उम्मीदों भरा नव वर्ष मंगलमय हो

Published at :01 Jan 2015 5:37 AM (IST)
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उम्मीदों भरा नव वर्ष मंगलमय हो

कैलेंडर बदल गया है. नयी उम्मीदों को साथ लिये एक नया साल सामने है. यह वक्त है आगे बढ़ने के लिए कुछ नया सोचने का. बढ़ना और बढ़ते जाना ब्रह्नांड का मूल स्वभाव है. लोगों की कामनाएं जितनी बढ़ती हैं, संसार भी उतना ही बढ़ता है. इसलिए तो भारतीय परंपरा में कल्पवृक्ष की कल्पना है! […]

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कैलेंडर बदल गया है. नयी उम्मीदों को साथ लिये एक नया साल सामने है. यह वक्त है आगे बढ़ने के लिए कुछ नया सोचने का. बढ़ना और बढ़ते जाना ब्रह्नांड का मूल स्वभाव है. लोगों की कामनाएं जितनी बढ़ती हैं, संसार भी उतना ही बढ़ता है. इसलिए तो भारतीय परंपरा में कल्पवृक्ष की कल्पना है! एक ऐसा वृक्ष, जिससे जो मांगो, मिलेगा! लोग जब सरकार चुनने के लिए वोट देते हैं, तो असल में अपनी कामनाओं के बीज बो रहे होते हैं.

वोट देकर वे सरकार के रूप में अपने लिए एक कल्पवृक्ष ही तो चुनना चाहते हैं! बीता साल केंद्र और कई राज्यों में नयी सरकार चुनने का साल रहा. जनता ने सुख-समृद्धि की कामनाओं को साकार करने के लिए अपने मताधिकार का प्रयोग किया. जाहिर है, यह नया साल नये संकल्पों और जनता की आकांक्षाओं को फलीभूत होते देखने का साल होगा. इसलिए नये साल के चढ़ते सूरज के साथ सोचें कि इसका हर दिन अवाम के हर तबके लिए न्यायसंगत बढ़वार का साल हो. अपने देश में इस बढ़वार के कई मोर्चे हैं. इसका एक मोर्चा सबके लिए सस्ता एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा का है.

यह एक कड़वी हकीकत है कि देश में करीब पौने चार करोड़ लोग हर साल सिर्फ इसलिए गरीबी रेखा से नीचे चले जाते हैं, क्योंकि उपचार की महंगी निजी सुविधाओं के लिए उन्हें भारी-भरकम रकम चुकानी पड़ती है. ऐसे में केंद्र सरकार के नेशनल हेल्थ एश्योरेंस मिशन से अवाम को बहुत उम्मीदें हैं. योजना आयोग की विशेषज्ञ समिति ने इस मिशन को साकार करने के लिए एक ब्लूप्रिंट 2011 में ही सौंप दिया था. उम्मीद की जानी चाहिए कि नयी सरकार इस मिशन को कार्यरूप में सामने लायेगी. उधर, देश के ग्रामीण अंचल के गरीब केंद्र के ग्रामीण विकास मंत्रलय की ओर बड़ी उम्मीद से देख रहे हैं. मनरेगा का कार्यान्वयन भ्रष्टाचार से ग्रस्त रहा है, फिर भी शोध बताते हैं कि जिन इलाकों में सरकार ने इस योजना के कार्यान्वयन एवं निगरानी के लिए पुख्ता तंत्र विकसित किया है, वहां मनरेगा ग्रामीण गरीबों की अभावग्रस्त जिंदगी में आशा की नयी किरण जगा रहा है. ग्रामीण विकास मंत्रलय ने संकेत दिया है कि वह इस योजना की कमियों को दूर कर इसे नये सिरे से लागू करना चाहता है. उम्मीद की जानी चाहिए कि मनरेगा के मोर्चे पर कोई भी फैसला अंतिम जन के हित को ध्यान में रख कर लिया जायेगा. बीते आठ वर्षो में देश की अर्थव्यवस्था का आकार दोगुना हो चुका है.

