भोजपुर: गंगा का जलस्तर घटा, लेकिन बड़हरा के गांवों में कमर तक पानी, नाव पर निर्भर लोग

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बड़हरा में बाढ़ का पानी

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गंगा के जलस्तर में लगातार दूसरे दिन कमी के बावजूद बड़हरा प्रखंड के बाढ़ प्रभावित गांवों में स्थिति गंभीर बनी हुई है. कई गांवों में अब भी कमर तक पानी जमा है, जिससे लोगों को पीने के साफ पानी और दवाओं की किल्लत झेलनी पड़ रही है.

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Ganga water level: गंगा के जलस्तर में लगातार दूसरे दिन आठ सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गयी है, लेकिन बड़हरा प्रखंड के बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं. बाढ़ नियंत्रण विभाग के अनुसार गुरुवार की शाम छह बजे बड़हरा में गंगा का जलस्तर 54.10 मीटर दर्ज किया गया. जबकि सुबह छह बजे जलस्तर 54.18 मीटर था. बुधवार को भी जलस्तर में आठ सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गयी थी. इस तरह दो दिनों में गंगा का जलस्तर कुल 16 सेंटीमीटर घटा है. इसके बावजूद गंगा खतरे के निशान 53.08 मीटर से 1.02 मीटर ऊपर बह रही है.

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कई गांवों में अब भी कमर तक पानी

जलस्तर में कमी के बाद भी बाढ़ प्रभावित गांवों की स्थिति सामान्य नहीं हुई है. कई गांवों में अब भी घरों में कमर तक पानी जमा है. बाढ़ के पानी से घिरे परिवार पिछले करीब एक सप्ताह से चौकी पर चौकी लगाकर या घरों की छतों पर रहने को मजबूर हैं. लोगों के सामने सबसे बड़ी समस्या पीने के लिए साफ पानी और जरूरी दवाओं की है. जलजमाव के कारण घरों में सांप-बिच्छू समेत अन्य जहरीले जीवों के निकलने का खतरा भी बना हुआ है. ग्रामीणों ने प्रशासन से नियमित रूप से नाव चलाने के साथ पेयजल, दवा और भोजन की समुचित व्यवस्था कराने की मांग की है.

बड़हरा में बाढ़ का पानी  नुरपुर में राहत शिविर भोजन करते बाढ़ पिड़ित | Prabhat Khabar Network
नुरपुर में राहत शिविर भोजन करते बाढ़ पीड़ित

22 में 21 पंचायतें बाढ़ प्रभावित

ग्रामीणों के अनुसार बड़हरा प्रखंड की 22 पंचायतों में से 21 पंचायतें बाढ़ की चपेट में हैं. अवदान राय का टोला, नेकनामटोला, गजियापुर, फरहदा, सिरिसिया, कुतुबपुर का डेरा, बखोरापुर समेत कई गांवों और टोलों में बाढ़ का पानी फैला हुआ है. बाढ़ प्रभावित लोगों को आवागमन के लिए नाव पर निर्भर रहना पड़ रहा है.

45 स्थानों पर राहत शिविर और शरणस्थली

प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 45 स्थानों पर राहत शिविर और शरणस्थली बनाये गये हैं. अंचलाधिकारी अंशु प्रसून ने बताया कि राहत शिविरों में रहने वाले लोगों के लिए पका-पकाया भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है. साथ ही पशुपालकों के लिए पशु चारे की भी व्यवस्था की गयी है.

जलस्तर में लगातार कमी के बावजूद प्रशासन और ग्रामीणों की चिंता अभी कम नहीं हुई है. बाढ़ का पानी गांवों और घरों में जमा रहने के कारण लोगों को जलस्तर पूरी तरह सामान्य होने का इंतजार है.

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