राज्य के छात्रों ने दिखाया अपना दम

Updated at : 14 Jun 2014 5:36 AM (IST)
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राज्य के छात्रों ने दिखाया अपना दम

शुक्रवार को शिक्षा के क्षेत्र में झारखंड के बच्चों ने सफलता के झंडे गाड़ दिये. संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा 2013 में राज्य के एक दर्जन से अधिक अभ्यर्थियों ने अच्छी रैंक से सफलता अजिर्त करके पूरे राज्य का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया. राज्य के पिछड़े जिले पलामू के रचित […]

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शुक्रवार को शिक्षा के क्षेत्र में झारखंड के बच्चों ने सफलता के झंडे गाड़ दिये. संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा 2013 में राज्य के एक दर्जन से अधिक अभ्यर्थियों ने अच्छी रैंक से सफलता अजिर्त करके पूरे राज्य का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया. राज्य के पिछड़े जिले पलामू के रचित राज को पूरे देश में तीसरा स्थान मिला है, तो देवघर के साकेत मालवीय (20), राहुल कुमार (26), रांची की नैंसी सहाय (36) और वरुण रंजन (38) और शशांक शुभंकर (60) ने भी कमाल कर दिया.

यही नहीं, रांची, देवघर, गिरिडीह, चतरा और पूर्वी सिंहभूम के दूर-दराज इलाकों के एक दर्जन से अधिक बच्चों ने भी सफलता अजिर्त की है. झारखंड ने खेल की दुनिया में एक से बढ़ कर एक सितारे दिये. हॉकी में तो झारखंड के किसी न किसी खिलाड़ी ने हमेशा देश का प्रतिनिधित्व किया. जूनियर हॉकी में बिगन सोय आज बड़ा नाम है. क्रिकेट में टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धौनी, शाहबाज नदीम और वरुण एरोन जैसे सितारे देश का मान बढ़ा रहे हैं. तीरंदाजी में दीपिका कुमारी समेत कई लड़के-लड़कियों की विश्व स्तरीय पहचान पहले ही बन चुकी है. अब झारखंड के बच्चे खेल के साथ पढ़ाई में भी उसी तरह सफलता पा रहे हैं.

इससे पूरे झारखंड के बच्चों में मन लगा कर पढ़ाई करने और प्रतियोगी परीक्षाओं में किस्मत आजमाने की स्वस्थ होड़ बढ़ेगी. इससे पहले यहां के एक-दो बच्चे ही यूपीएससी की परीक्षा में सफल होते थे. लेकिन इस बार तो कमाल हो गया. एक के बाद एक नया नाम जुड़ता ही जा रहा है. इस सबके बीच एक दुखद पहलू भी है. सफल होनेवाले झारखंड के अधिकतर बच्चों की शुरुआती पढ़ाई तो झारखंड में हुई, लेकिन आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें दिल्ली जैसे महानगरों का रुख करना पड़ा था. कारण, राज्य में उच्चस्तरीय पढ़ाई के लिए न माहौल है, न ही पर्याप्त संख्या में अच्छे शैक्षिक संस्थान. अपने राज्य में अच्छे शिक्षण संस्थान स्थापित किये जायें तो सफलता का आंकड़ा और बेहतर होगा. सफल हुए बच्चों के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी है. जब वे बड़े पदों पर पहुंच जायें, तो झारखंड का और मान बढ़ायें. इसको भी विकसित राज्य की श्रेणी में लायें. दूसरे बच्चों के लिए आगे बढ़ने की राह आसान बनायें. भविष्य आपका है.

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