औरंगाबाद: कुटुंबा, देव और टंडवा में सरकारी डिग्री कॉलेज की मांग तेज, मुख्यमंत्री सचिवालय ने उच्च शिक्षा विभाग को दिया निर्देश
औरंगाबाद के कुटुंबा, देव और नबीनगर प्रखंडों में सरकारी डिग्री कॉलेज की मांग अब निर्णायक मोड़ पर है. मुख्यमंत्री सचिवालय ने उच्च शिक्षा विभाग को नियमानुसार समीक्षा कर सकारात्मक कदम उठाने का निर्देश दिया है. इससे सुदूर सीमावर्ती क्षेत्रों के विद्यार्थियों को घर के पास उच्च शिक्षा मिलने की उम्मीद जगी है.
Aurangabad News: जिले के कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत देव, कुटुंबा तथा नबीनगर प्रखंड के टंडवा में सरकारी डिग्री कॉलेज की स्थापना की मांग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है. स्थानीय विधायक ललन राम द्वारा मुख्यमंत्री सचिवालय को लिखे गए मांग पत्र पर त्वरित संज्ञान लिया गया है. मुख्यमंत्री सचिवालय ने बिहार सरकार के उच्च शिक्षा विभाग को पत्र प्रेषित कर इस संबंध में नियमानुसार समीक्षा करते हुए सकारात्मक कदम उठाने का स्पष्ट निर्देश दिया है.
मुख्यमंत्री सचिवालय ने उच्च शिक्षा विभाग को लिखा पत्र
मुख्यमंत्री सचिवालय के उप सचिव द्वारा उच्च शिक्षा विभाग को भेजे गए आधिकारिक पत्र में उल्लेख किया गया है कि विधायक ललन राम ने औरंगाबाद जिले के कुटुंबा, देव और नबीनगर प्रखंडों में नए सरकारी महाविद्यालयों की स्थापना का प्रस्ताव सौंपा है. सचिवालय ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि इस प्रस्ताव की विधिवत छानबीन कर सकारात्मक पहल की जाए और की गई कार्रवाई से संबंधित प्रगति रिपोर्ट से स्थानीय विधायक तथा मुख्यमंत्री सचिवालय को भी अनिवार्य रूप से अवगत कराया जाए. यह पत्र मुख्यमंत्री सचिवालय की आधिकारिक वेबसाइट पर भी दर्ज कर दिया गया है.
सुदूर सीमावर्ती क्षेत्र होने से छात्राएं हो रहीं प्रभावित
कुटुंबा, देव और टंडवा क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से झारखंड की सीमा से सटे सुदूर ग्रामीण इलाके हैं. विडंबना यह है कि इन तीनों प्रमुख प्रखंडों में वर्तमान में एक भी सरकारी डिग्री कॉलेज संचालित नहीं है.
- लंबी दूरी का संकट: इंटरमीडिएट उत्तीर्ण करने के बाद स्नातक (ग्रेजुएशन) की पढ़ाई के लिए छात्र-छात्राओं को प्रतिदिन औरंगाबाद जिला मुख्यालय, नवीनगर या रोहतास के डेहरी ऑन सोन जाना पड़ता है.
- छात्राओं की पढ़ाई पर असर: आवागमन के साधनों की कमी और लंबी दूरी के कारण आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे, विशेषकर छात्राएं बीच में ही पढ़ाई छोड़ने को विवश हो जाती हैं. स्थानीय स्तर पर कॉलेज खुलने से छात्राओं के ड्रॉपआउट रेट में बड़ी कमी आएगी.
सीमावर्ती बच्चों को घर के पास शिक्षा दिलाना लक्ष्य: विधायक प्रतिनिधि
विधायक प्रतिनिधि सौरभ पाठक ने बताया कि "विधायक ललन राम विधानसभा और सरकार के स्तर पर इस बुनियादी समस्या को लगातार पुरजोर तरीके से उठा रहे हैं. उनका मुख्य उद्देश्य यह है कि सीमावर्ती और ग्रामीण अंचल के विद्यार्थियों को उनके घर के नजदीक ही गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा सुलभ हो सके." उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा उच्च शिक्षा विभाग को दिशा-निर्देश जारी किए जाने के बाद स्थानीय ग्रामीणों, अभिभावकों और छात्र संगठनों में जल्द डिग्री कॉलेज का सपना साकार होने की मजबूत उम्मीद जगी है.
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