महत्वाकांक्षा का शिकार नक्सलवाद

समाज की अंतिम पंक्ति में बैठे व्यक्ति को उसका हक-अधिकार दिलाने के उद्देश्य से शुरू नक्सलवाद अब वही नहीं रह गया है. अब वह अति महत्वाकांक्षी और समय से पहले सब कुछ हासिल करने की चाहत रखनेवाले असंतुष्ट व्यक्तियों का गिरोह बन कर रह गया है. ये वे लोग हैं, जो आदिवासियों को बलि का […]
समाज की अंतिम पंक्ति में बैठे व्यक्ति को उसका हक-अधिकार दिलाने के उद्देश्य से शुरू नक्सलवाद अब वही नहीं रह गया है. अब वह अति महत्वाकांक्षी और समय से पहले सब कुछ हासिल करने की चाहत रखनेवाले असंतुष्ट व्यक्तियों का गिरोह बन कर रह गया है.
ये वे लोग हैं, जो आदिवासियों को बलि का बकरा बना कर खुद सत्ता पर कब्जा करना चाह रहे हैं. बेशक आदिवासियों को विकास के नाम पर उनकी ही जमीन से बेदखल किया जा रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आज के नक्सली गिरोह आदिवासियों को उनका हक दे या दिला रहे हैं. छत्तीसगढ़ में जिस तरह से कांग्रेस के नेताओं का सफाया किया गया, वह लोकतंत्र के लिए अच्छे संकेत नहीं है.
इसलिए केंद्र के साथ राज्य सरकारों को दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय देते हुए नक्सलवाद पर अंकुश लगाने के हर उस तरीके को अपनाना चाहिए, जो कारगर साबित हो सके.
रानी सिन्हा, भंडरा
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