कालेधन का कुछ नहीं होना है

Updated at : 07 Apr 2016 5:44 AM (IST)
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कालेधन का कुछ नहीं होना है

पुष्परंजन ईयू-एशिया न्यूज के नयी दिल्ली संपादक झारखंड से भी छोटा 74,177.3 वर्ग किमी की परिधि में बसा ‘रिपब्लिक आॅफ पनामा’, सेंट्रल अमेरिका का एक ऐसा देश है, जहां पैसे की बारिश कब होगी, उसे बतानेवाले ‘मौसम विज्ञानी’ बैठते हैं. दुनिया की राजनीति में अचानक भूचाल पैदा कर देनेवाला पनामा उन 70 देशों में शामिल […]

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पुष्परंजन
ईयू-एशिया न्यूज के नयी दिल्ली संपादक
झारखंड से भी छोटा 74,177.3 वर्ग किमी की परिधि में बसा ‘रिपब्लिक आॅफ पनामा’, सेंट्रल अमेरिका का एक ऐसा देश है, जहां पैसे की बारिश कब होगी, उसे बतानेवाले ‘मौसम विज्ञानी’ बैठते हैं.
दुनिया की राजनीति में अचानक भूचाल पैदा कर देनेवाला पनामा उन 70 देशों में शामिल है, जिसे ‘टैक्स हेवेन’ कहा जाता है. दिमाग लगानेवालों ने यहां ‘आॅफ शोर कंपनियां’ खोल रखी हैं, जो दुनिया भर के धनपतियों, शासन प्रमुखों, सेलेब्रिटियों से लेकर ड्रग तस्करों और आतंकियों तक को सलाह देते हैं कि धन कहां सुरक्षित तरीके से लगाना है.
उत्तरी छोर पर कैरेबियन से दक्षिण में प्रशांत महासागर को जोड़नेवाली 77 किमी लंबी ‘पनामा कनाल’ समुद्री व्यापार का मुख्य मार्ग है. तकरीबन 40 लाख की आबादी वाले पनामा का मानव विकास सूचकांक में 59वां स्थान है, जबकि भारत का 130वां है. भारत सरकार कालेधन वालों को पकड़ने के लिए डबल टैक्सेशन एवॉयेडेंस एग्रीमेंट (डीटीएए) को भी एक कारगर हथियार मानती है. 88 देशों से भारत सरकार ने ‘डीटीएए’ समझौते किये हैं, मगर उनमें पनामा शामिल नहीं है.
पनामा सिटी में स्थापित ‘मोसाक फोंसेका’ की दुनियाभर में फैली 46 शाखाओं में कार्यरत 600 कर्मचारियों में से किस ‘विभीषण’ की वजह से यह सारा कुछ लीक हुआ, उसकी तलाश शिद्दत से हो रही है. पनामा विवि और लंदन स्कूल आॅफ इकोनाॅमिक्स से पढ़ चुके नामी-गिरामी उपन्यासकार रमन फोंसेका मोरा, दुनियाभर में कालाधन खपाने की पटकथा पिछले चालीस साल से लिख रहे थे. उनके उपन्यासों के पाठक हैरत में हैं. फोंसेका पनामा के राष्ट्रपति युआन कार्लोस वरेला के प्रमुख सलाहकार भी रहे हैं.
राष्ट्रपति वरेला कैसे गले में विषधर को बांधे रहे, यह भी दिलचस्प है. फोंसेका ‘पनामेनिस्ता पार्टी’ के सदस्य भी हैं. फोंसेका के कारण इस पार्टी की इज्जत दांव पर लग गयी है.
दिलचस्प है कि कालेधन के खुलासे मेें कहीं-न-कहीं जर्मन कनेक्शन काम करता रहा है. लिश्टेंसटाइन व स्विस बैंकों में कालेधन के जो डाटा चोरी हुए थे, उसके जर्मन संपर्कों से दुनिया वाकिफ है.
फोंसेका को लाॅ फर्म स्थापित करने में बावेरिया में जन्मे जर्मन मूल के युरगेन मोसाक का साथ मिला. मोसाक के पिता हिटलर की खुफिया ‘वाफेन-एसएस’ में जासूस रह चुके थे. पनामा में मोसाक के पिता को बसाने की वजह क्यूबा और दक्षिण अमेरिकी देशों की आर्थिक-राजनीतिक गतिविधियों की सूचनाएं सीआइए को देना था. पुतिन जिस तरह लपेटे गये हैं, संभव है सीआइए का कोई भेदिया इसमें शामिल हो.
इस पूरे प्रकरण को लीड देनेवाले जर्मन अखबार ‘ज्यूडडाॅयच त्साइटूंग’ ने मंगलवार को खुलासा किया कि जर्मनी के 28 बैंक, लाॅ फर्म ‘मोसाक फोंसेका’ को अपनी सेवाएं दे रहे थे. ‘ज्यूडडाॅयच त्साइटूंग’ ने दो लाख 14 हजार आॅफ शोर कंपनियों का भंडाफोड़ ‘आइसीआइजे’ से जुड़े 109 मीडिया संगठनों की साझेदारी से किया है. ‘ज्यूडडाॅयच त्साइटूंग’ के अनुसार, ‘अकेले डाॅयचे बैंक ने 400 से अधिक आॅफ शोर कंपनियां स्थापित करने में ‘मोसाक फोंसेका’ को मदद की थी.’ डाॅयचे बैंक 1980 से भारत में है. भारत सरकार द्वारा गठित ‘मल्टी एजेंसी जांच दल’ को डाॅयचे बैंक समेत दूसरे विदेशी बैंक पनामा लीक के मामले में सूचनाएं देने में कितना सहयोग करते हैं, यह इस देश के आम नागरिक के लिए जिज्ञासा का विषय रहेगा.
पनामा खुलासे ने दुनियाभर की 140 राजनीतिक हस्तियों की नींद हराम कर रखी है, जिनमें 72 पूर्व और वर्तमान शासनाध्यक्ष हैं. सेलेब्रिटी और राजनेताओं की ओर से सफाई देने का दौर जारी है.
पनामा लीक की पहली बलि चढ़े हैं, आइसलैंड के प्रधानमंत्री सिगमुंडर डेविड. डेविड इस्तीफा नहीं देते, तो आइसलैंड की सरकार ही गिर जाती. रूसी राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन सिर्फ अपने एक करीबी के कारण कीचड़ से सन गये हैं. उसी तरह ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन अपने पिता के अकाउंट की वजह से उलझ गये हैं. चीन के राष्ट्रपति शी, सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद, पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ इस काजल कोठरी से बेदाग निकल पाते हैं, कहना मुश्किल है.
यदि यह साबित हो भी जाता है कि आॅफ शोर कंपनियों के जरिये कालेधन खपाये गये, तो भी कुछ खास नहीं होना है. उदाहरण के लिए स्विस बैंक ‘यूबीएस’ ने 52 हजार अमेरिकियों के कालेधन को सफेद करने के लिए 78 अरब डाॅलर देना स्वीकार कर लिया था. इस कार्रवाई को ‘रूबिक डील’ कहा गया है. ऐसी सुविधाएं भारत में भी शुरू हुई हैं. पकड़े गये तो जुर्माना भरिये और कालेधन को सफेद कीजिए!
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