मिसकॉल से काट दी चीन की नाक

Published at :07 Apr 2015 1:40 AM (IST)
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मिसकॉल से काट दी चीन की नाक

जावेद इस्लाम प्रभात खबर, रांची हमारे रहीम चाचा व श्रीराम चाचा को अब यकीन होने लगा है कि इंडिया सचमुच दुनिया का सबसे बड़ा, सबसे उन्नत व सबसे महान देश बन कर रहेगा. चाचा द्वय इस बात पर शर्मिदा होना चाहते हैं कि वे खाली-पीली मोदीजी का मजाक क्यों उड़ाते रहे. उन्होंने अपने नौ-दस महीने […]

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जावेद इस्लाम

प्रभात खबर, रांची

हमारे रहीम चाचा व श्रीराम चाचा को अब यकीन होने लगा है कि इंडिया सचमुच दुनिया का सबसे बड़ा, सबसे उन्नत व सबसे महान देश बन कर रहेगा. चाचा द्वय इस बात पर शर्मिदा होना चाहते हैं कि वे खाली-पीली मोदीजी का मजाक क्यों उड़ाते रहे. उन्होंने अपने नौ-दस महीने के छोटे से कार्यकाल में साबित कर दिया कि वे फेकू नहीं, बल्कि ‘मेकू’ हैं़ मेकू यानी कि ‘मेकिंग इंडिया’ के मेकर.

भाजपा को उन्होंने दुनिया या कहें कि ब्रrांड की सबसे बड़ी पार्टी ‘मेक’ करके छोड़ा कि नहीं? अब तक चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के लोग सबसे बड़ी पार्टी होनी की ऊंची नाक लिये फिरते थे. हमारे प्रधान सेवक ने केवल ‘मिसकॉल‘ से उनकी नाक काट दी. सच कहें तो मोदी जी ने चीन की नाक काटने का श्रीगणोश कर दिया है़ चीनी लोग दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने पर बहुत इतराते हैं़ उनके इतराने से महाबली अमेरिका के सीने पर एनाकोंडा सांप लोटता रहता है़ अब हमारे प्रधान सेवक चीन की विकास दर को जल्द ही पीछे ठेल देंगे. अमेरिका का हाथ उनकी पीठ पर है ही. जीडीपी के आकलन का प्रचलित फामरूला बदल कर उन्होने इंडिया की विकास दर का घोड़ा सरपट दौड़ना शुरू कर दिया है.

अर्थव्यवस्था दौड़े या न दौड़े, इसके हसीन आंकडे जरूर दौड़ते रहने चाहिए. रही चीन की आबादी की बात, तो इस मोर्चे पर इंडिया उसको मात दे ही देगा. विश्व की सर्वाधिक आबादी वाला देश बनाने की मानसिक व जैविक तैयारी जो हो रही है. हमारे आज के ‘ऋषि-मुनि’ चार से लेकर दस तक बच्चे पैदा करने का ‘धर्मादेश’ यूं ही नहीं दे रहे हैं. कौन होगा जो इस धर्मादेश की अवमानना कर धर्म विरोधी-राष्ट्र विरोधी हतकर्म करने की जुर्रत करेगा. इस धर्मपरायण देश की बहुसंख्य आबादी इन ‘ऋषि-मुनियों’ की ही सुनेगी, न कि धर्म व राष्ट्र विरोधी सेकुलरवादियों की. आबादी के मामले में तो चीन से बाजी मार लेंगे, मगर क्षेत्रफल के मामले में? यह एक समस्या है. मगर देखा जाये तो इतनी बड़ी भी समस्या नहीं है.

नेपाल श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, कंबोडिया जैसे कितने मुल्कों पर अतीत में हमने सांस्कृतिक विजय पायी थी. अपने प्रधान सेवक जी को देश दो-तीन कार्यकाल का मौका और दे दे, तो इन मुल्कों को भावी हिंदू-राष्ट्र के अधीन तो लाया ही जा सकता है. फिर चीन कहां रहेगा मुकाबले में? निश्चित तौर पर यह अधूरा ऐतिहासिक कार्यभार हमारे प्रधान सेवक ही पूरा कर सकते हैं़ क्योंकि उनके जोड़ का 56 इंच के सीनेवाला एक भी लीडर अपने देश में तो क्या, दुनिया में नहीं है़ उन्हे यह सर्टीफिकेट अमेरिका के महान नेता जॉन मैक्कन भी दे चुके हैं. इतिहास में वल्लभभाई पटेल ने राष्ट्रीय एकीकरण का काम किया था, भविष्य में प्रधान सेवक नरेंद्रभाई ‘महाराष्ट्रीय एकीकरण’ का काम पूरा करेंगे.

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