1991 में शुरू हुए आर्थिक सुधारों के बाद से अर्थव्यवस्था में सात गुना वृद्धि हुई है और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का आकलन है कि इसका आकार 2 ट्रिलियन डॉलर का होनेवाला है. लेकिन, इस वृद्धि के अनुरूप प्रत्येक जन की औसत आय में वृद्धि का सवाल बना हुआ है. उम्मीद की जानी चाहिए कि नये साल में सरकार आर्थिक असमानता को कम करने की दिशा में कुछ कारगर कदम उठायेगी. अभी हमारा देश यंगिस्तान कहलाता है. यह अच्छी बात है कि हमारे युवा अपने हौसले व हुनर के दम पर आर्थिक वृद्धि के सपनों को साकार करने में जुटे हैं. लेकिन, हमें आबादी के संतुलित बढ़वार के बारे में भी सोचना है. जनगणना के नये आंकड़े उत्साह जगाते हैं.

देश के अधिकतर हिस्सों में जनन-दर 2.1 के आसपास है. तकरीबन यही दर वांछित भी है. परंतु, हिंदी पट्टी के राज्य आबादी की संतुलित बढ़वार के लिए वांछित जनन-दर हासिल करने में अभी काफी पीछे हैं. उम्मीद की जानी चाहिए कि इस मोर्चे पर केंद्र सरकार हिंदी पट्टी के राज्यों के लिए कुछ विशेष सहायता पर विचार करेगी. हमारे पूर्व प्रधानमंत्री को लगता था कि कुपोषण एक राष्ट्रीय शर्म का विषय है. अब भारत सरकार और यूनिसेफ की संयुक्त नयी रिपोर्ट बताती है कि देश में कुपोषित बच्चों की संख्या में 2006 के मुकाबले 15 प्रतिशत की कमी आयी है, तो भी इस मामले भारत दुनिया के शीर्ष के देशों में बना हुआ है. इसलिए उम्मीद करनी चाहिए कि हमारे नये प्रधानमंत्री देश को इस राष्ट्रीय कलंक से मुक्त करेंगे. इस समय केंद्र में संकल्पों से भरी बहुमत की सरकार है. भाजपा आज जितने प्रदेशों में सत्ता में आ चुकी है, उनकी देश के सकल घरेलू उत्पाद में हिस्सेदारी आधे से ज्यादा है.

इसलिए उम्मीद की जानी चाहिए कि केंद्र और राज्यों की सत्ता के बीच बढ़े वैचारिक तालमेल के साथ देश का संघीय ढांचा और मजबूत होगा. साथ ही संसाधनों में उन राज्यों को भी न्यायसंगत धन हासिल होगा, जो भाजपा शासित नहीं हैं. कामनाओं का कोई छोर नहीं होता और सारी कामनाएं एक साल के भीतर पूरी नहीं हो सकतीं. फिर भी नये साल में यह उम्मीद तो की ही जा सकती है कि भारत ‘डिजिटल इंडिया’ बनने की राह पर कुछ और कदम तेजी से बढ़ायेगा.

देश इस साल भी मंगल मिशन का तरह का कोई करिश्मा अपने नाम दर्ज करायेगा. और तरक्की की कामना के बीच नये साल में यह उम्मीद भी हर हाल में पूरी होनी चाहिए कि देश और समाज में शांति व सौहार्द का ताना-बाना न केवल बचा रहेगा, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक विविधता में एकता को बढ़ाने की कारगर कोशिशें भी होंगी. अंत में सभी पाठकों एवं शुभेच्छुओं के लिए यह कामना कि आपके लिए ‘नये वर्ष में, प्रेम हर्ष में, जीवन जय हो. हर दिन, पल छिन, मंगलमय हो.’

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