औरंगाबाद: अंबा में भारतेंदु हरिश्चंद्र पर संगोष्ठी, वक्ताओं ने कहा- उनकी रचनाओं में राष्ट्रीय चेतना और जनजागरण की स्पष्ट झलक

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कार्यक्रम का उद्घाटन करते अतिथि | Prabhat Khabar Network

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अंबा के देव वैली ग्लोबल स्कूल में भारतेंदु हरिश्चंद्र के व्यक्तित्व और कृतित्व पर एक विशेष साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया. इस अवसर पर साहित्यकारों ने भारतेंदु की रचनाओं में राष्ट्रीय चेतना और जनजागरण के महत्व पर प्रकाश डाला.

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Aurangabad News: जिले के अंबा स्थित देव वैली ग्लोबल स्कूल में हिंदी महोत्सव एवं अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित साप्ताहिक कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत दूसरे दिन विशेष साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया. संगोष्ठी का मुख्य विषय आधुनिक हिंदी साहित्य के जनक कहे जाने वाले भारतेंदु हरिश्चंद्र का व्यक्तित्व और कृतित्व रहा. इस अवसर पर जिले के प्रमुख साहित्यकारों, प्रबुद्ध बुद्धिजीवियों, शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने भाग लिया.

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दीप प्रज्वलन और अतिथियों का अभिनंदन

समारोह का विधिवत शुभारंभ वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सुरेंद्र प्रसाद मिश्रा, अधिवक्ता सिद्धेश्वर विद्यार्थी, लालदेव प्रसाद, कला कौशल मंच के अध्यक्ष आदित्य श्रीवास्तव, जनेश्वर विकास केंद्र के अध्यक्ष रामजी सिंह, कवि लवकुश प्रसाद सिंह, भाजपा नेता रविंद्र शर्मा, समाजसेवी सूरजपत सिंह, साहित्यकार धनंजय जयपुरी एवं राजेंद्र सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया.

विद्यालय के निदेशक शंभू नाथ पांडेय की अध्यक्षता में संपन्न इस कार्यक्रम में प्राचार्या अपराजिता सिंह ने अतिथियों का औपचारिक स्वागत किया, जबकि मंच का कुशल संचालन रामजीत सिंह द्वारा किया गया. इस अवसर पर संजय सिंह, सुरेश ठाकुर, अशोक सिंह, विनोद सिंह और मिथिलेश सिंह प्रमुख रूप से मौजूद रहे.

1. कार्यक्रम का उद्घाटन करते अतिथि  2. प्रस्तुति देती छात्राएं  | Prabhat Khabar Network
प्रस्तुति देती छात्राएं | Prabhat Khabar Network

राष्ट्रीय चेतना और जनजागरण का स्वर थे भारतेंदु

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता डॉ. सुरेंद्र प्रसाद मिश्रा ने कहा कि "भारतेंदु हरिश्चंद्र ने साहित्य को केवल मनोरंजन का साधन न बनाकर उसे जनचेतना, जनजागरण और समाज सुधार का सशक्त माध्यम बनाया. उन्होंने अपनी रचनाओं के जरिए तत्कालीन पराधीन भारत में देशप्रेम और राष्ट्रीय अस्मिता की अलख जगाई."

अधिवक्ता सिद्धेश्वर विद्यार्थी ने रेखांकित किया कि "भारतेंदु के नाटकों और निबंधों में तत्कालीन सामाजिक कुरीतियों, आर्थिक शोषण और प्रशासनिक विसंगतियों पर करारा प्रहार देखने को मिलता है. उनकी रचनाएं और विचार आज के दौर में भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके समय में थे." विद्यालय के निदेशक शंभू नाथ पांडेय ने कहा कि "नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा, संस्कृति और जड़ों से जोड़े रखने के लिए ऐसे आयोजनों का होना नितांत आवश्यक है."

1. कार्यक्रम का उद्घाटन करते अतिथि  2. प्रस्तुति देती छात्राएं  | Prabhat Khabar Network
प्रस्तुति देती छात्राएं | Prabhat Khabar Network

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन, साहित्यसेवी हुए सम्मानित

विचार गोष्ठी के बाद विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए. इन प्रस्तुतियों के जरिए भारत की समृद्ध लोक संस्कृति, सनातन परंपराओं और सभ्यता की मनमोहक झलक पेश की गई. लोक गायिका रिया पाठक की गायन प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमूह की खूब तालियां बटोरीं. वहीं, कवि लवकुश प्रसाद सिंह ने भारतेंदु के जीवन वृत्त पर आधारित स्वरचित काव्य पाठ प्रस्तुत किया.

समारोह के अंतिम चरण में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार, साहित्यिक संवर्धन और शिक्षण क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले साहित्यकारों, शिक्षकों और समाजसेवियों को अंगवस्त्र एवं सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया.

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