सुरेश व सुदेश्वर के मैदान में आने से हुआ नुकसान

Published at :09 Nov 2015 7:20 PM (IST)
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सुरेश व सुदेश्वर के मैदान में आने से हुआ नुकसान

सुरेश व सुदेश्वर के मैदान में आने से हुआ नुकसान कुटुंबा में बाहरी प्रत्याशी उतारना एनडीए को पड़ा महंगा कुटुंबा (औरंगाबाद) चुनाव की घोषणा होने के बाद से ही भाजपा समर्थक व कार्यकर्ता कुटुंबा सीट पर जीत सुनिश्चित मानते थे, पर चुनाव परिणाम ठीक विपरीत रहा. चुनाव में काफी प्रचार-प्रसार किया गया. प्रचार के दौरान […]

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सुरेश व सुदेश्वर के मैदान में आने से हुआ नुकसान कुटुंबा में बाहरी प्रत्याशी उतारना एनडीए को पड़ा महंगा कुटुंबा (औरंगाबाद) चुनाव की घोषणा होने के बाद से ही भाजपा समर्थक व कार्यकर्ता कुटुंबा सीट पर जीत सुनिश्चित मानते थे, पर चुनाव परिणाम ठीक विपरीत रहा. चुनाव में काफी प्रचार-प्रसार किया गया. प्रचार के दौरान सात हेलीकॉप्टर उतारा गया और एनडीए के कई स्टार प्रचारक यहां पहुंचे. इतना ही नहीं नेता के साथ-साथ अभिनेता को भी प्रचार में उतारा गया. इसके बावजूद भी क्षेत्र से हम प्रत्याशी संतोष कुमार सुमन की करारी हार हुई. वे 10 हजार से अधिक मतों से चुनाव में पराजित हुए. मतगणना के बाद हार-जीत की चर्चा होने लगी है. इस क्षेत्र से हार की कई चर्चाएं सुनने को मिल रही है. लोगों का ऐसा मानना है कि एनडीए को बाहरी प्रत्याशी खड़ा करना महंगा पड़ा. सुमन इस क्षेत्र के लिए बिल्कुल नये चेहरा थे, जिसे चुनाव के पहले कोई जनता नहीं जानती थी. कई लोग पूर्व मंत्री डाॅ सुरेश पासवान व प्रमुख सुदेश्वर कुमार के चुनाव मैदान में आने से एनडीए को नुकसान बता रहे हैं. ये दोनों ही प्रत्याशी पूर्व में भाजपा से जुड़े थे. डाॅ सुरेश कई वर्षों तक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, जिससे उनका लोगों में प्रभाव है. सुदेश्वर कुमार का प्रमुख के कार्यकाल के दौरान लोगों में पैठ बनी है. दोनों ही प्रत्याशी को मिला कर तकरीबन 10 हजार 115 वोट मिले है और इतने ही वोटों से हम प्रत्याशी की हार हुई. इधर, सुमन को क्षेत्र का भौगोलिक जानकारी नहीं थी और लोगों की पहचान से भी ये दूर थे .सुमन को क्षेत्र में आने के बाद कई ऐसे लोग भी इनसे जुड़े जिन्होंने काफी वोट पर अपना कब्जा बताया और इन्हें मतदाताओं से दूर रखा. इस संबंध में जानने के लिए प्रत्याशी सुमन से संपर्क करने का प्रयास किया, पर फोन रिसीव नहीं किये. इधर, भाजपा मंडल अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह से संपर्क किया तो उन्होंने हार का कारण जातीय गोलबंदी बताया और कहा कि सुरेश पासवान व सुदेश्वर कुमार के मैदान में आने से वोट बंट गया, जिससे हार का सामना करना पड़ा.

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