आरा सदर अस्पताल में 23 से अधिक AC गायब, कोरोना काल में मिले लाखों के उपकरणों का भी नहीं मिल रहा हिसाब
सदर अस्पताल, आरा
आरा सदर अस्पताल में मरीजों की सुविधा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. अस्पताल से 23 से अधिक एयर कंडीशनर और कोरोना काल में मिले लाखों के चिकित्सा उपकरण गायब हो गए हैं. इस मामले में अस्पताल प्रबंधन के पास भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं है.
Arrah Sadar Hospital : आरा जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सदर अस्पताल में मरीजों की सुविधा और व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. अस्पताल से पिछले कुछ वर्षों में 23 से अधिक एयर कंडीशनर गायब होने की बात सामने आई है, लेकिन अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. हैरानी की बात यह है कि अस्पताल प्रबंधन को यह तक स्पष्ट जानकारी नहीं है कि ये AC कब और कैसे गायब हुए. वहीं, अस्पताल के महत्वपूर्ण प्रसूति वार्ड और चिकित्सा कक्ष से भी तीन वातानुकूलित यंत्र गायब होने की जानकारी सामने आई है. मामले को लेकर जिम्मेदारी तय करने के बजाय संबंधित लोग एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं.
सरकार की ओर से सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. दूसरी ओर, सदर अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों के गायब होने और उनके रखरखाव में लापरवाही के आरोप व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं. मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं का सही तरीके से इस्तेमाल और रखरखाव नहीं होने का सीधा असर इलाज कराने आने वाले लोगों पर पड़ता है.
प्रसूति वार्ड से भी गायब हैं तीन AC
सदर अस्पताल के महत्वपूर्ण प्रसूति वार्ड और चिकित्सा कक्ष से तीन एयर कंडीशनर गायब होने की जानकारी सामने आई है. बताया जाता है कि मामले की जानकारी सामने आने के बाद जिम्मेदारी को लेकर अलग-अलग स्तर पर जवाबदेही तय करने की बात कही जा रही है. लेकिन अस्पताल प्रबंधन के पास इस संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं है कि ये AC आखिर कब गायब हुए. इतने महत्वपूर्ण हिस्से से उपकरणों के गायब होने की जानकारी समय पर सामने नहीं आना अस्पताल की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है.
कोरोना काल में उपलब्ध कराए गए उपकरणों का भी उठ रहा सवाल
कोरोना संक्रमण के दौरान मरीजों की सुविधा के लिए तत्कालीन केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह की पहल पर सदर अस्पताल और जिला प्रशासन को बड़ी संख्या में चिकित्सा उपकरण और जरूरी सामान उपलब्ध कराए गए थे. इनमें ऑक्सीजन सिलिंडर, ऑक्सीजन फ्लो मीटर, पल्स ऑक्सीमीटर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, फंक्शनल मॉनिटर, ईसीजी मशीन, N95 मास्क, नाइट्राइल दस्ताने और जीवन रक्षक दवाएं शामिल थीं.
27 मई 2021 को उपलब्ध कराए गए उपकरणों में पोर्टेबल एक्स-रे मशीन की कीमत 1.50 लाख रुपये, पोर्टेबल ईसीजी सेट 93 हजार रुपये, कार्डियक मॉनिटर सेट 2.54 लाख रुपये, कार्डियक बेड सेट 1.60 लाख रुपये, इन्फ्यूजन पंप सेट 3.25 लाख रुपये, सक्शन मशीन सेट 82 हजार 500 रुपये, नेबुलाइजेशन मशीन सेट 13 हजार 500 रुपये और CPAP मास्क सेट 72 हजार रुपये का उल्लेख है. इसके अलावा ऑटो एनालाइजर सेट की कीमत 7.80 लाख रुपये और डी-डिमर/IL-6/CRP मशीन की कीमत 1.08 लाख रुपये बताई गई थी. रैपिड एंटीजन टेस्ट किट की कीमत 5.25 लाख रुपये दर्ज थी.
विद्युत उपक्रमों ने भी उपलब्ध कराए थे कई उपकरण
30 जुलाई 2020 को NHPC के नेतृत्व में विद्युत मंत्रालय के तहत आने वाले छह केंद्रीय उपक्रमों ने कोरोना संक्रमण से निपटने और मरीजों की सुविधा के लिए जिला प्रशासन को कई चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए थे. इनमें NHPC, NTPC, PFC, Power Grid, REC और SJVNL शामिल थे. इसके चार दिन बाद शेष सामान भी उपलब्ध कराया गया था.
मंत्री के निर्देश पर उपलब्ध कराए गए सामान में चार कार्डियक मॉनिटर, चार कार्डियक बेड, पांच इन्फ्यूजन पंप, पांच सक्शन मशीन, छह नेबुलाइजेशन मशीन, 40 CPAP मास्क, पांच CPAP मशीन, एक डी-डिमर, छह ट्रोपोनिन मशीन, चार मॉनिटर स्टैंड और एक पैकेट ट्रोपोनिन किट शामिल थे.
सिविल सर्जन ने कहा, जानकारी नहीं है
मामले को लेकर सिविल सर्जन डॉ. शिवेन्द्र कुमार सिन्हा से जानकारी मांगी गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है और पता करके बताने की बात कही. हालांकि, इसके तीन दिन बाद भी इस मामले में सिविल सर्जन की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आ सकी. ऐसे में अस्पताल से गायब हुए AC और कोरोना काल में उपलब्ध कराए गए उपकरणों के संबंध में जांच और जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग उठ रही है. मरीजों और उनके परिजनों का सवाल है कि यदि सरकारी अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों का हिसाब और निगरानी ही स्पष्ट नहीं होगी, तो मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं कैसे मिलेंगी.
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