सियासी हमदर्दी की दौड़

Updated at : 09 Jan 2018 7:11 AM (IST)
विज्ञापन
सियासी हमदर्दी की दौड़

हिंदुस्तानी मुस्लिम औरतों के हक को कानूनी जामा देने की कोशिश आखिरकार कुछ वक्त के लिए टल गयी. पार्लियामेंट के अंदर से आनेवाली खबरें खुशी तो लायीं, मगर सवालों के दायरे छोटे नहीं थे. पुलिस और मजिस्ट्रेट की दुहाई देने वाले जानते होंगे कि ‘शायरा बानो’ बार-बार पैदा नहीं होती हैं. यह हिंदुस्तान है साहब! […]

विज्ञापन
हिंदुस्तानी मुस्लिम औरतों के हक को कानूनी जामा देने की कोशिश आखिरकार कुछ वक्त के लिए टल गयी. पार्लियामेंट के अंदर से आनेवाली खबरें खुशी तो लायीं, मगर सवालों के दायरे छोटे नहीं थे. पुलिस और मजिस्ट्रेट की दुहाई देने वाले जानते होंगे कि ‘शायरा बानो’ बार-बार पैदा नहीं होती हैं. यह हिंदुस्तान है साहब! यहां शौहर से ज्यादा ‘सिस्टम’ सितम ढाता है.
पर्दानशीं मुस्लिम औरतों के लिए पुलिस और मजिस्ट्रेट कोई बकरी का बच्चा नहीं, जो दौड़ा और पकड़ लिया. वैसे भी एक झटके में तीन तलाक कहना कानून की नजरों में सही नहीं, तो फिर किस बात की माथापच्ची? पूरी तरह हमदर्दी की चाशनी में डूबा बिल पार्लियामेंट में पेश किया गया था. उम्मीद थी कि सियासत से ऊपर बिल पास हो जायेगा, मगर क्या करें उनका, जो हमदर्दी की कब्र पर खड़े हो सियासत का तमाशा देखते हैं. सियासी हमदर्दी की दौड़ में हर कोई एक दूसरे को पीछे छोड़ जाने को बेताब है.
एमके मिश्रा, रांची
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola