बदल रहा है राजनीतिक परिवेश

आजाद भारत के लोकतांत्रिक उदय के बाद नयी पीढ़ी के युवा जोश ने भारतीय राजनीति में भूचाल पैदा कर दिया है. भारतीय राजनीति में नये-पुराने द्वंद्व फिर से शुरू हो गये हैं. कहीं पुरानी गांठ जोड़ी जा रही है, तो कहीं उनमें दरार लाने की कोशिश चल रही है. और हो भी क्यों न, चूंकि […]
आजाद भारत के लोकतांत्रिक उदय के बाद नयी पीढ़ी के युवा जोश ने भारतीय राजनीति में भूचाल पैदा कर दिया है. भारतीय राजनीति में नये-पुराने द्वंद्व फिर से शुरू हो गये हैं. कहीं पुरानी गांठ जोड़ी जा रही है, तो कहीं उनमें दरार लाने की कोशिश चल रही है.
और हो भी क्यों न, चूंकि नये युग निर्माण की जो उम्मीद है, वह सिर्फ इसलिए कि पूर्व में जेपी के संपूर्ण क्रांति से लोग प्रभावित हैं. 2014 का आम चुनाव कई दृष्टियों से बेहद अहम है, जो भारत को नयी दिशा दे सकता है.
किसे मन नहीं करता कि सूरज की पहली किरण और चंद्रमा की ओस की पहली बूंद हम पर पड़े. परिवर्तन की इस बयार का एक और भी संकेत है कि अब रणभूमि में पुरानी रीति-नीति नहीं चलेगी. अब नयी सोच आकार ले रही है. जरूरत है इस नयी सोच को जनता अपनी अभिव्यक्ति से जमीन पर उतरने में योगदान करे.
राकेश प्रियदर्शी, ई-मेल से
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