मरीज के परिजनों ने किया हंगामा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :23 Dec 2016 7:29 AM (IST)
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सदर अस्पताल में रहा अफरातफरी का माहौल ट्रैक्टर से दब कर जख्मी अकौना के युवक को लेकर पहुंचे थे लोग औरंगाबाद शहर : गुुरुवार की सुबह सदर अस्पताल में इलाज कराने एक मरीज के परिजनों ने जम कर हंगामा किया. बताया जा रहा है कि अकौना गांव का एक युवक रविरंजन कुमार ट्रैक्टर से दब […]
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सदर अस्पताल में रहा अफरातफरी का माहौल
ट्रैक्टर से दब कर जख्मी अकौना के युवक को लेकर पहुंचे थे लोग
औरंगाबाद शहर : गुुरुवार की सुबह सदर अस्पताल में इलाज कराने एक मरीज के परिजनों ने जम कर हंगामा किया. बताया जा रहा है कि अकौना गांव का एक युवक रविरंजन कुमार ट्रैक्टर से दब कर गंभीर रूप से जख्मी हो गया था. उसे इलाज के लिए लेकर आये परिजन व शुभचिंतकों ने अस्पताल के डॉक्टर व महिला कर्मचारियों के साथ बदसलूकी भी की. ‘पकड़ो-पकडो, मारो’ की आवाज के बीच अस्पताल परिसर में अफरातफरी का माहौल कायम हो गया.
कोई डॉक्टर को पकड़ कर मरीज के पास ला रहा है, तो कोई महिला कर्मचारियों को. लगभग आधे घंटे तक डॉक्टर से लेकर कर्मचारी दहशत में रहे. अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था में लगे गार्ड भी दिखाई नहीं पड़े. ओपीडी से डॉक्टर को मेल वार्ड में जबरदस्ती ले जाया गया और फिर डॉक्टर के साथ महिला कर्मियों ने दहशत में इलाज किया. आखिरकार युवक को जब रेफर किया गया और लोग उसे लेकर अस्पताल से चले गये, तक जाकर माहौल शांत हुआ. बताया जा रहा है कि अकौना मोड़ के समीप रविरंजन अपने कुछ साथियों के साथ वह ट्रैक्टर चला रहा था, इसी बीच ट्रैक्टर का संतुलन खो गया और वह सीधे सड़क पर पलट गयी.
आये दिन शर्मशार हो रही मानवता, कैसे काम करेंगे डॉक्टर : सदर अस्पताल सप्ताह के अधिकतर दिनों में अखबारों की सुर्खियां बन रहा है. आये दिन यहां जरा-जरा सी बात को लेकर हंगामा होता है.
किसी का बुखार नहीं उतर रहा हो, किसी को सर्दी लग गयी हो, कोई मारपीट के के बाद इलाज कराने पहुंचा हो या फिर कोई दुर्घटना में जख्मी होकर इलाज कराने सदर अस्पताल पहुंचा हो, तो हंगामा करना उनकी फितरत बन गयी है. सवाल यह है कि आखिर व्यवस्था को कुव्यवस्था में बदलने के लिये जिम्मेवार कौन हैं. जिन्हें सैकड़ों मरीजों को प्रतिदिन देखने की जिम्मेवारी दी गयी है, वो अगर दहशत के माहौल में काम करें, तो दूर-दराज से आनेवाले मरीजों का क्या होगा. स्थिति यह है कि अस्पताल के डॉक्टर और अन्य कर्मी खुले दिमाग से काम नहीं कर पा रहे हैं. पूर्व में कई दफे डॉक्टरों व कर्मचारियों के साथ मारपीट व अभद्र व्यवहार की घटनाएं घट चुकी हैं. हालांकि अस्पताल के कर्मी इस पर कुछ भी बोलने से इनकार करते हैं. सवाल यह है कि कब तक वे डर से काम करेंगे और हम डरा कर काम करायेंगे.
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