अररिया में अब गोबर से चमकेगी किसानों की किस्मत! DM ने दिया प्राकृतिक खेती का मास्टरप्लान

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फोटो- अधिकारियों के साथ बैठक करते जिलाधिकारी | Prabhat Khabar Network

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अररिया जिले में रासायनिक उर्वरकों को कम कर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष पहल की गई है. जिलाधिकारी ने किसानों को गोबर से बीजामृत और जीवामृत बनाने की जानकारी देने का निर्देश दिया है ताकि उनकी उपज बढ़ सके.

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अररिया. जिले में रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन ने जागरूकता अभियान तेज करने की पहल की है. जिलाधिकारी विनोद दूहन ने अपने कार्यालय वेश्म में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन योजना की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को व्यापक स्तर पर अभियान चलाने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि प्राकृतिक और जैविक खेती के सफल मॉडलों को किसान चौपाल के माध्यम से अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाया जाए.

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10 क्लस्टरों में किसान कर रहे प्राकृतिक और जैविक खेती

समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले में किसानों द्वारा कुल 10 क्लस्टरों में प्राकृतिक और जैविक खेती की जा रही है. इनमें आठ क्लस्टर वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए और दो नये क्लस्टर वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए शामिल किए गए हैं.

डीएम ने इन क्लस्टरों में अपनायी जा रही प्राकृतिक खेती के सफल मॉडलों को जिले के अन्य किसानों के बीच प्रचारित करने का निर्देश दिया. अधिकारियों से कहा गया कि किसान चौपाल और अन्य जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से प्राकृतिक खेती के तौर-तरीकों की जानकारी किसानों तक पहुंचायी जाए.

प्राकृतिक उपज के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर जोर

बैठक में प्राकृतिक खेती से उत्पादित उपज की बिक्री के विकल्पों पर भी चर्चा की गयी. डीएम ने किसानों को उनकी प्राकृतिक उपज का बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में काम करने का निर्देश दिया.

इसके लिए किसानों की उपज को जीविका के ग्राम स्तर के नेटवर्क से जोड़कर बाजार उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर जोर दिया गया. प्रशासन का उद्देश्य प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के साथ किसानों को उनकी उपज के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराना भी है.

गोबर से बीजामृत और जीवामृत बनाने की दी जाएगी जानकारी

डीएम ने जिले की प्रत्येक पंचायत को प्राकृतिक खेती से जोड़ने की दिशा में किसानों को जागरूक करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि किसानों को घर पर उपलब्ध पालतू मवेशियों, विशेषकर गाय के गोबर आदि से प्राकृतिक बीजामृत और जीवामृत तैयार करने की जानकारी दी जाए.

किसानों को स्थानीय संसाधनों से प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले उत्पाद तैयार करने के तरीकों की जानकारी मिलने से रासायनिक उर्वरकों पर उनकी निर्भरता कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है.

पंचायत स्तर तक पहुंचाया जाएगा प्राकृतिक खेती का संदेश

डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्राकृतिक खेती से जुड़े सफल प्रयोगों और मॉडलों को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाया जाए. इसके लिए पंचायत स्तर पर जागरूकता गतिविधियों को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया.

अधिकारियों ने लिया योजना की प्रगति का जायजा

बैठक में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत जिले में चल रहे कार्यों और क्लस्टरों की प्रगति की समीक्षा की गयी. इस दौरान जिला कृषि पदाधिकारी सहित संबंधित विभागों के पदाधिकारी मौजूद रहे.

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