अररिया में CM के निर्देश की भी अनसुनी! 6 माह से पुश्तैनी घर-जमीन पर कब्जे के लिए भटक रहा पीड़ित; जानें पूरा मामला

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फोटो- पीड़ित परिवार | Prabhat Khabar Network

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अररिया में एक परिवार 6 महीने से अपनी पुश्तैनी जमीन और घर पर कब्जा पाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहा है. मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद भी न्याय न मिलने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं.

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अररिया, भरगामा. रघुनाथपुर दक्षिण पंचायत के मौजाहा गांव निवासी शोभानंद मंडल पिछले छह माह से पुश्तैनी जमीन और घर पर दखल पाने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं. स्थानीय स्तर से लेकर जिला स्तर तक शिकायत के बाद भी राहत नहीं मिलने पर उन्होंने मुख्यमंत्री सहयोग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करायी. पीड़ित का दावा है कि मुख्यमंत्री स्तर से नियमानुसार दखल दिलाने का निर्देश दिए जाने के बावजूद अब तक उन्हें जमीन और घर पर कब्जा नहीं मिल सका है.

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बड़े भाई से जमीन के बंटवारे को लेकर शुरू हुआ विवाद

शोभानंद मंडल के अनुसार बड़े भाई कृत्यानंद मंडल से खरीदगी जमीन के बंटवारे को लेकर विवाद शुरू हुआ. उनका आरोप है कि बड़े भाई ने उनके पुश्तैनी घर को चारों ओर से घेरकर उन्हें बेदखल कर दिया. इसके बाद वे परिवार के साथ कामत पर रहने को मजबूर हैं.

खरीदगी जमीन पर भी कब्जे का लगाया आरोप

पीड़ित ने बताया कि खाता संख्या 1032 और खेसरा संख्या 6028 की जमीन उन्होंने सिरसिया कला निवासी विष्णुदेव झा से खरीदी थी. उनका आरोप है कि इस जमीन पर भी कथित रूप से कब्जा कर लिया गया है. शोभानंद के अनुसार जमीन पर दखल लेने के लिए जाने के दौरान 23 मई 2026 को उनके साथ मारपीट की गयी. इस मामले में भरगामा थाना में कांड संख्या 167/2026 दर्ज कराया गया है.

जनता दरबार के बाद सीएम ने एडीएम को दिया निर्देश

शोभानंद मंडल का कहना है कि वे करीब आधा दर्जन बार जनता दरबार में अपनी शिकायत लेकर पहुंचे. इसके बाद 11 अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मुख्यमंत्री ने एडीएम अररिया को फोर्स और मजिस्ट्रेट के साथ उन्हें दखल दिलाने का निर्देश दिया था.

पीड़ित के अनुसार इसके बाद डीसीएलआर फारबिसगंज की ओर से स्थल जांच भी की गयी. जांच के दौरान सीओ और थानाध्यक्ष की मौजूदगी की बात उन्होंने कही है.

केवाला की जमीन पर जूट लगाने का आरोप

शोभानंद मंडल ने आरोप लगाया कि उनकी केवाला से खरीदी गयी जमीन पर जूट लगा दिया गया है. उनका कहना है कि राजस्व अभिलेख और जमीन से संबंधित दस्तावेज उनके पक्ष में होने के बावजूद उन्हें जमीन पर दखल नहीं मिल पा रहा है.

प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

दखल नहीं मिलने के बाद पीड़ित ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया है. उन्होंने राजस्व अभिलेखों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा नियमानुसार जमीन और पुश्तैनी घर पर दखल दिलाने की मांग की है.

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