फिजियोथेरैपी में शास्त्रों-महाकाव्यों की क्या जरूरत?

फिजियोथेरैपी में स्नातक के पाठ्यक्रम में भारतीय महाकाव्यों और शास्त्रों काे शामिल करने की तैयारी चल रही है. प्रधानमंत्री के योग गुरु एचआर नागेंद्र की अध्यक्षता में बने एक पैनल ने विश्वविद्यालय स्तर का पाठ्यक्रम तैयार किया है. इस पाठ्यक्रम को भारत सरकार के आयुष मंत्रालय की मंजूरी मिल गयी है. अब फिजियोथेरैपी में दाखिला […]
अब फिजियोथेरैपी में दाखिला लेने वालों को रामायण, महाभारत, भगवद्गीता, नारद भक्ति सूत्र इत्यादि पढ़ना पड़ेगा. मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इस बारे में यूजीसी को लिखा है, जिसमें यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि फिजियोथेरैपी में दाखिला लेनेवाले विद्यार्थी अगर योग में पारंगत हों, तो उन्हें प्राथमिकता दी जाये.
इधर, कहीं पढ़ने को मिला कि आगामी 17 जुलाई को नयी दिल्ली में आरएसएस के संयुक्त महासचिव कृष्ण गोपाल जी इस वर्ष लोक सेवा परीक्षा में सफल हुए अभ्यर्थियों को संबोधित करेंगे और उन्हें समझायेंगे कि अपने जीवन एवं कार्यों में भारतीय मूल्यों और राष्ट्रवादी विचारों को कैसे आत्मसात करना है. हिंदूवादी सोच एवं मानसिकता किस कदर देश में थोपी जा रही है, इसका यह प्रमाण है. सांस्कृतिक विविधताओं वाले इस देश में एक खास विचार को बलात लागू कराना, कहां तक उचित है?
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




