हो रहे युवा, जुड़ रहे स्वरोजगार से बांका : जिस जमीन पर किसानों का लागत मूल्य भी बड़ी मुश्किल से लौटता था आज वही जमीन लाखों आय की सूत्रधार बन चुकी है. जिले के रजौन प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत दुर्गापुर गांव में समेकित मत्स्य पालन कर युवा कृषक ने बंजर जमीन […]

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दुर्गापुर मत्स्य पालन से प्रभावित हो रहे युवा, जुड़ रहे स्वरोजगार से
बांका : जिस जमीन पर किसानों का लागत मूल्य भी बड़ी मुश्किल से लौटता था आज वही जमीन लाखों आय की सूत्रधार बन चुकी है. जिले के रजौन प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत दुर्गापुर गांव में समेकित मत्स्य पालन कर युवा कृषक ने बंजर जमीन को आज आमदनी का मजबूत माध्यम बना दिया है. जी हां, दुर्गापुर निवासी कुंजबिहारी ने विगत चार वर्ष पूर्व मछली पालन का लक्ष्य बनाया था. शुरुआती संघर्ष के बाद स्थापित उनके फार्म को देखने दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं. जानकारी के मुताबिक मौजूदा समय में कुंज बिहारी करीब सात एकड़ निजी व सरकारी जमीन पर मछली पालन कर रहे हैं. कृषक की मानें तो सलाना उनकी शुद्ध आय 15 लाख से अधिक होती है. हालांकि मछली पालन के दौरान खर्च अधिक होती है. किसान ने बताया कि मछली का आहार व बीज बाहर से खरीदने में खर्च अधिक पड़ जाती है. परंतु बीज उत्पादन व आहार की भी व्यवस्था जल्द ही अपने फार्म में ही स्थापित कर रहे हैं.
छह तालाबों में जारी है मत्स्य पालन
कुंज बिहारी पांच निजी व एक सरकारी तालाब में मछली पालन कर रहे हैं. छह तालाब मिलाकर करीब सात एकड़ जमीन होती है. कुंज बिहारी ने विगत दिनों एक सरकारी तालाब को भी लीज पर लिया है. एक कल्चर में करीब 130 क्विंटल मछली का उत्पादन आसानी से हो जाता है. खर्च काटकर शुद्ध मुनाफा 15 लाख से अधिक की आमदनी हो जाती है. तालाब में वृद्धि होने के बाद आमदनी में इजाफा से इंकार नहीं किया जा सकता है. वहीं मछली पालन के साथ मुर्गी, पपीता की खेती सहित अन्य कृषि क्षेत्र में भी कुंजबिहारी अपनी मेहनत दे रहे हैं.
दर्जनों अवार्ड से हुए सम्मानित
शुरुआती दौर में कुंजबिहारी ने बगैर किसी सरकारी सहायता से मछली पालन की शुरुआत की थी. परंतु उसकी कामयाबी से प्रेरित होकर विभागीय दौरा जारी है. बाद में तरह-तरह के योजनाओं का लाभ दिया गया. खासकर कृषि विज्ञान केन्द्र, कृष विभाग व आत्मा के सौजन्य से कई जगह कुंज बिहारी को प्रशिक्षण दिलाया गया. जबकि विभिन्न संस्थाओं ने कुंजबिहारी को दर्जनों अवार्ड से भी सम्मानित किया है. आज आसपास के युवा व विभिन्न संस्थानों के बच्चे दुर्गापुर पहुंच इसकी अद्यतन जानकारी प्राप्त कर समेकित मछली पालन से जुड़ रहे हैं.
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