तेज हवा ने बढ़ायी ठंड, औसत तापमान 10 डिग्री सेल्सियस रहने से ठिठुरे लोग

By Prabhat Khabar Digital Desk
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अररिया : तेज हवा ने ठंड के ठिठुरन को बढ़ा दिया है. लगातर पड़ रही ठंड ने लोगों को परेशान कर दिया है. तापमान में गिरवाट के कारण लोग अब ठंड की ठिठुरन से कांपने लगे हैं. तीन दिनों में जिले का औसत तापमान 10 डिग्री सेल्सियस रहा है. ठंड के कारण सड़कों पर वाहनों की रफ्तार में भी ब्रेक लग गया है. बढ़ती ठंड को देखते हुए लोगों के द्वारा अलाव जलाये जाने की मांग भी की जा रही है. इधर मौसम विभाग की मानें तो मकर संक्रांति में भी ठंड की रफ्तार बरकार रहेगी.
हालांकि मकर संक्रांति को ले बाजार में तिल, गुड़ व तिलकुट का बाजार सज गया है. लेकिन भीषण ठंड के कारण लोग असमंजस में हैं कि इस बार मकर संक्रांति कैसे मनायेंगे. विद्वानों के अनुसार मकर संक्रांति के पर्व को खिचड़ी भी कहा जाता है. सूर्य के एक राशि से दूसरे राशि में प्रवेश करने को संक्रांति कहते हैं.
मकर संक्रांति के दिन सू्र्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है. इस दिन स्नान, दान, और भगवान सूर्यदेव की उपासना का विशेष महत्व है. मकर संक्रांति को कहीं-कहीं उत्तरायण भी कहा जाता है.
कड़ाके की ठंड से जनजीवन प्रभावित
कुर्साकांटा. प्रखंड क्षेत्र में बीते एक सप्ताह से तेज हवा के साथ कड़ाके की ठंड से आम जनजीवन प्रभावित है. लोग दिनभर घरों में दुबके रहने को विवश हैं. इस ठंड में सबसे ज्यादा परेशानी वृद्ध व बच्चों को हो रही है. हालांकि यह मौसम गेहूं की खेती के लिए लाभप्रद है. जबकि इस कड़ाके की ठंड में आम लोग अलाव व गर्म कपड़ों के सहारे ठंड से राहत पाने की जुगत में लगे रहे.
बता दें कि सरकारी स्तर पर अंचल कार्यालय की ओर से ठंड के शुरुआत में प्रखंड मुख्यालय के बाजार के दो-चार चौक-चौराहों व सार्वजनिक स्थल पर अलाव की व्यवस्था जरूर की गयी, लेकिन वह नाकाफी साबित हुआ. इस बाबत प्रखंड प्रमुख सुशील कुमार सिंह ने बताया कि सीओ कुर्साकांटा की लापरवाही व उदासीन कार्यशैली का नतीजा है कि कड़ाके की ठंड के बावजूद प्रखंड क्षेत्र में अलाव तक की व्यवस्था नहीं की जा सकी.
उन्होंने बताया कि पदाधिकारी संवेदनाहीन हो गये हैं. उन्होंने बताया कि सीओ कुर्साकांटा से मिलकर अलाव की व्यवस्था करायी जायेगी.
15 जनवरी को मनाया जायेगा मकर संक्रांति : ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस बार सूर्य मकर राशि में 14 जनवरी की रात 02 बज कर 07 मिनट में प्रवेश कर रहा है. इसलिए संक्रांति 15 जनवरी को मनाया जायेगा. मकर संक्रांति में अग्नि तत्व की शुरूआत होती है व कर्क संक्रांति में जल तत्व की.
इस समय सूर्य उत्तरायण होता है. इस समय किये जप व दान का फल अनंत गुणा होता है. मकर संक्रांति का पर्व जिस प्रकार से देश भर में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है, उसी प्रकार खान-पान में भी विवधता रहती है. इस दिन तिल का हर जगह किसी न किसी रूप में प्रयोग होता है. तिल स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है.
मकर संक्रांति कैसे मनायें : मकर संक्रांति के दिन सुबह स्नान का विधान है. इसके बाद सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. श्रीमदभागवद के एक अध्याय का पाठ या गीता का पाठ करें. नये अन्न, घी व कंबल का दान करें. भोजन में नये अन्न की खिचड़ी बनायें.
भोजन इश्वर को समर्पित कर प्रसाद के रूप में ग्रहण करें. सूर्यदेव को तिल के दाने डालकर जल अर्पित करें, स्टील या लोहे के पात्र में तिल भरकर अपने सामने रखकर मंत्र का जाप करें. किसी गरीब व्यक्ति को बर्तन समेत तिल का दान कर दें. यह शनि से जुड़ी हर पीड़ा का नाश करती है.
तिलकुट से सजा बाजार
फारबिसगंज. मकर संक्रांति नजदीक आते ही बाजारों में तिलकुट की खुशबू बढ़ जाती है. इन दिनों बाजारों में तिलकुट, रेवड़ी, आदि की बिक्री जोरों पर है. बाजार में तिलकुट ढाई सौ से तीन सौ रुपये किलो, खाजा डेढ़ सौ रुपये किलो बिक रहा है. फारबिसगंज, नरपतगंज व जोगबनी बाजार तिलकुट के व्यापार के लिए काफी बड़ा बाजार है. दुकानदारों की मानें तो इस बार तिलकुट की कीमत में उछाल आया है. तिलकुट के दामों में 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.
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