फर्जी आधार कार्ड गिरोह का मुख्य आरोपी गिरफ्तार, भरगामा पुलिस की बड़ी कार्रवाई

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गिरफ्तार आरोपी शाहनवाज को लेकर भरगामा थाना पहुंची पुलिस

भरगामा पुलिस ने फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह के मुख्य आरोपी मो. शाहनवाज को गिरफ्तार किया है। अन्य सदस्यों की तलाश में छापेमारी जारी है।

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भरगामा थाना पुलिस ने फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले संगठित गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल मो. शाहनवाज को गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी को गुरुवार को बीरनगर पुरब छर्रापट्टी नहर के समीप से गिरफ्तार किया गया. पुलिस इसे जांच में बड़ी सफलता मान रही है.

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थानाध्यक्ष राजेश कुमार ने बताया कि मजबूत सूचना तंत्र, मुखबिर की सटीक सूचना तथा वैज्ञानिक एवं तकनीकी अनुसंधान के आधार पर एसआई गुड्डु कुमार के साथ संयुक्त कार्रवाई कर मो. फिरोज के पुत्र मो. शाहनवाज को गिरफ्तार किया गया. आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य जुटाए जा चुके हैं और उससे पूछताछ की जा रही है. गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी जारी है.

एक पखवाड़ा पहले हुआ था गिरोह का खुलासा

करीब एक पखवाड़ा पहले भरगामा थाना क्षेत्र के बीरनगर में संचालित फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह का प्रशासन ने भंडाफोड़ किया था. अनुमंडल पदाधिकारी अभय कुमार तिवारी के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर छर्रापट्टी निवासी कैशर मास्टर के घर छापेमारी की थी. कार्रवाई की भनक लगते ही गिरोह के संचालक समेत अन्य आरोपी फरार हो गए थे.

छापेमारी में मिले थे कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण

छापेमारी के दौरान टीम ने कंप्यूटर सिस्टम, हाई क्वालिटी प्रिंटर, लैमिनेशन मशीन, तैयार फर्जी आधार कार्ड, बायोमेट्रिक डिवाइस, फिंगर क्लोनिंग उपकरण तथा कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए थे. प्रारंभिक जांच में सामने आया था कि एपीके और प्रॉक्सी एप के माध्यम से पहचान संबंधी सूचनाओं में हेरफेर कर अवैध तरीके से आधार कार्ड तैयार किए जा रहे थे.

पुलिस ने सभी उपकरणों और दस्तावेजों को जब्त कर विस्तृत जांच शुरू की थी. कार्रवाई में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी मुकेश कुमार साहा, बीडीओ शशिभूषण सुमन, थानाध्यक्ष राजेश कुमार समेत प्रशासनिक अधिकारी और सशस्त्र बल शामिल थे.

सरकारी योजनाओं में दुरुपयोग की आशंका

स्थानीय लोगों के अनुसार बीरनगर में यह फर्जीवाड़ा लंबे समय से चल रहा था. गिरोह जरूरतमंद लोगों को झांसा देकर फर्जी दस्तावेज तैयार करता था और इसके एवज में मोटी रकम वसूलता था. पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क का इस्तेमाल सरकारी योजनाओं में फर्जी लाभ लेने के लिए भी किया जा सकता था. फिलहाल पूरे नेटवर्क की कड़ियों को खंगालने का काम जारी है.

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