भरोसा ही भरोसा
Updated at : 17 Jul 2017 6:30 AM (IST)
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आलोक पुराणिक वरिष्ठ व्यंग्यकार एक सर्वे ने बताया कि 73 प्रतिशत भारतीय भारत सरकार पर भरोसा करते हैं, जबकि सिर्फ 30 प्रतिशत अमेरिकनों को अपनी सरकार पर भरोसा है. पर, भारतीय अमेरिका जाने की लाइन में पाये जाते हैं, अमेरिकन भारत में आने की लाइन नहीं लगाते. तो क्या जिस अमेरिकन सरकार पर अमेरिकनों को […]
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आलोक पुराणिक
वरिष्ठ व्यंग्यकार
एक सर्वे ने बताया कि 73 प्रतिशत भारतीय भारत सरकार पर भरोसा करते हैं, जबकि सिर्फ 30 प्रतिशत अमेरिकनों को अपनी सरकार पर भरोसा है. पर, भारतीय अमेरिका जाने की लाइन में पाये जाते हैं, अमेरिकन भारत में आने की लाइन नहीं लगाते. तो क्या जिस अमेरिकन सरकार पर अमेरिकनों को भरोसा नहीं है, उस पर भारतीय ज्यादा भरोसा करते हैं.
सवाल यह है कि 73 प्रतिशत भारतीय भरोसा करते हैं, बाकी 27 प्रतिशत क्यों नहीं करते, क्योंकि उनका काम भारत सरकार से नहीं पड़ता, वह अमेरिकन, ब्रिटिश और स्विस सरकारों से डील करते हैं! बात सिर्फ ब्रिटिश विजय माल्या की नहीं हो रही है.
भारत भरोसा-प्रधान मुल्क है, इच्छाधारी नागिनें होती हैं, इस पर भी भरोसा है भारतीयों को, एक दर्जन से ज्यादा फिल्में-सीरियल नागिनों पर हैं. सत्तर सालों से तो यह भरोसा दिया जा रहा है कि रोटी, कपड़े और मकान का इंतजाम सबके लिए हो जायेगा.
सरकार पर भरोसा ना करो, तो क्या करो. तो प्राइवेट सेक्टर पर भरोसा करो. मैंने सरकारी आवास योजना में घर बुक कराया था- बीस लाख लेकर उन्होंने दस लाख की वैल्यू का घर दिया- टूटा-फूटा.
फिर मैंने निजी सेक्टर पर भरोसा किया- निजी बिल्डर मेरे पंद्रह लाख रुपये लेकर फरार हो गया, अब मुझे आगे कोर्ट पर भरोसा करने का मौका देकर. भरोसा ही भरोसा, कर तो लें. मैं कोसता था सरकारी टेलीफोन कंपनी को कि लाइन ढंग से काम नहीं करती. मैं चला गया निजी टेलीफोन कंपनी की तरफ, उसके लुटेरे बिल ऐसे आते हैं कि उन्हें समझने के लिए दूसरी निजी टेलीफोन कंपनी के लुटेरे बिल विभाग का एकाऊंटेंट होना जरूरी है.
कर लो भरोसा, भरोसा करनेवाले को विकल्प है कि वह अपने भरोसे का शोषण किससे करवाना चाहेगा- निजी सेक्टर से या सरकारी सेक्टर से. सरकारी सेक्टर खराब माल, बहुत खराब सर्विस देगा, पर निजी सेक्टर वाला फरार हो जायेगा. सरकारी सेक्टर में फरार होने का मौका बहुत ऊपरवालों को मिलता है, मंत्री वगैरह के लेवल पर, नीचे बाबू-अफसरों को सिर्फ खराब सर्विस देकर काम चलाना होता है.
फिर भरोसा क्यों करें? ना करें, तो क्या करें? भरोसे के जितने चैनल हैं, वहां लुटने का खतरा हमेशा रहता है. तमाम बाबा, तांत्रिक भरोसा दिलाते हैं- इतने हजार में सुंदरी वशीकरण से लेकर विदेश यात्रा करवा देंगे.
क्या कहा, नहीं होती सुंदरी वश में या विदेश यात्रा. तो फिर अगले बाबा को पकड़िये. बाबा समुदाय इस भरोसे को भुना रहा है कि इस मुल्क की जनसंख्या में इतने बेवकूफ हैं कि बहुत आसानी से बाबाओं की दाल-रोटी ही नहीं हलुआ-पूरी भी चल सकती है.
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