तालिबान से निपटने की चुनौती

Published at :21 Feb 2014 4:09 AM (IST)
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तालिबान से निपटने की चुनौती

।। गौरीशंकर राजहंस ।। पूर्व सांसद एवं पूर्व राजदूत नवाज शरीफ दुविधा में हैं. उनके फौजी सलाहकार उन्हें सलाह दे रहे हैं कि पूरी ताकत के साथ फौज तालिबानों का सफाया करने में जुट जाये. दूसरी ओर पाक मीडिया व बुद्विजीवियों ने कहा है कि सैन्य कार्रवाई हुई, तो तालिबान पूरे देश में आतंक मचा […]

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। गौरीशंकर राजहंस ।।

पूर्व सांसद एवं पूर्व राजदूत

नवाज शरीफ दुविधा में हैं. उनके फौजी सलाहकार उन्हें सलाह दे रहे हैं कि पूरी ताकत के साथ फौज तालिबानों का सफाया करने में जुट जाये. दूसरी ओर पाक मीडिया व बुद्विजीवियों ने कहा है कि सैन्य कार्रवाई हुई, तो तालिबान पूरे देश में आतंक मचा देंगे.

तालिबान ने पाकिस्तान में कहर मचा रखा है. कहावत है कि जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है, वह देर-सबेर खुद उस गड्ढे में गिरता है. पाकिस्तान के साथ भी वही हुआ है. पिछले कई वर्षो से पाक हुक्मरानों ने तालिबान की पीठ ठोकी, उन्हें ट्रेनिंग दी, भारत के खिलाफ आतंक फैलाने के लिए पैसे और हथियार दिये.

परंतु उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि एक दिन ये तालिबान उनके लिए ही जी का जंजाल बन जाएंगे. पिछले कई वर्षो से तालिबान ने पाक सरकार की नाक में दम कर रखा है. आये दिन वे पुलिस और फौज के जवानों की हत्या कर देते हैं. यह सिलसिला अभी रुका नहीं है.

तालिबान के बढ़ते आतंक के मद्देनजर पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को उनके सलाहकारों ने सलाह दी कि रोज-रोज के खून-खराबे से निजात पाने के लिए उचित यही होगा कि तालिबान के साथ शांति समझौता किया जाये. बहुत सोच-विचार कर नवाज तालिबान के साथ समझौता वार्ता के लिए तैयार हो गये. उन्होंने कुछ गैर राजनीतिक प्रमुख व्यक्तियों की एक समिति बनायी और उन्हें अधिकार दिया कि वे तालिबान के साथ समझौता वार्ता करें.

पाक में तालिबान को ‘तहरीके-तालिबान पाकिस्तान’ या ‘टीटीपी’ कहते हैं. टीटीपी के मुखिया ने पहले तो यह अड़ंगा लगाया कि कोई भी शांति वार्ता तभी हो सकती है जब पाक सरकार ऐलान करे कि पाकिस्तान में इसलामी सरिया कानून लागू होगा. इस पर नवाज ने कहा कि पाक सरकार संविधान से बंधी है और संविधान में प्रावधान है कि पाकिस्तान एक धर्मनिरपेक्ष देश होगा. बहुत समझाने-बुझाने पर टीटीपी अपनी जिद से हटी.

गत 29 जनवरी को टीटीपी और सरकारी प्रतिनिधियों के बीच शांति वार्ता शुरू हुई. शर्त यही थी कि जब तक शांति वार्ता चल रही है, टीटीपी देश में खून-खराबा नहीं करेगी, पर टीटीपी ने नरसंहार जारी रखा. इस बीच उसने 23 सैनिकों को अगवा कर मौत के घाट उतार दिया. हाल में प्रमुख व्यावसायिक शहर कराची में उसने गोला बारूद से भरे ट्रकों की मदद से 12 पुलिस अफसरों को उड़ा दिया. आतंकवाद विरोधी प्रमुख पुलिस अधिकारी चौधरी असलम को भी टीटीपी उग्रवादियों ने बम से उड़ा दिया. इससे पाक पुलिस में दहशत फैल गयी.

सूचना है कि कराची के एक तिहाई भाग में टीटीपी का नियंत्रण हो गया है और इस क्षेत्र में पाक पुलिस या सेना घुसने का साहस नहीं कर पा रही है. कराची में तालिबानों ने कहर ढा रखा है. पैसेवाले लोगों को, खास कर जो निर्माण उद्योग में लगे हैं, दिनदहाड़े अगवा कर लिया जाता है. उनसे तगड़ी रकम फिरौती के रूप में वसूली जाती है और जो फिरौती नहीं देते हैं, उनकी हत्या कर दी जाती है. दूसरे पैसेवालों का भी दिन के उजाले में ही अपहरण होता रहता है.

उनके घरों पर डकैतियां डाली जाती हैं और इस तरह जो भी पैसा नाजायज तरीके से वसूल होता है उसे ये तालिबान अपने भाई तालिबानों की मदद के लिए अफगानिस्तान से सटे क्षेत्र में भेज देते हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार जब से तालिबान के साथ शांति वार्ता शुरू हुई, तब से फौज और पुलिस के करीब 100 जवान मारे गये हैं. मारे गये निदरेष नागरिकों की तो गिनती ही नहीं है.

हाल में नवाज शरीफ, पूर्व सेनाध्यक्ष कयानी और विपक्ष के नेता इमरान खान के बीच एक बैठक हुई, जिसमें तालिबानों से निपटने पर विचार हुआ. इसमें पाकिस्तान के गृहमंत्री भी मौजूद थे. आम राय यह थी कि तालिबानों के खिलाफ सेना द्वारा बल प्रयोग हो.

परंतु इमरान खान ने इसका विरोध किया और कहा कि इससे मामला और बिगड़ेगा और ये पूरे पाकिस्तान में कहर बरपायेंगे. जवाब में पाकिस्तान के गृहमंत्री ने कहा कि पाक फौज मजबूत है. पहले भी कई क्षेत्रों में इसने आतंकवादियों का सफाया किया है. अत: इस बात से डरना नहीं चाहिए कि यदि तालिबानों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की गयी तो वे पूरे देश में कहर मचा देंगे.

उधर टीटीपी मुखिया मुहम्मद समी-उल हक ने कहा है पाक सरकार एक तरफ टीटीपी को शांति वार्ता में उलझाये रखना चाहती है और दूसरी तरफ तालिबानों का सफाया कर रही है. अब मामला इस तरह फंस गया है कि पाकिस्तान सरकार और टीटीपी दोनों एक-दूसरे पर दोषारोपण कर रहे हैं कि उनकी वजह से शांति वार्ता में खलल पहुंची है.

संक्षेप में, नवाज दुविधा में हैं. उनके फौजी सलाहकार उन्हें सलाह दे रहे हैं कि पूरी ताकत के साथ फौज तालिबानों का सफाया करने में जुट जाये. दूसरी ओर पाक मीडिया व बुद्विजीवियों ने कहा है कि यदि सरकार ने कराची में तालिबान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की, तो तालिबान पूरे देश में आतंक मचा देंगे और उस हालत में अफगानिस्तान में बैठे तालिबान भी उनका साथ देंगे. देखना यह है कि आगामी कुछ सप्ताह में नवाज शरीफ पाकिस्तान के आतंकवादियों से कैसे निपटते हैं.

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