भोजपुर : बड़हरा में गंगा का जलस्तर बढ़ने की रफ्तार धीमी, 24-48 घंटे में राहत की उम्मीद

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केशोपुर सरैंया मुख्य पथ पर हाजीपुर के समीप बाढ़ का पानी | Prabhat Khabar Network

भोजपुर जिले के बड़हरा प्रखंड में गंगा के बढ़ते जलस्तर में अब कमी की उम्मीद जगी है, क्योंकि जलवृद्धि की रफ्तार धीमी हो गई है. ऊपरी हिस्सों में नदी के जलस्तर में गिरावट का असर अगले 24-48 घंटों में दिखने की संभावना है. हालांकि, कई गांवों के खेत और बधार बाढ़ की चपेट में हैं.

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Barhara Ganga Water Level : भोजपुर जिले के बड़हरा प्रखंड क्षेत्र में गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच अब राहत की उम्मीद जगी है, क्योंकि पिछले कुछ घंटों में नदी के जलस्तर में वृद्धि की रफ्तार काफी धीमी हो गई है. रविवार की सुबह गंगा का जलस्तर करीब 53.52 मीटर दर्ज किया गया था, जो शाम चार बजे तक बढ़कर 53.55 मीटर पहुंच गया, और इस तरह सुबह से शाम तक महज तीन सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई.

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खतरे के निशान से ऊपर और ऊपरी हिस्सों में गिरावट

जल संसाधन विभाग के आशीष कुमार रंजन के अनुसार गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 53.08 मीटर से करीब 47 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है.

22 अगस्त की सुबह जलस्तर 53.28 मीटर था, जो 23 अगस्त की सुबह 53.52 मीटर पहुंचा, हालांकि इलाहाबाद और कानपुर की ओर गंगा के जलस्तर में कमी आने लगी है जिसका असर अगले 24 से 48 घंटे में यहां दिखने की उम्मीद है.

खेतों और बधार में फैला बाढ़ का पानी

गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण मोहन करजा, बड़का लौहर, बुबेछापरा पथ, नेकनाम टोला, बखोरापुर, दुबे छपरा, हाजीपुर, शिवपुर, गुंडी और छोटका ईटहना समेत कई गांवों के बधार में पानी फैल गया है.

खेतों में लगी लौकी, नेनुआ, छिंगुनी, परवल और मकई जैसी कई फसलें पानी की चपेट में हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान की चिंता सता रही है.

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सड़कों पर पानी और पशुपालकों के सामने संकट

बाढ़ का पानी लौहर-दुबे छपरा, लौहर-बखोरापुर और नेकनाम टोला पहुंच पथ के अलावा केशोपुर-सरैंया पथ सहित कई ग्रामीण मार्गों पर भी पहुंच गया है.

इसके अलावा, बधार और खेतों में पानी फैलने से पशुपालकों के सामने हरे चारे का गंभीर संकट भी गहराने लगा है, जिससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं.

केशोपुर सरैंया मुख्य पथ पर हाजीपुर के समीप बाढ़ का पानी नेकनामटोला से नाव से आते लोग | Prabhat Khabar Network
नेकनामटोला से नाव से आते लोग | Prabhat Khabar Network

ग्रामीणों की मांग और प्रशासनिक निगरानी

ग्रामीणों का कहना है कि यदि गंगा का जलस्तर अब स्थिर होकर घटने लगता है तो बड़ी राहत मिलेगी, हालांकि खेतों और निचले इलाकों से पानी निकलने में समय लगेगा.

ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी रखने और जरूरतमंदों के लिए आवश्यक राहत व्यवस्था बनाए रखने की मांग की है.


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