औरंगाबाद : 15 साल से सेवा दे रहे कार्यपालक सहायकों का सब्र टूटा, सितंबर में मांगें नहीं मानीं तो अक्टूबर से आंदोलन
बिहार के औरंगाबाद में 10 सूत्री मांगों को लेकर कार्यपालक सहायकों की एक बैठक राजेंद्र बाल उद्यान के सभाकक्ष में आयोजित की गई. बैठक में चेतावनी दी गई कि यदि सितंबर माह तक सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की, तो अक्टूबर महीने से चरणबद्ध आंदोलन की शुरुआत की जाएगी.
Aurangabad News : सेवा नियमित करने, राज्य कर्मी का दर्जा देने और वेतनमान का लाभ समेत 10 सूत्री मांगों को लेकर कार्यपालक सहायक एक बार फिर आंदोलन की तैयारी में जुट गए हैं. बिहार राज्य कार्यपालक सहायक सेवा संघ के निर्देश पर रविवार को जिला मुख्यालय स्थित राजेंद्र बाल उद्यान के सभाकक्ष में जिला स्तरीय बैठक हुई.
अध्यक्षता जिलाध्यक्ष भूपेंद्र ठाकुर ने की. बैठक में आंदोलन की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई. निर्णय लिया गया कि सितंबर महीने में सरकार की ओर से मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की गई तो अक्टूबर से चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा.
बैठक में जिलाध्यक्ष ने कहा कि पिछले वर्ष विधानसभा चुनाव से पहले विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन शुरू किया गया था. इसी दौरान विधानसभा चुनाव की घोषणा होने के बाद आदर्श आचार संहिता लागू हो गई थी.

बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाइटी के अधिकारियों की ओर से चुनाव के बाद मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने का आश्वासन दिया गया था. इसके बावजूद करीब एक वर्ष बीत जाने के बाद भी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है.
कहा कि विधानसभा चुनाव से पूर्व विभिन्न विभागों में कार्यरत संविदा कर्मियों के मानदेय में 50 से 60 प्रतिशत तक वृद्धि की गई, लेकिन कार्यपालक सहायकों को इससे वंचित रखा गया. मानदेय वृद्धि समेत बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाइटी के अधिकारियों से लगातार संपर्क किया जा रहा है, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है. ऐसी स्थिति में कार्यपालक सहायकों के पास आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है.
15 वर्षों बाद भी सेवा संवर्ग का गठन नहीं
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि कार्यपालक सहायक पिछले 15 वर्षों से विभिन्न विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन अब तक उनके सेवा संवर्ग का गठन नहीं किया गया है. सेवा संवर्ग का गठन कर स्थायीकरण और राज्य कर्मी का दर्जा देने की मांग लंबे समय से की जा रही है.
इसके अलावा अन्य मांगों पर भी सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं हुई है. वक्ताओं ने कहा कि मांगों को लेकर सभी कार्यपालक सहायकों को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा.
आंदोलन के लिए कार्यकारी समिति गठित
आंदोलन की रणनीति तैयार करने और उसे प्रभावी तरीके से संचालित करने के लिए जिला स्तर पर कार्यकारी समिति का गठन किया गया. आरटीपीएस के कार्यपालक सहायक विजय कुमार को कार्यकारी अध्यक्ष, पंचायती राज विभाग के कार्यपालक सहायक धनंजय कुमार व दुर्गेश कुमार सोनी को सचिव, अमित कुमार को कोषाध्यक्ष, दीपक कुमार व अंबुज कुमार पांडेय को मीडिया प्रभारी तथा प्रदीप कुमार को संयोजक बनाया गया.
बैठक में तय किया गया कि 14 सितंबर के बाद पुनः बैठक कर आंदोलन की विस्तृत रूपरेखा तैयार की जाएगी. प्रारंभिक चरण में सांकेतिक विरोध किया जाएगा. इसके बाद भी सरकार की ओर से सकारात्मक पहल नहीं होने पर आंदोलन को तेज किया जाएगा. जरूरत पड़ने पर हड़ताल और अनशन का रास्ता भी अपनाया जाएगा.
10 सूत्री मांगों को लेकर संघर्ष
संघ की प्रमुख मांगों में कार्यपालक सहायकों के सेवा संवर्ग का गठन कर स्थायीकरण एवं राज्य कर्मी का दर्जा देना, स्वास्थ्य, कृषि, अपराध अनुसंधान एवं पुलिस विभाग में कार्यरत अनुबंध कर्मियों की तर्ज पर सेवा स्थायीकरण का लाभ देना, पूर्व में हटाए गए कार्यपालक सहायकों का समायोजन करना, सेवा स्थायी होने तक पे-मैट्रिक्स के आधार पर वेतन निर्धारण करना, पूर्व की हड़ताल अवधि को अवकाश में समायोजित कर मानदेय का भुगतान करना, नियुक्ति तिथि से ईपीएफ का लाभ देना और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना शामिल है.
इसके अलावा कार्यपालक सहायक पद की शैक्षणिक योग्यता मैट्रिक से बढ़ाकर इंटरमीडिएट करने, सेवा के दौरान मृत्यु होने पर आश्रित को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने तथा कार्यपालक सहायकों के नियोजन की प्रक्रिया पुनः शुरू करने की मांग भी शामिल है.
बैठक में उपस्थिति
बैठक में जिला सचिव रंजन कुमार, राजीव रंजन कुमार, अजीत कुमार समेत जिले के विभिन्न विभागों में कार्यरत सैकड़ों कार्यपालक सहायक मौजूद थे.
आपके शहर में
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए