आरा : जगदीशपुर में पैक्स को तीन माह से नहीं मिला भुगतान, 77 लाख रुपये बकाया
तीन माह से नहीं मिला भुगतान
Jagdishpur PACS SFC Payment : जगदीशपुर के पैक्सों को राज्य खाद्य निगम (एसएफसी) से चावल की बकाया राशि का भुगतान तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी नहीं मिला है. इससे पैक्स अध्यक्षों पर बैंकों के ऋण का ब्याज बढ़ने से वित्तीय दबाव बढ़ गया है.
Jagdishpur PACS SFC Payment : आरा के जगदीशपुर प्रखंड क्षेत्र के पैक्सों को राज्य खाद्य निगम (एसएफसी) से चावल की राशि का भुगतान नहीं होने से परेशानी बढ़ रही है. पैक्स अध्यक्षों के अनुसार किसानों से खरीदे गए धान का चावल तैयार कर एसएफसी को दिए हुए तीन माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक राशि का भुगतान नहीं किया गया है. इससे पैक्सों पर वित्तीय बोझ लगातार बढ़ रहा है.
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हरिगांव पैक्स का करीब 77 लाख रुपये बकाया
जगदीशपुर प्रखंड के हरिगांव पैक्स अध्यक्ष राणा प्रताप सिंह ने इस मामले को लेकर सरकार के सहयोग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करायी है. उन्होंने बताया कि हरिगांव पैक्स द्वारा किसानों से खरीदे गए धान से तैयार चावल एसएफसी को दिए हुए तीन माह से अधिक हो चुके हैं.
चावल के करीब 70 लाख रुपये बाकी
पैक्स अध्यक्ष के अनुसार हरिगांव पैक्स का एसएफसी के पास चावल का करीब 70 लाख रुपये बकाया है. इसके अलावा गेहूं की करीब सात लाख रुपये की राशि भी लंबित है. इस तरह पैक्स की कुल करीब 77 लाख रुपये की राशि एसएफसी के पास बकाया है.
बैंक ऋण का ब्याज बढ़ने से बढ़ा वित्तीय दबाव
राणा प्रताप सिंह ने कहा कि एसएफसी से समय पर भुगतान नहीं मिलने के कारण पैक्स को बैंक से लिए गए कर्ज पर ब्याज देना पड़ रहा है. भुगतान में देरी से ब्याज का बोझ बढ़ता जा रहा है, जिससे पैक्स की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है.
ब्याज माफी और ब्याज मुक्त व्यवस्था की मांग
पैक्स अध्यक्ष ने सरकार से मांग की है कि एसएफसी से भुगतान में हुई देरी के कारण बढ़े बैंक ऋण के ब्याज को माफ किया जाए. साथ ही उन्होंने भविष्य में पैक्सों के लिए ब्याज मुक्त व्यवस्था किए जाने का अनुरोध किया है, ताकि भुगतान में देरी होने पर पैक्स पर अतिरिक्त वित्तीय भार न पड़े.
भुगतान नहीं होने से पैक्सों की मुश्किल बढ़ी
पैक्सों का कहना है कि किसानों से धान खरीदने के बाद उसके चावल की आपूर्ति एसएफसी को की जाती है. ऐसे में भुगतान समय पर नहीं मिलने से पैक्स की कार्यशील पूंजी प्रभावित होती है. लंबे समय तक राशि अटके रहने से बैंक ऋण और उसके ब्याज का बोझ भी बढ़ता है.
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