औरंगाबाद में नगर निगम बनाने की मांग तेज, 30 अगस्त से पहले प्रस्ताव भेजने की उठी आवाज
प्रेस वार्ता में जानकारी देते समाजसेवी व अन्य | Prabhat Khabar Network
Aurangabad News : औरंगाबाद नगर परिषद को नगर निगम में बदलने की मांग तेज हो गई है. प्रशासन से 30 अगस्त तक प्रस्ताव भेजने की अपील की गई है. पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें.
Aurangabad News : औरंगाबाद नगर परिषद को नगर निगम में उत्क्रमित करने की मांग जोर पकड़ने लगी है. रविवार को नगर उत्थान समिति की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर नगर परिषद को नगर निगम का दर्जा देने की मांग उठाई गई. समिति के सदस्यों ने कहा कि आवश्यक आबादी सहित कई मानकों पर औरंगाबाद नगर निगम बनने की पात्रता रखता है, इसके बावजूद नगर विकास एवं आवास विभाग को उत्क्रमण का प्रस्ताव नहीं भेजा जा रहा है. समाजसेवी सह भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य एवं नगर उत्थान समिति के संयोजक अनिल कुमार सिंह ने कहा कि विभाग ने लंबित प्रस्तावों तथा नगर निकायों के नवगठन और उत्क्रमण से संबंधित प्रस्ताव 30 अगस्त तक मांगे हैं.
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इसके बावजूद औरंगाबाद नगर परिषद के उत्क्रमण का प्रस्ताव लंबित रखा गया है. विभाग को पत्र भेजे जाने के बावजूद इस दिशा में अपेक्षित पहल नहीं की जा रही है. उन्होंने कहा कि हसपुरा, गोह और ओबरा आदि को नगर पंचायत बनाने के प्रस्ताव की बात सामने आ रही है, जबकि औरंगाबाद नगर परिषद को नगर निगम में उत्क्रमित करने के लिए अब तक प्रस्ताव नहीं भेजा जाना दुर्भाग्यपूर्ण है. जबकि इस संबंध में विभागीय और प्रशासनिक स्तर से जिले को कई बार पत्र प्राप्त हो चुके हैं.
30 अगस्त की समय-सीमा, प्रस्ताव भेजने की मांग
अनिल सिंह ने कहा कि बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 के अनुसार औरंगाबाद नगर परिषद को नगर निगम में उत्क्रमित करने के लिए आवश्यक अहर्ताएं पूरी होती हैं. इसके बावजूद यदि प्रस्ताव विभाग को नहीं भेजा जाता है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण होगा. उन्होंने कहा कि नगर विकास एवं आवास विभाग ने नगर निकायों के नवगठन और उत्क्रमण से संबंधित प्रस्ताव भेजने के लिए 30 अगस्त तक की समय-सीमा निर्धारित की है. इसलिए औरंगाबाद नगर परिषद के उत्क्रमण का प्रस्ताव भी निर्धारित समय के भीतर विभाग को भेजा जाना चाहिए.
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष पुरुषोत्तम कुमार सिंह ने कहा कि औरंगाबाद शहर से सटे क्षेत्रों को भी प्रस्तावित नगर निगम की सीमा में शामिल करने की मांग की जाएगी. इससे क्षेत्र में विकास की गति तेज होगी.
दो लाख की आबादी का मानक, औरंगाबाद इससे काफी आगे
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि नगर निगम गठन के लिए आबादी एक प्रमुख मानक है. अनिल सिंह ने कहा कि वर्ष 2001 की जनगणना में ही औरंगाबाद शहर की आबादी करीब 1.02 लाख थी. वर्तमान में नगर परिषद क्षेत्र में 33 वार्ड हैं और शहर का क्षेत्रफल लगभग 23.2 वर्ग किलोमीटर है.
उन्होंने बताया कि वर्ष 2011 के बाद देश में नियमित जनगणना नहीं होने के कारण बिहार सरकार आबादी के आकलन के लिए ग्राफिकल प्रोजेक्शन मेथड का इस्तेमाल करती है. इस आकलन के आधार पर वर्ष 2023 तक औरंगाबाद की अनुमानित आबादी करीब पौने तीन लाख से तीन लाख तक मानी जा रही थी. वर्तमान में भी आबादी लगभग 2.60 लाख के आसपास होने का अनुमान लगाया जा रहा है.
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6 से 7 किलोमीटर के दायरे में ग्रामीण क्षेत्रों को शामिल करने की मांग
प्रेस वार्ता में बताया गया कि औरंगाबाद शहर की बसावट मूल रूप से ग्रामीण स्वरूप की रही है. यदि रमेश चौक को शहर का केंद्र माना जाए तो छह से सात किलोमीटर के दायरे में आने वाले ग्रामीण इलाकों को नगर निगम की सीमा में शामिल किया जा सकता है. समिति के सदस्यों ने कहा कि औरंगाबाद के लगातार विस्तार के बावजूद शहर का विकास लंबे समय तक समग्र मास्टर प्लान के अनुरूप नहीं हो सका.
इसका असर शहर की संकरी गलियों, बजबजाती नालियों, जलजमाव, जर्जर सड़कों और जगह-जगह बने गड्ढों के रूप में दिखाई देता है. नगर निगम का गठन होने से व्यापक शहरी योजना के तहत विकास को गति मिलने की उम्मीद है.
जरूरी निर्णय नहीं लेना विकास में बाधक
समिति के सदस्यों ने कहा कि शहर के विकास के लिए जरूरी निर्णय नहीं लेने वाले लोग विकास में बाधक बन रहे हैं. औरंगाबाद को नगर निगम का दर्जा दिलाने के लिए जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों को एकजुट होना होगा. यदि स्थानीय स्तर पर अपेक्षित पहल नहीं होती है तो इस मुद्दे को मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के स्तर तक ले जाया जाएगा. जरूरत पड़ी तो इसके लिए व्यापक संघर्ष भी किया जाएगा.
समिति ने कहा कि औरंगाबाद की बढ़ती आबादी, लगातार हो रहे शहरी विस्तार और आसपास विकसित हो रही नई बसावट को देखते हुए नगर निगम का गठन समय की जरूरत है. नगर परिषद की सीमित क्षमता की तुलना में नगर निगम के माध्यम से बड़े क्षेत्र में योजनाबद्ध विकास और बेहतर शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के अधिक अवसर होंगे. ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब औरंगाबाद नगर निगम बनने की आवश्यक अहर्ताएं पूरी करता है तो इसका प्रस्ताव विभाग को भेजने में देरी क्यों हो रही है. समिति ने 30 अगस्त की समय-सीमा से पहले प्रस्ताव भेजने की मांग तेज कर दी है.
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