कुछ नया हो जाये
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 23 Apr 2019 8:34 AM
विज्ञापन
कविता विकास लेखिका kavitavikas28@gmail.com नया सत्र, नयी शुरुआत. वार्षिक परीक्षाओं के बाद बच्चे एक लंबा समय घर पर बिताते हैं. इसलिए नये सत्र में कुछ बच्चों में होम सिकनेस भी दिखायी देने लगता है, जबकि कुछ नये जोश, नयी उमंग से भर जाते हैं. कुछ ऐसा ही मिश्रित स्वभाव अनेक शिक्षकों में भी दिखायी देता […]
विज्ञापन
कविता विकास
लेखिका
kavitavikas28@gmail.com
नया सत्र, नयी शुरुआत. वार्षिक परीक्षाओं के बाद बच्चे एक लंबा समय घर पर बिताते हैं. इसलिए नये सत्र में कुछ बच्चों में होम सिकनेस भी दिखायी देने लगता है, जबकि कुछ नये जोश, नयी उमंग से भर जाते हैं. कुछ ऐसा ही मिश्रित स्वभाव अनेक शिक्षकों में भी दिखायी देता है.
‘नया’ शब्द अपने आप में ही परिपूर्ण है. बहुत ही अर्थवान और सकारात्मक. यह अक्सर पुरानी यादों से मुक्ति का प्रतीक होता है.
इसमें ताजगी और स्फूर्ति का समावेश होता है. नयी शुरुआत के साथ मान लिया जाता है कि वह गत वर्ष से बेहतर होगा. लोग विश्वास भी कर लेते हैं कि जो छूट गया सो छूट गया- ‘जो बीत गयी सो बात गयी.’ जो नया पकड़ने जा रहे हैं, उसमें नयी बात होगी. यही विश्वास तो परिवर्तन का आधार है.
महज संयोग कहें कि इसी अप्रैल माह से हिंदू नव संवत्सर साल एवं चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है. वसंत का आगमन हो चुका होता है. पीली-मटमैली पत्तियों का दौर खत्म हो चुका होता है. प्रकृति में भी नवीनता होती है. सूर्य भी नवीनतम ऊष्मा लिए हुए प्रखर किरणें बिखेरता रहता है. चारों ओर रंग-बिरंगे फूल और हरी-धानी पत्तियों से सजे पेड़ नयनाभिराम दृश्य उत्पन्न करते हैं. प्रकृति की यह अक्षय ऊर्जा हममें नयी शक्ति का संचार करती है. सारे अवसाद, सारी थकान मानो उड़नछू हो जाती है. नवीनता का उद्देश्य भी तो यही है.
आजकल पढ़ाई का बोझ बढ़ गया है. पहले एक प्रार्थना सभा होती थी, जिससे दिन की शुरुआत होती थी, अब वह भी कम होती जा रही है. खेल की कक्षाएं सीमित हो गयीं हैं.
इसलिए क्लासरूम को रोचक बनाने की अतिरिक्त जिम्मेवारी शिक्षकों पर आ गयी है. जो नये सत्र के स्वागत में उदासीनता दिखलाते हैं, वे पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं.
बनी-बनाई लकीर पर चलना आसान है. नयी लकीर खींचने में सोच, शक्ति और चुनौती का मिश्रित प्रभाव होता है, जिसे कोई साहसी ही कर सकता है. हर बार बदलाव आपकी सोच के मुताबिक सफलता नहीं भी लाता है. धन और शक्ति का व्यय मनुष्य को तोड़ देता है. सकारात्मक सोच और चुनौतियों से खेलनेवाला व्यक्ति ही नवीनता अपनाने में आगे होता है.
माता-पिता और शिक्षकों की असली जिम्मेदारी यहीं आती है, जब उन्हें बतलाना होता है कि समय सदा एक-सा नहीं रहता. पतझड़ के बाद वसंत आता ही है. रात के बाद दिन और दुख के बाद सुख स्वाभाविक है. नये माहौल में सामंजस्य बिठाने में समस्याएं आती हैं, पर एक बार मन रम गया, तो फिर कोई दिक्कत नहीं. क्योंकि डर क्षणिक होता है.
आजकल एक नया ट्रेंड दिखलायी दे रहा है- स्मार्ट वर्ल्ड, स्मार्ट क्लास, स्मार्ट पर्सनालिटी का ट्रेंड. कहा जाता है कि बच्चे इन सबसे खुश होते हैं. लेकिन आप अपने बच्चों को बतायें कि जितना अंदर से वे खुश रहेंगे, बाहर से भी उन्हें खुशियां मिलेंगी. जहां मन को सुकून मिले, वहीं खुशियों का स्रोत होता है. तो आइये, इस नये सत्र का स्वागत ऐसे करें कि कुछ नया हो जाये. खूब उमंग, खूब उल्लास के साथ जीवन आगे बढ़े.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Tags
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन










