राज्य का कोई धर्म नहीं होगा
Updated at : 04 Dec 2015 12:07 AM (IST)
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नासिरुद्दीन स्वतंत्र पत्रकार शब्द, महज चंद अक्षर नहीं होते. वे विचार होते हैं. वे छवि बनाते हैं. छवि गढ़ते हैं. इसलिए ये राजनीति भी करते हैं. ताजा नमूना ‘सेक्यूलर’ या ‘सेक्यूलरिज्म’ शब्द का है. संसद के मौजूदा सत्र में बाबा साहेब आंबेडकर को याद करने के दौरान यह शब्द फिर चर्चा में आ गया है. […]
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नासिरुद्दीन
स्वतंत्र पत्रकार
शब्द, महज चंद अक्षर नहीं होते. वे विचार होते हैं. वे छवि बनाते हैं. छवि गढ़ते हैं. इसलिए ये राजनीति भी करते हैं. ताजा नमूना ‘सेक्यूलर’ या ‘सेक्यूलरिज्म’ शब्द का है. संसद के मौजूदा सत्र में बाबा साहेब आंबेडकर को याद करने के दौरान यह शब्द फिर चर्चा में आ गया है. आजादी के तीसरे दशक में जब इसे भारत के संविधान में शामिल किया गया होगा, तब जाहिर है, इस शब्द के इतिहास से लोग वाकिफ होंगे. हालांकि, पिछले दो दशकों से इस शब्द के इर्द-गिर्द एक खास तरह की राजनीति खड़ी करने की बदस्तूर कोशिश जारी है.
मगर, जो सबसे खतरनाक बात हो रही है, वह इस शब्द का मजाक उड़ाना है. इस पर तंज कसना कि यह शब्द अपनी अहमियत खो दे और अब इसे बोलते हुए भी डर या हिचक होने लगे.
सबसे पहले ऐसे सारे लोगों, जो धार्मिक भेदभाव और गैरबराबरी को गलत मानते हैं, को ‘छद्म’ कहा जाने लगा. उनके ख्याल को ‘छद्म धर्मनिरपेक्षता’ कहा गया. देखते-देखते, राजनीति में यह एक मजबूत आवाज बन गयी. इसके साथ ही दो और राजनीतिक बहस चलती रही. मूल संविधान में सेक्यूलरिज्म क्यों नहीं था? और सेक्यूलरिज्म, हिंदी में धर्मनिरपेक्षता नहीं, बल्कि पंथनिरपेक्षता है.
आजादी के बाद जो लोग मुल्क की तामीर में लगे थे, वे भारत का संविधान का बना रहे थे, पाकिस्तान का नहीं. पाकिस्तान की तामीर मजहब के नाम पर हुई थी. अलग-अलग ख्यालों की हमारी सतरंगी लीडरशिप भी यह जान रही थी कि वे हर तरह के भेदभाव से कोसों दूर, बराबरी वाला मुल्क बनाना चाह रहे.
उस वक्त तो शायद हमारे नेताओं के ख्वाबों में भी नहीं होगा कि यह मुल्क कभी ऐसे सेक्यूलर मूल्यों के खिलाफ जायेगा. इसलिए यह कहना कि चूंकि मूल संविधान में सेक्यूलरिज्म शब्द नहीं था, इसलिए अब क्यों, भारत के मूल्यों से अलग राह हमवार करने की कोशिश है.
ठीक इसी तरह धर्मनिरपेक्षता बनाम पंथनिरपेक्षता बहस भी है. कुछ लोगों को कहना है कि सेक्यूलरिज्म, धर्मनिरपेक्षता नहीं पंथनिरपेक्षता की बात करता है. हालांकि, वे पंथनिरपेक्षता के दर्शन की व्याख्या नहीं करते, लेकिन वे इस शब्द के जरिये बहुत कुछ करना और कहना चाहते हैं. वहीं कुछ लोग इसे सर्वधर्म समभाव भी मानते हैं.
इसी से जुड़ा एक और शब्द इन दिनों सोशल मीडिया में खूब चल रहा है- सिकूलर/सिक-उलर.यह अंगरेजी का ‘सिक’ है, जिसका हिंदी में अर्थ है- बीमार. यानी जो ‘सेक्यूलर’ ख्याल के हैं, वे बीमार ख्याल के हैं. ऐसे लोग जो गैरबराबरी की बात करते हैं, देश को धार्मिक बुनियाद पर बांटने के खिलाफ हैं, उन्हें इस शब्द से नवाजा जा रहा है.
तो आखिर सेक्यूलरिज्म है क्या? चाहे कोई इसे कोई भी नाम दे. संविधान की मूल भावना के मुताबिक, शुरू से इसका अर्थ मोटा-मोटी यही निकलता है कि राज्य का कोई धर्म नहीं होता है.
राज्य और धर्म दो अलग-अलग चीजें हैं. दोनों का काम अलग है. राज्य, धर्म के आधार पर अपने नागरिकों के साथ भेदभाव नहीं कर सकता. वह किसी भी सूरत में भेदभाव बर्दाश्त नहीं करेगा. इसलिए हिंदी में इसे ‘धर्मनिरपेक्षता’ नाम दिया गया है. यानी राज्य धर्मनिरपेक्ष होगा. यही भारत है.
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