आरा में बदल रही प्रसव की तस्वीर, 87% महिलाएं अस्पताल पहुंच रहीं, जानें NFHS-6 के आंकड़े
आरा सदर अस्पताल
Arrah Institutional Delivery : आरा में सुरक्षित मातृत्व की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है. NFHS-6 के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 87% महिलाएं अब अस्पतालों में प्रसव करा रही हैं, जिनमें से 88.3% प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की देखरेख में हुए. यह लेख इन आंकड़ों, उपलब्ध सरकारी सुविधाओं और प्रसव पूर्व जांच के महत्व पर प्रकाश डालता है.
Arrah Institutional Delivery : आरा में महिलाएं अब सुरक्षित प्रसव के लिए अस्पतालों का रुख अधिक कर रही हैं. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के 2023-24 के आंकड़ों के अनुसार जिले में 87 प्रतिशत महिलाओं ने संस्थागत प्रसव कराया. इनमें 88.3 प्रतिशत प्रसव प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की देखरेख में हुए. आंकड़े प्रसव पूर्व जांच को लेकर भी स्थिति में सुधार की ओर इशारा करते हैं.
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87 प्रतिशत महिलाओं ने कराया संस्थागत प्रसव
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के आंकड़ों के मुताबिक जिले की 87 प्रतिशत महिलाएं प्रसव के लिए स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंच रही हैं. संस्थागत प्रसव को सुरक्षित मातृत्व की दिशा में अहम कदम माना जाता है.
88.3 प्रतिशत प्रसव प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों ने कराये
जिले में 88.3 प्रतिशत प्रसव प्रशिक्षित और सक्षम स्वास्थ्यकर्मियों की देखरेख में कराये जा रहे हैं. इससे प्रसव के दौरान मां और नवजात को आवश्यक चिकित्सकीय सहायता मिलने की संभावना बढ़ती है.
20.8 प्रतिशत प्रसव ऑपरेशन से
सर्वेक्षण के अनुसार जिले में 20.8 प्रतिशत महिलाओं का प्रसव ऑपरेशन यानी सी-सेक्शन के जरिये हुआ. सी-सेक्शन की जरूरत महिला और बच्चे की स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर तय की जाती है.
चार प्रसव पूर्व जांच का आंकड़ा 39.2 प्रतिशत
जिले में 39.2 प्रतिशत महिलाओं ने गर्भावस्था के दौरान कम से कम चार प्रसव पूर्व जांच यानी एएनसी करायी. वहीं, गर्भावस्था की पहली तिमाही में करीब 72.1 प्रतिशत महिलाओं ने प्रसव पूर्व जांच का लाभ लिया.
सरकारी अस्पतालों में प्रसव की सुविधाएं उपलब्ध
सदर अस्पताल समेत जिले के सरकारी अस्पतालों में प्रसव से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध करायी गयी हैं. अस्पतालों में लेबर रूम और ऑपरेशन थिएटर के साथ प्रसव पूर्व वार्ड और मैटरनल वार्ड की व्यवस्था की गयी है.
चिकित्सक और प्रशिक्षित नर्सों की तैनाती
प्रसव संबंधी सेवाओं के लिए सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सकों और प्रशिक्षित नर्सों की प्रतिनियुक्ति की जाती है. विभाग की ओर से प्रसव से जुड़ी कई सेवाएं निशुल्क उपलब्ध कराने का प्रावधान है.
एएनसी जांच को लेकर जागरूकता जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार गर्भावस्था के दौरान नियमित प्रसव पूर्व जांच बेहद जरूरी है. विशेषज्ञों का कहना है कि एएनसी के फायदे की जानकारी महिलाओं के साथ पुरुषों और किशोरियों को भी दी जानी चाहिए. इससे एएनसी कवरेज बढ़ाने और हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के प्रबंधन में मदद मिल सकती है.
जननी सुरक्षा योजना के तहत मिलती है सहायता
सरकार की जननी सुरक्षा योजना के तहत ग्रामीण महिलाओं को 1400 रुपये और शहरी महिलाओं को 1000 रुपये की सहायता राशि देने का प्रावधान है. यह सुविधा सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में संस्थागत प्रसव से जुड़ी है.
प्रसूता और नवजात को कई सुविधाएं
जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत सरकारी अस्पताल में प्रसूता और नवजात को 48 घंटे तक रखने की व्यवस्था है. इस दौरान दवा, भोजन, जांच, रक्त की उपलब्धता और परिवहन जैसी सुविधाएं निशुल्क देने का प्रावधान है.
मुफ्त एंबुलेंस और सी-सेक्शन की सुविधा
सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मुफ्त एंबुलेंस सेवा, भोजन, जरूरत के अनुसार मुफ्त सी-सेक्शन और रक्त की उपलब्धता समेत कई सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है. इन योजनाओं का उद्देश्य सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देना और प्रसव के दौरान होने वाले जोखिम को कम करना है.
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