न्याय में बाधक है वकीलों की मनमानी

Published at :12 Jun 2015 5:12 AM (IST)
विज्ञापन
न्याय में बाधक है वकीलों की मनमानी

कोलकाता उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश वहां के बार एसोसिएशन के एक फैसले से क्षुब्ध हैं. खबर यह भी है कि वे अपने गृहनगर बंगलुरु चली गयी हैं. उच्च न्यायालय के वकील कह रहे हैं कि भारी उमस और गरमी है, सो हम काम से कुछ दिन की छुट्टी चाहते हैं. बार एसोसिएशन ने मंगलवार […]

विज्ञापन
कोलकाता उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश वहां के बार एसोसिएशन के एक फैसले से क्षुब्ध हैं. खबर यह भी है कि वे अपने गृहनगर बंगलुरु चली गयी हैं. उच्च न्यायालय के वकील कह रहे हैं कि भारी उमस और गरमी है, सो हम काम से कुछ दिन की छुट्टी चाहते हैं. बार एसोसिएशन ने मंगलवार को घोषणा कर दी कि अगले तीन दिनों तक वकील काम से अनुपस्थित रहेंगे.
मुख्य न्यायाधीश का यह सवाल एकदम ठीक है कि वकीलों की अनुपस्थिति में याचिकाकर्ताओं की फरियाद पर सुनवाई कैसे होगी? काश, वकीलों को भी ऐसा ही लगता और उन्हें अपने पेशे के स्वभाव और मांग का ध्यान होता! कुछ सेवाओं के स्वभाव से ही अनिवार्यता लगी-बंधी होती है. सीमा पर तैनात सैनिक, प्रतिक्षण करवट लेती घटनाओं की रिपोर्टिग करता मीडियाकर्मी या फिर ऑपरेशन थियेटर के सर्जन और नर्स आदि ऐसी ही सेवाओं से जुड़े हैं.
कहा जा सकता है कि वकालत का पेशा वकीलों से वैसी तात्कालिकता की मांग नहीं करता, जैसा कि किसी सैनिक या फिर सर्जन का पेशा. आखिर अदालतें अस्पतालों या फिर मीडिया हाउसों की तरह चौबीसों घंटे खुली नहीं रहतीं और बड़ी अदालतों में तो स्कूलों की तरह जाड़े और गरमी की छुट्टियां भी होती हैं.
बहरहाल, अगर न्याय में विलंब का अर्थ न्याय से इनकार है, तो फिर माना जाना चाहिए कि तात्कालिकता इस पेशे का भी अनिवार्य हिस्सा है. इस नैतिकता का सम्मान करनेवाला शायद ही कोई वकील तेज गरमी या फिर आंधी-पानी जैसी स्थितियों की ओट लेकर अपनी सेवा देने से मना करेगा. जिस देश में सर्वोच्च न्यायालय में तकरीबन 65 हजार और प्रत्येक उच्च न्यायालय में औसतन तकरीबन पौने दो लाख मुकदमे लंबित हों, किसी बार एसोसिएशन का गरमी का बहाना करके छुट्टी लंबी करना संविधान प्रदत्त इंसाफ हासिल करने के अधिकार पर कुठाराघात माना जायेगा.
ठीक है कि निचली अदालतों में लंबित तकरीबन ढाई करोड़ और बड़ी अदालतों में रुके पड़े लगभग 45 लाख मुकदमों का निबटारा सिर्फ वकीलों की मुस्तैदी से नहीं हो जायेगा, लेकिन इसका यह अर्थ कदापि नहीं है कि काम को जी का जंजाल या बोझ मान कर कर्तव्यनिष्ठा के निर्वाह से ही इनकार कर दिया जाये.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola