अधिकार से वंचित हो रहे पिछड़े समाज के बच्चे
Author Prabhat khabar digital desk
Updated:
विज्ञापन

देश को आजाद हुए सात दशक बीत चुके हैं, पर अब भी देश के विभिन्न हिस्सों में दलित, आदिवासी वकिन्नर समाज को उनके अधिकार से वंचित रखा गया है. उनके बच्चे जाति, धर्म, लिंग अथवा नस्ल के आधार पर भेदभाव का शिकार होते हैं. कभी-कभी ऐसी भी खबरें आती हैं कि शिक्षकों द्वारा उन्हें अंतिम […]
विज्ञापन
देश को आजाद हुए सात दशक बीत चुके हैं, पर अब भी देश के विभिन्न हिस्सों में दलित, आदिवासी वकिन्नर समाज को उनके अधिकार से वंचित रखा गया है. उनके बच्चे जाति, धर्म, लिंग अथवा नस्ल के आधार पर भेदभाव का शिकार होते हैं.
कभी-कभी ऐसी भी खबरें आती हैं कि शिक्षकों द्वारा उन्हें अंतिम पंक्ति में बैठाया गया. पिछड़े समाज के बच्चे भी अपने अधिकार से वंचित हैं, उन्हें भी स्कूल में तरह-तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
जबकि हमारा संविधान भेदभाव हीनता के खिलाफ है. देश को आजाद हुए इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी दलित, आदिवासी, मीणा समाज के बच्चों को नेतृत्व क्षमता से वंचित रखा गया है. जबकि हमारा संविधान समानता व समान शिक्षा की बात करता है.
नितेश कुमार सिन्हा, जानपुल चौक (मोतिहारी)
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन










